Punjab Republic Day Tableau 2026: 26 जनवरी 2026 को जब देश की निगाहें नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर सजी गणतंत्र दिवस परेड पर टिकी होंगी, तब पंजाब सरकार की झांकी (Punjab Republic Day Tableau 2026) सिर्फ़ परंपरा का निर्वाह नहीं करेगी, बल्कि यह भारत की आत्मा को छूने वाला संदेश लेकर आगे बढ़ेगी। यह झांकी सत्ता के प्रदर्शन से अलग, मानवता, करुणा और बलिदान की उस परंपरा को सामने लाएगी, जिसने पंजाब को हमेशा इतिहास की अग्रिम पंक्ति में खड़ा रखा है।
मान सरकार का विषय चयन – इतिहास नहीं, वर्तमान का सवाल
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार ने इस वर्ष जो विषय चुना है, वह केवल सिख इतिहास की झलक नहीं देता, बल्कि आज के सामाजिक माहौल से सीधा संवाद करता है। जब समाज को सहिष्णुता, संवाद और संवेदनशीलता की ज़रूरत है, तब यह झांकी याद दिलाती है कि भारत की असली ताक़त हथियारों में नहीं, बल्कि त्याग और सह-अस्तित्व में निहित है।

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दो हिस्सों में सजी झांकी, एक विचार की अभिव्यक्ति
पंजाब की झांकी (Punjab Republic Day Tableau 2026) को ट्रैक्टर और ट्रेलर दो हिस्सों में डिज़ाइन किया गया है। ट्रैक्टर के अग्रभाग पर उभरा हाथ का प्रतीक मानवता, दया और भाईचारे का संदेश देता है। इसके साथ घूमता हुआ ‘एक ओंकार’ चिन्ह यह उद्घोष करता है कि ईश्वर एक है और पूरी सृष्टि उसी एकता से बंधी हुई है।
‘हिंद दी चादर’- इतिहास से वर्तमान तक
झांकी पर अंकित शब्द ‘हिंद दी चादर’ केवल एक नारा नहीं, बल्कि वह विचारधारा है जिसने अत्याचार के विरुद्ध खड़े होने का साहस सिखाया। यह उपाधि नौवें सिख गुरु श्री गुरु तेग बहादुर साहिब से जुड़ी है, जिनका बलिदान आज भी धार्मिक स्वतंत्रता और मानव अधिकारों का प्रतीक माना जाता है।
शब्द कीर्तन और आध्यात्मिक ऊर्जा
ट्रेलर हिस्से में रागी सिंहों द्वारा प्रस्तुत शब्द कीर्तन का दृश्य झांकी (Punjab Republic Day Tableau 2026) को आध्यात्मिक ऊंचाई देता है। यह केवल दृश्य सौंदर्य नहीं, बल्कि उस आस्था की अभिव्यक्ति है, जिसने सिख पंथ को सेवा और समर्पण के मार्ग पर अग्रसर रखा।
खंडा साहिब और सीस गंज साहिब का प्रतीकात्मक संदेश
झांकी (Punjab Republic Day Tableau 2026) के पीछे सुशोभित खंडा साहिब सिख पंथ की शक्ति, एकता और आत्मबल का प्रतीक बनकर उभरता है। इसके साथ गुरुद्वारा श्री सीस गंज साहिब का मॉडल उस ऐतिहासिक स्थल की याद दिलाता है, जहां गुरु तेग बहादुर साहिब ने मानवता की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया।
शहादत के प्रतीक – मती दास, सती दास और दयाला जी
झांकी के साइड पैनल भाई मती दास जी, भाई सती दास जी और भाई दयाला जी की शहादत को दर्शाते हैं। यह दृश्य बताता है कि सच्चाई और धर्म की रक्षा के लिए जीवन भी छोटा पड़ सकता है, लेकिन सिद्धांत कभी नहीं।
350वां शहीदी दिवस – सिर्फ़ आयोजन नहीं, विचार की निरंतरता
पंजाब सरकार द्वारा हाल ही में गुरु तेग बहादुर साहिब जी के 350वें शहीदी दिवस को ऐतिहासिक स्तर पर मनाना इस झांकी की पृष्ठभूमि को और मज़बूत करता है। श्री आनंदपुर साहिब के कार्यक्रम, देश-विदेश से निकले नगर कीर्तन और भाई जैता जी स्मारक स्थल पर विधानसभा का विशेष सत्र यह सब सरकार की उस सोच को दर्शाता है, जो आस्था को राजनीति नहीं, बल्कि संवेदनशील नेतृत्व से जोड़ती है।
आने वाली पीढ़ियों के लिए संदेश
कर्तव्य पथ पर चलने वाली यह झांकी (Punjab Republic Day Tableau 2026) आने वाली पीढ़ियों को यह सिखाएगी कि भारत की पहचान शक्ति प्रदर्शन से नहीं, बल्कि मानव एकता, करुणा और बलिदान से बनती है। यह झांकी एक राज्य की नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र की सामूहिक चेतना की झलक है।
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