UK PM refuses troops to Iran: मध्य पूर्व में गहराते युद्ध के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। ईरान और इजरायल के बीच जारी भीषण सैन्य संघर्ष में अमेरिका को अपने सबसे भरोसेमंद सहयोगियों से ही बड़ा झटका लगा है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने इस जंग में अपनी सेना भेजने से साफ इनकार कर दिया है। स्टार्मर के इस कड़े रुख ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अमेरिका की रणनीतिक तैयारियों को कमजोर कर दिया है, जिससे ट्रंप प्रशासन अब बैकफुट पर नजर आ रहा है।
सिर्फ ब्रिटेन ही नहीं, बल्कि यूरोपीय देश स्पेन ने भी अमेरिका की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। स्पेन ने ईरान के खिलाफ होने वाली किसी भी सैन्य कार्रवाई के लिए अपना एयरस्पेस (वायु क्षेत्र) देने से मना कर दिया है। इसके साथ ही स्पेन ने अपने सैन्य अड्डों का इस्तेमाल रीफ्यूलिंग या हमले के लिए करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। सहयोगियों के इस असहयोग ने वाशिंगटन की उन योजनाओं को ठंडे बस्ते में डाल दिया है, जिसके तहत वह ईरान पर चौतरफा दबाव बनाने की कोशिश कर रहा था। (UK PM refuses troops to Iran)
ब्रिटेन के पीएम कीर स्टार्मर का दो-टूक जवाब
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने स्पष्ट कर दिया है कि यूके इस संघर्ष में सीधी भागीदारी नहीं करेगा। उन्होंने सेना भेजने की मांग को ठुकराते हुए कहा कि ब्रिटेन की भूमिका केवल रक्षात्मक (Defensive) रहेगी। स्टार्मर ने अपने बयान में कड़ा संदेश देते हुए कहा,’यह हमारी लड़ाई नहीं है। हम इसमें शामिल नहीं होंगे। यूके केवल ब्रिटिश लोगों की जान, अपने हितों और क्षेत्र में सहयोगियों की रक्षा के लिए रक्षात्मक कार्रवाई कर रहा है। ‘उन्होंने आगे कहा कि ब्रिटेन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुला रखने में मदद करेगा, लेकिन युद्ध के मैदान में अपनी सेना नहीं झोंकेगा। हालांकि, उन्होंने ब्रिटिश ठिकानों के सीमित इस्तेमाल की अनुमति अमेरिका को जरूर दी है। (UK PM refuses troops to Iran)

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स्पेन ने बंद किया अपना आसमा
स्पेन ने अमेरिका को सबसे बड़ा झटका तब दिया जब उसने अपने ‘रोटा’ और ‘मोरोन’ एयर बेस के इस्तेमाल पर पाबंदी लगा दी। स्पेन के इस फैसले के कारण अमेरिका को अपने शक्तिशाली B-52 और B-1 बॉम्बर विमानों को वहां तैनात करने का विचार त्यागना पड़ा है। स्पेन के अर्थव्यवस्था मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों का हवाला देते हुए कहा कि वे किसी भी ऐसी गतिविधि का हिस्सा नहीं बनेंगे जो युद्ध को बढ़ावा देती हो। स्पेन का यह फैसला ट्रंप की ‘मैक्सिमम प्रेशर’ रणनीति के लिए एक बड़ी बाधा साबित हो रहा है। (UK PM refuses troops to Iran)
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ईरान वॉर में अलग-थलग पड़े डोनाल्ड ट्रंप
डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद यह पहला मौका है जब नाटो (NATO) के सहयोगी देश इस तरह खुलकर अमेरिका के फैसलों का विरोध कर रहे हैं। इजरायल-ईरान युद्ध में अमेरिका चाहता था कि उसके सहयोगी देश मिलकर ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों पर हमला करें, लेकिन ब्रिटेन और स्पेन के पीछे हटने से यह गठबंधन बिखरता नजर आ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यूरोपीय देश अब अमेरिका के किसी भी नए युद्ध में घसीटे जाने के मूड में नहीं हैं। (UK PM refuses troops to Iran)
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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर टिकी दुनिया की नजरें
भले ही ब्रिटेन ने सेना भेजने से मना किया हो, लेकिन उसने ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के संकट को हल करने में सहयोग की बात कही है। यह जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का सबसे महत्वपूर्ण रास्ता है। ईरान ने इस रास्ते को बंद करने की धमकी दी है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में कोहराम मच सकता है। ब्रिटेन की कोशिश है कि वह केवल नौसेना के जरिए इस व्यापारिक मार्ग को सुरक्षित रखे, न कि ईरान के अंदरूनी हिस्सों में घुसकर हमला करे। (UK PM refuses troops to Iran)



