MP Anuppur Agarwal Lodge Tragedy: मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले के कोतमा कस्बे में शनिवार शाम एक दिल दहला देने वाला हादसा सामने आया, जिसने न सिर्फ तीन जिंदगियां छीन लीं बल्कि निर्माण सुरक्षा को लेकर बड़े सवाल भी खड़े कर दिए। बस स्टैंड के पास स्थित चार मंजिला ‘अग्रवाल लॉज’ (MP Anuppur Agarwal Lodge Tragedy) अचानक ताश के पत्तों की तरह भरभराकर गिर गई। इस हादसे ने पूरे इलाके में दहशत और शोक का माहौल बना दिया है।
कुछ ही सेकंड में ढह गई पूरी इमारत
स्थानीय लोगों के मुताबिक, यह हादसा शाम करीब 5:30 से 5:50 बजे के बीच हुआ। एक जोरदार धमाके जैसी आवाज आई और देखते ही देखते पूरी इमारत जमींदोज (MP Anuppur Agarwal Lodge Tragedy) हो गई। आसपास मौजूद लोगों को कुछ समझ आता, उससे पहले ही सब कुछ मलबे में तब्दील हो चुका था। करीब 10 साल पुरानी यह इमारत पूरी तरह से ढह गई, जिससे कई लोग उसके नीचे दब गए। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि हादसा इतना अचानक था कि किसी को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला।
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रेस्क्यू ऑपरेशन जारी, 3 की मौत, कई अब भी लापता
हादसे के बाद तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल, स्थानीय पुलिस और प्रशासन की टीमें पिछले 18 घंटे से लगातार मलबा हटाने में जुटी हैं। रविवार सुबह करीब 11 बजे मलबे से एक महिला का शव निकाला गया, जिसकी पहचान अभी तक नहीं हो सकी है। इससे पहले दो अन्य लोगों के शव भी बरामद किए जा चुके थे। अब तक कुल 5 लोगों को बाहर निकाला गया है, जिनमें 3 की मौत हो चुकी है जबकि अन्य घायल अस्पताल में भर्ती हैं। प्रशासन को आशंका है कि अभी भी कुछ लोग मलबे में दबे हो सकते हैं, जिसके चलते रेस्क्यू ऑपरेशन तेजी से जारी है।
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निर्माण कार्य बना हादसे की वजह?
हादसे (MP Anuppur Agarwal Lodge Tragedy) की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि लॉज के ठीक बगल में एक प्लॉट पर निर्माण कार्य चल रहा था। बताया जा रहा है कि 20×50 फीट के प्लॉट पर करीब 12 फीट गहरा गड्ढा खोदा गया था, जिसमें पानी भर गया था। स्थानीय लोगों और शुरुआती जांच के अनुसार, इस पानी से लॉज की नींव कमजोर हो गई थी, जो अंततः इमारत गिरने का कारण बनी। अधिकारियों ने भी माना है कि पास में चल रहे अंडरग्राउंड निर्माण कार्य की भूमिका इस हादसे में हो सकती है।
सरकार सख्त, जांच के आदेश
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस घटना (MP Anuppur Agarwal Lodge Tragedy) पर गहरा दुख जताया है। उन्होंने मृतकों के परिजनों और घायलों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा करते हुए मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। मृतकों के परिवारों को कुल 9 लाख रुपये की सहायता (मुख्यमंत्री स्वेच्छा अनुदान, संबल योजना और रेडक्रॉस) दी जाएगी, जबकि घायलों को 2.5 लाख रुपये तक की मदद दी जाएगी। वहीं, मंत्री दिलीप अहीरवार ने बताया कि प्रशासन पूरी तरह से मौके पर तैनात है और राहत कार्य में कोई कमी नहीं छोड़ी जा रही है।
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प्रशासन की निगरानी और जिम्मेदारी तय करने की तैयारी
जिला कलेक्टर हर्षल पंचोली और पुलिस अधीक्षक मोती उर रहमान लगातार घटनास्थल (MP Anuppur Agarwal Lodge Tragedy) पर मौजूद हैं और स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि निर्माण या सुरक्षा मानकों में किसी भी तरह की लापरवाही पाई गई तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
बड़ा सवाल – क्या यह हादसा टाला जा सकता था?
इस घटना ने एक बार फिर शहरी और कस्बाई इलाकों में अनियंत्रित निर्माण कार्यों और लापरवाही को उजागर कर दिया है। क्या निर्माण से पहले सुरक्षा मानकों की जांच हुई थी? क्या आसपास की इमारतों पर पड़ने वाले असर का आकलन किया गया था? ये सवाल अब जांच का हिस्सा बन चुके हैं, लेकिन जिन परिवारों ने अपने अपनों को खोया है, उनके लिए यह सिर्फ एक हादसा नहीं बल्कि जिंदगीभर का दर्द बन चुका है।
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