Census 2027 Data Security: भारत में बहुप्रतीक्षित जनगणना 2027 का पहला चरण 1 अप्रैल से शुरू होने जा रहा है। इस बार जनगणना प्रक्रिया (Census 2027 Data Security) पहले से ज्यादा आधुनिक और डिजिटल होने वाली है। हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना के तहत लोगों से कुल 33 तरह के सवाल पूछे जाएंगे, जिनमें घर, परिवार, सुविधाओं और जीवन स्तर से जुड़ी जानकारी शामिल होगी। इस बीच सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या आम जनता का डेटा सुरक्षित रहेगा? इसी पर सरकार की ओर से अहम स्पष्टीकरण सामने आया है।
‘आपका डेटा पूरी तरह सुरक्षित है’ – सरकार का आश्वासन
भारत के महापंजीयक और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायणन ने साफ तौर पर कहा है कि जनगणना के दौरान जुटाई गई व्यक्तिगत जानकारी पूरी तरह गोपनीय रहेगी। उन्होंने बताया कि जनगणना अधिनियम 1948 की धारा 15 के तहत किसी भी व्यक्ति की जानकारी को न तो सार्वजनिक किया जा सकता है और न ही किसी अन्य उद्देश्य के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। यह डेटा न तो RTI के तहत साझा किया जाएगा, न अदालत में साक्ष्य के रूप में उपयोग होगा और न ही किसी सरकारी या निजी संस्था के साथ साझा किया जाएगा।
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पहली बार डिजिटल और सेल्फ-एन्यूमरेशन
इस बार जनगणना (Census 2027 Data Security) में सबसे बड़ा बदलाव डिजिटल प्रक्रिया को लेकर है। पहली बार लोगों को ‘स्व-गणना’ (Self Enumeration) की सुविधा दी जा रही है। इस सुविधा के तहत नागरिक पहले चरण से 15 दिन पहले खुद ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। इससे न केवल प्रक्रिया आसान होगी, बल्कि डेटा प्रोसेसिंग भी तेजी से हो सकेगी। पहले जहां कागज पर डेटा इकट्ठा किया जाता था, वहीं अब शुरुआत से ही डिजिटल डेटा मिलने के कारण परिणाम जल्दी जारी किए जा सकेंगे।
मोबाइल ऐप और वेब पोर्टल से निगरानी
जनगणना प्रक्रिया (Census 2027 Data Security) को और पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए मोबाइल ऐप और वेब पोर्टल का इस्तेमाल किया जाएगा। गणनाकर्मी मोबाइल ऐप के जरिए डेटा इकट्ठा करेंगे, जबकि वेब पोर्टल के माध्यम से पूरी प्रक्रिया की निगरानी और प्रबंधन किया जाएगा। इससे त्रुटियों को कम करने और रियल टाइम अपडेट सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
डेटा सुरक्षा के लिए खास इंतजाम
डेटा सुरक्षा को लेकर भी सरकार ने बड़े कदम उठाए हैं। जनगणना से जुड़े डेटा सेंटरों को ‘क्रिटिकल इंफॉर्मेशन इंफ्रास्ट्रक्चर’ घोषित किया गया है। इसका मतलब है कि इन सिस्टम्स की सुरक्षा सर्वोच्च स्तर पर सुनिश्चित की जाएगी, ताकि किसी भी तरह की साइबर या डेटा लीक की आशंका को रोका जा सके।
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कोई दस्तावेज नहीं, सिर्फ जानकारी
जनगणना के दौरान नागरिकों से किसी भी प्रकार का दस्तावेज नहीं मांगा जाएगा। केवल मौखिक या स्वयं भरी गई जानकारी के आधार पर ही डेटा दर्ज किया जाएगा। यह कदम प्रक्रिया को सरल बनाने और ज्यादा से ज्यादा लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
जाति डेटा दूसरे चरण में
जाति आधारित डेटा को लेकर भी सरकार ने स्थिति स्पष्ट की है। महापंजीयक के अनुसार, जाति से संबंधित जानकारी दूसरे चरण में एकत्र की जाएगी। इसके लिए प्रश्नों को व्यापक चर्चा और विचार-विमर्श के बाद अंतिम रूप दिया जाएगा, ताकि प्रक्रिया संतुलित और सटीक हो।
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NPR और अन्य प्रक्रियाओं से अलग
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय जनसंख्या पंजी (NPR) को अपडेट करने पर अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है। साथ ही, इसका चुनाव आयोग की किसी भी प्रक्रिया से कोई संबंध नहीं है, जिससे भ्रम की स्थिति को दूर किया गया है।
जनगणना 2027 सिर्फ आंकड़ों का संग्रह नहीं, बल्कि देश की सामाजिक और आर्थिक तस्वीर को समझने का सबसे बड़ा माध्यम है। डिजिटल तकनीक, सेल्फ-एन्यूमरेशन और मजबूत डेटा सुरक्षा जैसे कदम इस प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने की दिशा में अहम हैं। अब यह नागरिकों की जिम्मेदारी है कि वे सही और सटीक जानकारी देकर इस राष्ट्रीय कार्य में योगदान दें।
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