Nagpur Factory Explosion: महाराष्ट्र के नागपुर जिले में रविवार सुबह एक दर्दनाक औद्योगिक हादसे (Nagpur Factory Explosion) ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। काटोल तहसील के राउलगांव स्थित एसबीएल एनर्जी लिमिटेड के विस्फोटक कारखाने में हुए भीषण धमाके में कम से कम 15 मजदूरों की मौत हो गई, जबकि 18 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। यह हादसा कंपनी की डेटोनेटर पैकिंग यूनिट में हुआ, जहां उस समय कामकाज जारी था।
सुबह की शिफ्ट बनी हादसे की वजह
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह विस्फोट (Nagpur Factory Explosion) सुबह 7 बजे से 7:15 बजे के बीच हुआ। उस समय सुबह 6 बजे की शिफ्ट चल रही थी और यूनिट में कुल 32 मजदूर तथा 2 सुपरवाइजर मौजूद थे। डेटोनेटर तैयार करने की प्रक्रिया के दौरान तार को डेटोनेटर से जोड़ते समय अचानक तेज धमाका हुआ, जिसने पूरी यूनिट को हिला कर रख दिया। नागपुर ग्रामीण पुलिस अधीक्षक हर्षवर्धन पोद्दार ने बताया कि विस्फोट इतना तीव्र था कि उसकी आवाज कई किलोमीटर दूर तक सुनी गई। स्थानीय लोगों ने भी धमाके की तीव्रता की पुष्टि की।
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घायलों का इलाज जारी, अस्पताल में अफरा-तफरी
घटना के तुरंत बाद प्रशासन हरकत में आया और घायलों को तत्काल ऑरेंज सिटी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। अस्पताल सूत्रों के अनुसार, कई घायलों की हालत गंभीर बनी हुई है और उन्हें आईसीयू में रखा गया है। रेस्क्यू टीमों ने मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य शुरू किया। देर शाम तक मलबा हटाने और संभावित फंसे लोगों की तलाश का अभियान जारी रहा। कंपनी प्रबंधन ने कहा है कि वे जल्द ही आधिकारिक बयान जारी करेंगे।
सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल
इस हादसे (Nagpur Factory Explosion) के बाद औद्योगिक सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि धमाका डेटोनेटर पैकिंग सेक्शन में हुआ, जो अत्यधिक संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के कारखानों में सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन बेहद जरूरी होता है। स्थानीय प्रशासन ने जांच के आदेश दे दिए हैं। विस्फोट के कारणों की विस्तृत जांच की जा रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कहीं लापरवाही या तकनीकी खामी तो इस त्रासदी की वजह नहीं बनी।
परिवारों में मातम, गांव में पसरा सन्नाटा
हादसे (Nagpur Factory Explosion) के बाद राउलगांव और आसपास के इलाकों में शोक की लहर दौड़ गई। मृतकों में अधिकांश स्थानीय मजदूर बताए जा रहे हैं। कई परिवारों के घरों में कमाने वाला इकलौता सदस्य इस हादसे में जान गंवा बैठा। ग्रामीणों का कहना है कि फैक्ट्री में पहले भी छोटे-मोटे हादसे हुए थे, लेकिन इस तरह का बड़ा विस्फोट पहली बार हुआ है। लोग अब फैक्ट्री की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी पर सवाल उठा रहे हैं।
आगे क्या?
प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही है। साथ ही, फैक्ट्री में कामकाज को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। औद्योगिक सुरक्षा विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम जांच कर रही है। यह हादसा (Nagpur Factory Explosion) केवल एक औद्योगिक दुर्घटना नहीं, बल्कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी के संभावित खतरों की एक गंभीर चेतावनी भी है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट से कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने की उम्मीद है।
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