Baba Ramdev Ayodhya Visit: वसंत पंचमी का पावन पर्व इस वर्ष 23 जनवरी को पूरे देश में श्रद्धा, उल्लास और आध्यात्मिक चेतना के साथ मनाया गया। ज्ञान, विद्या और संस्कृति की देवी मां सरस्वती को समर्पित इस विशेष दिन पर योग गुरु और पतंजलि योगपीठ के संस्थापक बाबा रामदेव अयोध्या पहुंचे, जहां उन्होंने श्री राम जन्मभूमि मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।
पूजा के उपरांत बाबा रामदेव ने सनातन धर्म, राष्ट्र चेतना, युवा पीढ़ी और SIR (नागरिक समानता व राष्ट्रीय पहचान से जुड़े विषय) पर खुलकर अपनी बात रखी। उनके बयान को धार्मिक के साथ-साथ सामाजिक और राष्ट्रवादी दृष्टिकोण से भी अहम माना जा रहा है।
Baba Ramdev Ayodhya Visit: रामलला के दर्शन कर भावुक हुए बाबा रामदेव
अयोध्या पहुंचते ही बाबा रामदेव सीधे श्री राम जन्मभूमि मंदिर पहुंचे और रामलला के दर्शन किए। मंदिर परिसर में उन्होंने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा की और प्रभु श्रीराम से देश की एकता, समृद्धि और सांस्कृतिक मजबूती के लिए प्रार्थना की।
दर्शन के बाद बाबा रामदेव भावुक नजर आए। उन्होंने कहा, ‘राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है, यह भारत की आत्मा, उसकी संस्कृति और सनातन चेतना का जीवंत प्रतीक है। अयोध्या आज पूरे राष्ट्र को आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान कर रही है।’
उन्होंने वसंत पंचमी को केवल ऋतु परिवर्तन का पर्व न बताते हुए इसे ज्ञान, अनुशासन और राष्ट्रीय नवजागरण का प्रतीक बताया।
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Baba Ramdev Ayodhya Visit: सनातन धर्म पर बाबा रामदेव का बड़ा और स्पष्ट संदेश
मीडिया से बातचीत में बाबा रामदेव ने सनातन धर्म को लेकर स्पष्ट और दो टूक बयान दिया। उन्होंने कहा कि, ‘सनातन कोई संप्रदाय या पंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की वैज्ञानिक, नैतिक और प्राकृतिक पद्धति है। यही व्यवस्था भारत को हजारों वर्षों से एक सूत्र में बांधे हुए है।’
उन्होंने यह भी कहा कि आज पूरी दुनिया योग, आयुर्वेद और भारतीय जीवन शैली को अपना रही है, लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि भारत के भीतर ही कुछ लोग सनातन पर सवाल उठाने की कोशिश कर रहे हैं।
बाबा रामदेव ने इसे वैचारिक भ्रम बताते हुए कहा कि सनातन पर हमला वास्तव में भारतीय अस्मिता और संस्कृति पर हमला है।
Baba Ramdev Ayodhya Visit: SIR पर क्या बोले बाबा रामदेव?
अपने बयान में बाबा रामदेव ने SIR (नागरिक पहचान, समान अधिकार और जिम्मेदारी से जुड़े विषय) पर भी खुलकर राय रखी। उन्होंने कहा कि, ‘देश की एकता और अखंडता के लिए नागरिकों की पहचान, समानता और कर्तव्यबोध अत्यंत आवश्यक है।’
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत जैसे विविधताओं से भरे देश में राष्ट्रीय हित सर्वोपरि होना चाहिए। किसी भी नीति या व्यवस्था को राजनीतिक चश्मे से नहीं, बल्कि राष्ट्रहित और सामाजिक संतुलन के दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए।
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Baba Ramdev Ayodhya Visit: युवा पीढ़ी, संस्कृति और राष्ट्र निर्माण पर जोर
बाबा रामदेव ने अपने संबोधन में युवाओं को विशेष रूप से संदेश दिया। उन्होंने कहा, ‘आज का युवा ही कल का भारत है। यदि युवा अपनी संस्कृति, योग और सनातन मूल्यों से जुड़ा रहेगा, तो भारत को कोई शक्ति कमजोर नहीं कर सकती।’
उन्होंने शिक्षा के साथ-साथ संस्कारों को अनिवार्य बताते हुए कहा कि वसंत पंचमी जैसे पर्व युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करते हैं।
Baba Ramdev Ayodhya Visit: राम मंदिर को बताया सांस्कृतिक पुनर्जागरण का केंद्र
बाबा रामदेव ने राम मंदिर को भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण का केंद्र बताते हुए कहा कि अयोध्या से निकलने वाली आध्यात्मिक ऊर्जा पूरे देश को दिशा दे रही है।
उनके अनुसार, ‘राम मंदिर अब केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि भारत के राष्ट्रीय आत्मसम्मान और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बन चुका है।’
Baba Ramdev Ayodhya Visit: वसंत पंचमी और भारत के भविष्य पर संदेश
अपने संबोधन के अंत में बाबा रामदेव ने कहा कि, ‘वसंत पंचमी हमें यह याद दिलाती है कि ज्ञान, अनुशासन, संयम और राष्ट्रभक्ति के मार्ग पर चलकर ही भारत विश्वगुरु बनेगा।’
उन्होंने देशवासियों से अपील की कि वे अपने जीवन में योग, आयुर्वेद, संयम और सनातन मूल्यों को अपनाएं।
Baba Ramdev Ayodhya Visit: क्यों अहम है बाबा रामदेव का यह बयान?
• राम जन्मभूमि मंदिर दर्शन के साथ राष्ट्रीय मुद्दों पर खुली राय
• सनातन धर्म को लेकर वैचारिक स्पष्टता और मजबूती
• SIR जैसे संवेदनशील विषय पर राष्ट्रवादी दृष्टिकोण
• युवा पीढ़ी को संस्कृति और राष्ट्र से जोड़ने का संदेश
• वसंत पंचमी को नवभारत की चेतना से जोड़ने का प्रयास
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