V2V Vehicle Communication: सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए केंद्र सरकार एक बड़े तकनीकी बदलाव की दिशा में कदम बढ़ा रही है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने गुरुवार को बताया कि सरकार वाहन-से-वाहन (V2V) संचार आधारित वायरलेस तकनीक (V2V Vehicle Communication) लाने पर काम कर रही है। इस अत्याधुनिक तकनीक से वाहन आपस में सीधे संवाद कर सकेंगे, जिससे चालकों को आसपास मौजूद अन्य वाहनों की गति, दूरी, ब्रेक लगाने और ब्लाइंड स्पॉट में मौजूद वाहनों की जानकारी रियल-टाइम अलर्ट के रूप में मिलेगी।
गडकरी ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के परिवहन मंत्रियों की वार्षिक बैठक के बाद आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि इस तकनीक से चालक समय रहते सतर्क हो सकेंगे और दुर्घटनाओं की आशंका में बड़ी कमी आएगी।
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30 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम को सैद्धांतिक मंजूरी
गडकरी ने जानकारी दी कि इस परियोजना के लिए दूरसंचार विभाग के साथ संयुक्त कार्यबल का गठन किया गया है। दूरसंचार विभाग ने V2V संचार (V2V Vehicle Communication) के लिए 30 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम (5.875–5.905 गीगाहर्ट्ज) के उपयोग को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। यह वायरलेस तकनीक खासतौर पर पीछे से तेज गति से आने वाले वाहनों, ट्रैफिक में खड़े वाहनों और अचानक सामने आने वाले खतरे की समय रहते जानकारी देगी। विशेषज्ञों के अनुसार, यह तकनीक कोहरे के दौरान होने वाली सामूहिक टक्करों को रोकने में भी बेहद कारगर साबित होगी।

V2V Vehicle Communication: कैसे काम करेगी वी2वी तकनीक
मंत्रालय के सचिव वी. उमाशंकर ने बताया कि यह तकनीक सिम कार्ड जैसी एक विशेष चिप (V2V Vehicle Communication) के जरिए काम करेगी, जिसे वाहनों में लगाया जाएगा। जैसे ही कोई वाहन दूसरे वाहन के बेहद नजदीक आएगा, चालक को तुरंत रियल-टाइम अलर्ट मिलेगा।
यह प्रणाली वाहन के चारों ओर (360 डिग्री) काम करेगी। शुरुआत में यह तकनीक नए वाहनों में अनिवार्य रूप से लगाई जाएगी और बाद में चरणबद्ध तरीके से सभी वाहनों में लागू की जाएगी। इस पूरी परियोजना पर करीब 5,000 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है।
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हर साल 5 लाख सड़क हादसे, 1.8 लाख मौतें
गडकरी ने चिंता जताते हुए कहा कि देश में हर साल करीब 5 लाख सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, जिनमें लगभग 1.8 लाख लोगों की मौत हो जाती है। इनमें से 66 प्रतिशत मौतें 18 से 34 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं की होती हैं। सरकार सड़क इंजीनियरिंग में सुधार, कानूनों के सख्त पालन और यातायात नियमों के उल्लंघन पर कड़े दंड के जरिए भी हादसों में कमी लाने की कोशिश कर रही है।
मोटर वाहन अधिनियम में बड़े संशोधन की तैयारी
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सरकार आगामी बजट सत्र में मोटर वाहन अधिनियम में 61 संशोधन लाने की तैयारी कर रही है। इन संशोधनों का उद्देश्य सड़क सुरक्षा बढ़ाना, कारोबारी सुगमता में सुधार, नागरिक सेवाओं को बेहतर बनाना, कानूनों की भाषा को सरल करना और उन्हें वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाना है।
बैठक में बस बॉडी कोड, बीएनसीएपी सुरक्षा रेटिंग, चरणबद्ध तरीके से एडीएएस (Advanced Driver Assistance System) लागू करने, यातायात उल्लंघनों के लिए अंक-आधारित निगरानी प्रणाली और मालवाहक वाहनों के लिए डिजिटल एवं स्वचालित परमिट जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
सड़क हादसा पीड़ितों के लिए कैशलेस इलाज योजना
गडकरी ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल्द ही पूरे देश में सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए कैशलेस इलाज योजना शुरू करेंगे। ‘सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए कैशलेस इलाज योजना, 2025’ के तहत पीड़ितों को दुर्घटना की तारीख से सात दिन तक 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज मिलेगा। यह योजना देश की सभी श्रेणियों की सड़कों पर लागू होगी।
V2V Vehicle Communication: स्लीपर बसों की सुरक्षा पर सख्ती
आग की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए सरकार ने (V2V Vehicle Communication) फैसला किया है कि अब स्लीपर कोच बसें केवल ऑटोमोबाइल कंपनियों या केंद्र सरकार से मान्यता प्राप्त केंद्रों में ही बनाई जाएंगी। साथ ही मौजूदा स्लीपर बसों में फायर डिटेक्शन सिस्टम, इमरजेंसी एग्जिट, इमरजेंसी लाइटिंग, ड्राइवर नींद संकेतक लगाना अनिवार्य होगा। पिछले छह महीनों में स्लीपर बसों से जुड़े छह आग हादसों में 145 लोगों की मौत हो चुकी है।
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