Draupadi Murmu: पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में आयोजित 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन के दौरान एक अभूतपूर्व स्थिति देखने को मिली, जब देश की राष्ट्रपति Draupadi Murmu ने राज्य की ममता बनर्जी सरकार के प्रति अपना कड़ा असंतोष व्यक्त किया। आमतौर पर शांत और शालीन रहने वाली राष्ट्रपति ने सार्वजनिक मंच से मुख्यमंत्री का नाम लेते हुए नाराजगी जताई। राष्ट्रपति का मुख्य आरोप था कि राज्य सरकार ने न केवल प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया, बल्कि अंतरराष्ट्रीय आदिवासी कॉन्क्लेव के लिए जरूरी अनुमतियां देने में भी अड़ंगा लगाया।
बताया जा रहा है कि इस दौरे के दौरान राष्ट्रपति की अगवानी के लिए पश्चिम बंगाल सरकार का कोई भी वरिष्ठ प्रतिनिधि मौजूद नहीं था, जिसे प्रोटोकॉल का गंभीर उल्लंघन माना जा रहा है। राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संबोधन में सीधा प्रहार करते हुए कहा कि संथाल समुदाय के लोगों को कार्यक्रम स्थल तक पहुंचने से रोका गया। यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल सरकार और राजभवन के बीच चल रहे तनाव को एक नए स्तर पर ले गया है, जहां देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्तित्व ने स्वयं अव्यवस्था और असहयोग की बात कही है।
राष्ट्रपति का तीखा प्रहार
राष्ट्रपति Draupadi Murmu ने अपने भाषण में साफ तौर पर कहा कि नॉर्थ बंगाल में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय आदिवासी कॉन्क्लेव में बाधाएं डाली गईं। उन्होंने कहा, “यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि संथालों को वेन्यू तक पहुंचने से रोक दिया गया था।” राष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि आदिवासी समुदायों के विकास और उनकी आवाज को दबाने की कोशिशें सफल नहीं होनी चाहिए।
संथाल भाषा और ‘ओल चिकी’ लिपि का गौरवशाली इतिहास
संथाल समुदाय के योगदान को याद करते हुए राष्ट्रपति Draupadi Murmuने कहा कि साल 2003 इस समुदाय के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। इसी वर्ष संथाल भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया था। उन्होंने पंडित रघुनाथ मुर्मू के योगदान को भी रेखांकित किया, जिन्होंने 1925 में ‘ओल चिकी’ लिपि का आविष्कार किया था। राष्ट्रपति ने कहा, “हाल ही में हमने इस आविष्कार की 100वीं वर्षगांठ मनाई है। उनके योगदान ने संथाल भाषा भाषियों को अपनी पहचान और अभिव्यक्ति का एक सशक्त माध्यम दिया है।”
पूर्वजों के बलिदान और ‘संथाल हुल’ का स्मरण
Draupadi Murmu ने 1855 के ‘संथाल हुल’ (विद्रोह) के नायकों को नमन करते हुए कहा कि आदिवासी समुदाय का इतिहास संघर्ष और वीरता का रहा है। उन्होंने कहा, “यह गर्व की बात है कि हमारे पूर्वज तिलका मांझी ने 240 साल पहले शोषण के खिलाफ आवाज उठाई थी। उनके बाद सिदो-कान्हू, चांद-भैरव और बहादुर फूलो-झानो ने अंग्रेजों और शोषकों के खिलाफ डटकर मुकाबला किया।
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आधुनिक विकास और जड़ों से जुड़ाव का आह्वान
प्रकृति संरक्षण और आधुनिकता के बीच संतुलन बनाने की अपील करते हुए Draupadi Murmu ने आदिवासी युवाओं को शिक्षा और कौशल विकास (Skill Development) पर ध्यान देने की सलाह दी। उन्होंने कहा, ‘आदिवासी समुदायों ने सदियों से प्रकृति के प्रति अपनी संवेदनशीलता को बचाकर रखा है। हमें लोक परंपराओं और पर्यावरण को बचाने के साथ-साथ आधुनिक विकास को अपनाना चाहिए। शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक सशक्तीकरण ही समाज को मजबूत बनाएंगे, लेकिन इस यात्रा में हमें अपनी जड़ों और संस्कृति को कभी नहीं भूलना चाहिए।’
एकता और भाईचारे का संकल्प
राष्ट्रपति Draupadi Murmu ने अंत में संथाल समुदाय सहित सभी आदिवासियों से अपनी भाषा और संस्कृति को बचाने के साथ-साथ समाज में एकता और भाईचारा बनाए रखने का संकल्प लेने को कहा। उन्होंने भरोसा जताया कि आदिवासी समुदाय प्रगति और प्रकृति के बीच तालमेल की एक अनूठी मिसाल कायम करेगा, जिससे एक सशक्त भारत का निर्माण होगा।



