Kishtwar Operation: जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में सुरक्षाबलों ने एक लंबे और बेहद रणनीतिक ऑपरेशन के बाद आतंकवाद के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल की है। 326 दिनों तक चले अभियान में जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े ‘इजरायल ग्रुप’ के सात आतंकियों को मार गिराया गया। इस ऑपरेशन में ड्रोन, सैटेलाइट निगरानी और जमीनी स्तर की संयुक्त कार्रवाई ने अहम भूमिका निभाई।
भारतीय सेना की डेल्टा फोर्स ने जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ के साथ मिलकर इस मॉड्यूल को खत्म किया। बताया जा रहा है कि इस ग्रुप का नेतृत्व टॉप कमांडर सैफुल्लाह कर रहा था, जो लंबे समय से सुरक्षाबलों को चकमा देता आ रहा था।
कैसे मिला पहला सुराग?
इस ऑपरेशन की बड़ी सफलता 4 फरवरी को मिली जब ‘ऑपरेशन त्राशी-1’ के दौरान पाकिस्तानी आतंकी आदिल को मार गिराया गया। आदिल को सैफुल्लाह का डिप्टी माना जाता था। इसी कार्रवाई ने पूरे नेटवर्क तक पहुंचने का रास्ता खोल दिया। इसके बाद लगातार निगरानी और इलाके की घेराबंदी ने बाकी आतंकियों की गतिविधियों को सीमित कर दिया। (Kishtwar Operation)
LOC से घुसपैठ कर सक्रिय हुआ था ग्रुप
सूत्रों के अनुसार यह आतंकी मॉड्यूल अप्रैल 2024 में नियंत्रण रेखा पार कर भारत में दाखिल हुआ था। डोडा और किश्तवाड़ के दुर्गम इलाकों में यह ग्रुप लंबे समय तक छिपा रहा और कई बार सुरक्षाबलों की पकड़ से बच निकला। लेकिन 21-22 फरवरी के ऑपरेशन में सेना ने सैफुल्लाह समेत फरमान अली और बशरा उर्फ हुरेरा को ढेर कर दिया। (Kishtwar Operation)
दुर्गम इलाकों में लगातार अभियान
पहलगाम नरसंहार के बाद सुरक्षाबलों ने डोडा और किश्तवाड़ के दुर्गम व ऊंचाई वाले इलाकों में बड़े स्तर पर सर्च ऑपरेशन शुरू किया। भारी बर्फबारी और कड़ाके की ठंड के बावजूद सेना ने अभियान जारी रखा। इस दौरान गुफाओं की तलाशी ली गई, चरवाहों की ढोक (अस्थायी ठिकानों) की जांच की गई और जंगलों में लगातार निगरानी रखी गई। आतंकियों की संभावित गतिविधियों को रोकने के लिए इन क्षेत्रों में 43 फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस भी स्थापित किए गए, ताकि भविष्य में वे इन जगहों को सुरक्षित पनाहगाह के रूप में इस्तेमाल न कर सकें। (Kishtwar Operation)

बरामद हुए खतरनाक हथियार
एनकाउंटर के बाद आतंकियों के पास से अत्याधुनिक और खतरनाक हथियार बरामद हुए। इनमें AK-47 और M-4 राइफल के साथ विशेष स्टील बुलेट्स शामिल थीं। ये बुलेट्स इतनी घातक होती हैं कि बुलेटप्रूफ जैकेट को भी भेद सकती हैं, जो इस मॉड्यूल की तैयारी और मंशा की गंभीरता को दर्शाती हैं। (Kishtwar Operation)
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तकनीक ने बदली लड़ाई की दिशा
इस पूरे ऑपरेशन में आधुनिक तकनीक ने अहम भूमिका निभाई। सुरक्षाबलों ने ड्रोन निगरानी, थर्मल इमेजिंग और सैटेलाइट इंटेलिजेंस जैसी अत्याधुनिक प्रणालियों का इस्तेमाल किया, जिससे दुर्गम इलाकों में छिपे आतंकियों की गतिविधियों को सटीक रूप से ट्रैक करना संभव हो सका। इन तकनीकी संसाधनों की मदद से सेना को आतंकियों की लोकेशन, मूवमेंट और संभावित ठिकानों की जानकारी समय रहते मिलती रही, जिसने ऑपरेशन की दिशा ही बदल दी। (Kishtwar Operation)



