78th Army Day Jaipur: भारतीय सेना ने गुरुवार को जयपुर में 78वां सेना दिवस (78th Army Day Jaipur) अभूतपूर्व गौरव, अनुशासन और तकनीकी शक्ति के साथ मनाया। यह मौका इसलिए भी ऐतिहासिक रहा क्योंकि यह चौथी बार था जब सेना दिवस परेड दिल्ली के बाहर आयोजित हुई और पहली बार किसी असैन्य क्षेत्र में इसका भव्य आयोजन किया गया। राजस्थान को इस ऐतिहासिक परेड की मेजबानी का गौरव प्राप्त हुआ, जिसने राज्य को राष्ट्रीय सैन्य मानचित्र पर विशेष पहचान दिलाई।
सेना दिवस परेड में दिखा नेतृत्व और अनुशासन का अद्भुत संगम
इस भव्य आयोजन में राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागडे, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, मिजोरम के राज्यपाल जनरल (सेवानिवृत्त) वी.के. सिंह, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान और सप्तशक्ति कमान के सेना कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल मनजिंदर सिंह सहित कई सैन्य व नागरिक गणमान्यजन मौजूद रहे।
थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने 78th Army Day Jaipur परेड का निरीक्षण कर जवानों की सलामी ली।
इस वर्ष सेना दिवस की थीम ‘भारतीय सेना-शौर्य और बलिदान’ रही, जिसके तहत सेना ने अपनी परंपरा, अनुशासन और आधुनिक ताकत का शानदार प्रदर्शन किया।
स्वदेशी हथियारों और अत्याधुनिक तकनीक ने खींचा ध्यान
सेना दिवस परेड (78th Army Day Jaipur) में भारत की आत्मनिर्भर रक्षा शक्ति का जीवंत प्रदर्शन देखने को मिला। स्वदेशी ब्रह्मोस मिसाइल, भीष्म और अर्जुन टैंक, के-9 वज्र तोप, बीएमपी वाहन, पिनाका रॉकेट लॉन्चर, नामिस (नाग मिसाइल सिस्टम), शिल्का हथियार प्रणाली और ड्रोन शक्ति ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया।
इसके अलावा रोबोटिक म्यूल, स्वाथी वेपन लोकेटिंग राडार, मॉड्यूलर ब्रिजिंग सिस्टम, मल्टी बैरल रॉकेट सिस्टम, ड्रोन जैमर सिस्टम और इलेक्ट्रिक ऑल-टेरेन व्हीकल जैसी आधुनिक सैन्य प्रणालियों ने भविष्य की युद्ध क्षमता की झलक दिखाई। नवगठित भैरव बटालियन सहित कुल सात रेजीमेंट की टुकड़ियों ने प्रभावशाली मार्च पास्ट किया।

वीर शहीदों को मरणोपरांत सम्मान
परेड से पहले ऑपरेशन ‘सिंदूर’ और अन्य अभियानों में अदम्य साहस दिखाने वाले वीर सैनिकों को मरणोपरांत सेना मेडल (गैलेंट्री) से सम्मानित किया गया। इनमें सूबेदार मेजर पवन कुमार, हवलदार सुनील कुमार सिंह, लांस नायक दिनेश कुमार, सुभाष कुमार और प्रदीप कुमार शामिल रहे। यह पल पूरे समारोह का सबसे भावुक और प्रेरणादायक क्षण रहा।
राजस्थानी संस्कृति और सैन्य परंपरा का अनोखा मेल
सेना दिवस परेड में राजस्थान की समृद्ध लोक संस्कृति भी देखने को मिली। भरतपुर की फूलों की होली, कच्छी घोड़ी, गैर, कालबेलिया नृत्य और दंगल की झलकियों ने आयोजन को सांस्कृतिक रंग प्रदान किया। तीन चेतक हेलीकॉप्टरों ने तिरंगे और संयुक्त सेनाध्वज के साथ पुष्प वर्षा की, जबकि अपाचे हेलीकॉप्टरों और नाल एयरबेस से उड़े जगुआर लड़ाकू विमानों की गर्जना ने आसमान में रोमांच भर दिया।
जनभागीदारी ने बनाया आयोजन यादगार
इस ऐतिहासिक अवसर पर बड़ी संख्या में नागरिक, वेटरन्स, युवा और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। आमजन की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने यह साबित किया कि भारतीय सेना केवल सीमा की रक्षक ही नहीं, बल्कि हर भारतीय के गर्व और विश्वास का प्रतीक है।
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