Assam CM Controversial Statement: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा एक बार फिर अपने बयान को लेकर विवादों में घिर गए हैं। उनके हालिया बयान को भड़काऊ, सांप्रदायिक और संविधान की भावना के खिलाफ बताते हुए जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इस याचिका के बाद देश की सियासत और कानूनी गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
Assam CM Controversial Statement: क्या है पूरा मामला?
जमीयत उलेमा-ए-हिंद का आरोप है कि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सार्वजनिक मंच से ऐसा बयान दिया, जिससे एक विशेष समुदाय के खिलाफ नफरत और डर का माहौल पैदा हुआ। याचिका में कहा गया है कि मुख्यमंत्री का बयान न केवल समाज को बांटने वाला है, बल्कि इससे कानून-व्यवस्था बिगड़ने का भी खतरा उत्पन्न हो सकता है।
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Assam CM Controversial Statement: सुप्रीम कोर्ट में क्या की गई मांग?
जमीयत की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में कई अहम मांगें रखी गई हैं –
- मुख्यमंत्री के बयान को हेट स्पीच घोषित किया जाए
- सरमा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए जाएं
- भविष्य में संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को ऐसे बयान देने से रोकने के लिए स्पष्ट गाइडलाइंस तय हों
- चुनावी और सार्वजनिक भाषणों में संविधान की मर्यादा सुनिश्चित की जाए
याचिका में यह भी कहा गया है कि अगर ऐसे बयानों पर रोक नहीं लगी, तो यह लोकतंत्र और सामाजिक सौहार्द के लिए घातक साबित होगा।
Assam CM Controversial Statement: जमीयत का तर्क – संविधान से ऊपर कोई नहीं
जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने साफ शब्दों में कहा है कि संविधान से ऊपर कोई नहीं है, चाहे वह मुख्यमंत्री ही क्यों न हो। संगठन का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट पहले भी हेट स्पीच को लेकर सख्त रुख दिखा चुका है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका पालन नहीं हो रहा।
जमीयत ने अदालत से आग्रह किया है कि वह इस मामले में नजीर स्थापित करने वाला फैसला सुनाए, ताकि भविष्य में कोई भी नेता इस तरह की भाषा इस्तेमाल करने से पहले सौ बार सोचे।
Assam CM Controversial Statement: विपक्ष का हमला, सियासत गरमाई
इस याचिका के बाद विपक्षी दलों ने भी मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस, एआईयूडीएफ और अन्य दलों ने आरोप लगाया कि बीजेपी नेता ध्रुवीकरण की राजनीति कर रहे हैं और चुनावी फायदे के लिए समाज को बांटने का काम किया जा रहा है।
विपक्ष का कहना है कि जब एक मुख्यमंत्री इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करता है, तो उसका असर सीधे आम जनता पर पड़ता है।
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Assam CM Controversial Statement: बीजेपी का बचाव – बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया
वहीं, बीजेपी की ओर से इस पूरे मामले को राजनीति से प्रेरित बताया जा रहा है। पार्टी नेताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री के बयान को संदर्भ से अलग कर पेश किया गया है और जमीयत जानबूझकर विवाद खड़ा कर रही है।
बीजेपी का दावा है कि सरमा ने कानून और व्यवस्था की बात की थी, न कि किसी समुदाय को निशाना बनाने की।
Assam CM Controversial Statement: सुप्रीम कोर्ट का रुख क्यों है अहम?
यह मामला इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि हाल के वर्षों में सुप्रीम कोर्ट ने हेट स्पीच और भड़काऊ बयानों पर सख्त टिप्पणियां की हैं। अगर अदालत इस याचिका पर सुनवाई के दौरान कड़ा रुख अपनाती है, तो यह देशभर के नेताओं के लिए बड़ा संदेश हो सकता है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह केस फ्री स्पीच बनाम जिम्मेदार अभिव्यक्ति की बहस को एक बार फिर केंद्र में ला सकता है।
Assam CM Controversial Statement: आगे क्या?
अब सबकी नजरें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं कि वह इस याचिका पर क्या रुख अपनाता है। क्या मुख्यमंत्री के बयान को हेट स्पीच की श्रेणी में माना जाएगा? या फिर यह मामला राजनीतिक बयानबाजी मानकर खारिज हो जाएगा?
जो भी फैसला आए, इतना तय है कि यह मामला भारतीय राजनीति, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संवैधानिक मर्यादाओं पर दूरगामी असर डाल सकता है।
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