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अंतर्राष्ट्रीयInternational

AI की मदद से मिडिल ईस्ट में तबाही मचा रहा अमेरिका, 24 घंटे में तबाह किए ईरान के 1,000 ठिकाने

Rupam
Last updated: 2026-03-07 5:58 अपराह्न
Rupam Published 2026-03-07
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AI की मदद से मिडिल ईस्ट में तबाही मचा रहा अमेरिका, 24 घंटे में तबाह किए ईरान के 1,000 ठिकाने
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US Iran War AI Technology: आधुनिक युद्ध कौशल अब केवल बारूद और मिसाइलों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अब इसकी कमान ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (AI) के हाथों में आ गई है। अमेरिका ने ईरान के खिलाफ जारी संघर्ष में AI तकनीक का आक्रामक इस्तेमाल करते हुए महज 24 घंटे के भीतर लगभग 1,000 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर दुनिया को हैरान कर दिया है। इस ऑपरेशन की सबसे बड़ी खासियत इसकी ‘किल चेन’ प्रक्रिया की रफ्तार रही, जिसने दुश्मन को संभलने तक का मौका नहीं दिया।

Contents
‘किल चेन’ की रफ्तार और AI का जादूवेनेजुएला से ईरान तककैसे काम करता है यह सैन्य AI सिस्टम?‘इंसानी सोच से भी तेज है एआई की स्पीड’6 महीने का ‘ट्रांजिशन’ पीरियड

रिपोर्ट्स के अनुसार, इस घातक सटीकता के पीछे अमेरिकी कंपनी एंथ्रोपिक द्वारा विकसित ‘क्लॉड’ (Claude) AI मॉडल का हाथ है। हालांकि, इस तकनीक के सैन्य इस्तेमाल ने एक बड़े वैश्विक विवाद को जन्म दे दिया है। जहां एक ओर अमेरिकी सेना इसे अपनी सबसे बड़ी शक्ति मान रही है, वहीं दूसरी ओर एआई विकसित करने वाली कंपनियां इसके युद्ध में उपयोग को लेकर नैतिक सवाल उठा रही हैं। इस तकनीक ने युद्ध के पहले 12 घंटों में ही 900 से अधिक मिसाइलें दागने में डेटा और नेविगेशन की सटीक मदद की है।

‘किल चेन’ की रफ्तार और AI का जादू

सैन्य शब्दावली में ‘किल चेन’ वह प्रक्रिया है जिसमें लक्ष्य की पहचान करने से लेकर उस पर हमला करने तक के चरण शामिल होते हैं। AI की मदद से यह प्रक्रिया अब सेकंडों में पूरी हो रही है। इस ऑपरेशन में पलांटिर (Palantir) के ‘मेवन स्मार्ट सिस्टम’ का उपयोग किया गया, जिसमें एंथ्रोपिक का एआई इंजन लगा है। यह सिस्टम सैटेलाइट इमेज और खुफिया डेटा को पलक झपकते ही स्कैन करता है और सेना को उन ठिकानों की सूची सौंप देता है जिन्हें नष्ट किया जाना है। (US Iran War AI Technology)

US Iran War AI Technology
US Iran War AI Technology

वेनेजुएला से ईरान तक

खबरों की मानें तो इसी एआई तकनीक का इस्तेमाल जनवरी में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने के ऑपरेशन में भी हुआ था। हालांकि, एंथ्रोपिक कंपनी ने इसका कड़ा विरोध किया है। कंपनी का कहना है, ‘हमारे नियमों के अनुसार, क्लॉड AI का इस्तेमाल हिंसा, हथियार बनाने या किसी की गुप्त निगरानी जैसे सैन्य कार्यों के लिए नहीं किया जा सकता।’ इस विरोध से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बेहद नाराज हुए। उन्होंने एंथ्रोपिक को ‘कट्टर वामपंथी एआई कंपनी’ करार देते हुए सभी सरकारी कॉन्ट्रैक्ट रद्द करने का मन बना लिया था। लेकिन रक्षा विभाग (Pentagon) की मजबूरी यह है कि फिलहाल उनके पास इसके बराबर की कोई दूसरी तकनीक मौजूद नहीं है। (US Iran War AI Technology)

कैसे काम करता है यह सैन्य AI सिस्टम?

यह सिस्टम केवल टारगेट नहीं बताता, बल्कि पूरी प्लानिंग करके देता है। इसके काम करने के मुख्य चरण इस प्रकार हैं,

टारगेट की रैंकिंग: सिस्टम महत्व के आधार पर लक्ष्यों की लिस्ट तैयार करता है।

हथियार का चुनाव: यह सुझाव देता है कि किस ठिकाने के लिए कौन सी मिसाइल या बम सबसे प्रभावी होगा।

डेटा एनालिसिस: पुराने हमलों के अनुभव के आधार पर यह सफलता की दर (Success Rate) की गणना भी करता है।

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‘इंसानी सोच से भी तेज है एआई की स्पीड’

न्यूकैसल यूनिवर्सिटी के रक्षा विशेषज्ञ क्रेग जोन्स ने इस तकनीक के प्रभाव पर कहा, ‘AI सिस्टम की स्पीड कई बार इंसानी सोच से भी कहीं ज्यादा तेज होती है। पहले ऐसे हमलों की योजना बनाने और उन्हें अंजाम देने में विशेषज्ञों को कई दिन या हफ्ते लग जाते थे, लेकिन अब AI की मदद से सैकड़ों हमले एक साथ और अविश्वसनीय गति से किए जा सकते हैं।’(US Iran War AI Technology)

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6 महीने का ‘ट्रांजिशन’ पीरियड

अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने स्पष्ट किया है कि एंथ्रोपिक अगले छह महीनों तक रक्षा विभाग को अपनी सेवाएं देना जारी रखेगा। इस दौरान अमेरिकी सेना किसी ऐसे दूसरे AI सिस्टम पर शिफ्ट होने की कोशिश करेगी जो सैन्य उपयोग के लिए पूरी तरह समर्पित हो और जिसके साथ कोई नीतिगत विवाद न हो।(US Iran War AI Technology)

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