PM Modi Israel Visit: प्रधानमंत्री Narendra Modi की प्रस्तावित दो दिवसीय इजराइल यात्रा से पहले वहां की राजनीति में असामान्य हलचल देखने को मिल रही है। इजराइल की संसद, Knesset, में पीएम मोदी के विशेष संबोधन को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं। विवाद की जड़ संसद अध्यक्ष की ओर से देश के मुख्य न्यायाधीश को आमंत्रित न किए जाने का फैसला है, जिसे विपक्ष प्रोटोकॉल के उल्लंघन के रूप में देख रहा है।
PM Modi Israel Visit दोनों देशों के रिश्तों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसे में नेसेट में उनका संबोधन प्रतीकात्मक और कूटनीतिक दृष्टि से खास महत्व रखता है। लेकिन कार्यक्रम से पहले उत्पन्न राजनीतिक गतिरोध ने इसे घरेलू सियासत का मुद्दा बना दिया है।
चीफ जस्टिस को आमंत्रण न देने पर विवाद
विपक्ष का आरोप है कि संसद अध्यक्ष Amir Ohana ने सुप्रीम कोर्ट के अध्यक्ष यित्झाक अमित को कार्यक्रम में आमंत्रित नहीं कर प्रोटोकॉल की अनदेखी की है। विपक्षी दलों का कहना है कि इस तरह के ऐतिहासिक PM Modi Israel Visit पर संवैधानिक पदों पर आसीन सभी प्रमुख हस्तियों की उपस्थिति आवश्यक होती है।
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इजराइल में विपक्ष के नेता Yair Lapid ने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu से हस्तक्षेप की अपील की है। लैपिड ने कहा कि यह देश के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है और इसे आंतरिक राजनीतिक मतभेदों से ऊपर रखकर देखा जाना चाहिए। उनका तर्क है कि एक बड़े अंतरराष्ट्रीय मित्र के स्वागत के समय देश की एकजुटता का संदेश जाना चाहिए।
बहिष्कार की चेतावनी
विपक्ष ने साफ संकेत दिया है कि यदि चीफ जस्टिस को आमंत्रित नहीं किया गया तो वे कार्यक्रम का बहिष्कार कर सकते हैं। हालांकि, विपक्षी नेताओं ने यह भी कहा है कि वे पीएम मोदी के संबोधन को सुनने के इच्छुक हैं और इसे एक ऐतिहासिक क्षण मानते हैं। यही कारण है कि वे चाहते हैं कि कार्यक्रम से पहले गतिरोध दूर किया जाए।
दूसरी ओर, संसद अध्यक्ष अमीर ओहाना ने विपक्ष की चेतावनी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि यदि विपक्ष बहिष्कार करता है तो खाली सीटों को पूर्व सांसदों को आमंत्रित कर भरा जाएगा। इस बयान ने राजनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया है।
कूटनीति बनाम घरेलू राजनीति
विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद केवल प्रोटोकॉल तक सीमित नहीं है, बल्कि इजराइल में कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव की पृष्ठभूमि में भी देखा जा रहा है। ऐसे में पीएम मोदी का संबोधन एक अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम होते हुए भी आंतरिक राजनीतिक संघर्ष का हिस्सा बन गया है।
प्रधानमंत्री नेतन्याहू की सरकार पहले से ही कई संवेदनशील मुद्दों पर विपक्ष के निशाने पर रही है। ऐसे में यह विवाद सत्ता और विपक्ष के बीच अविश्वास की एक और कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।
भारत में भी उठी आवाज
इस बीच भारत में भी PM Modi Israel Visit को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कांग्रेस सांसद Priyanka Gandhi ने सोशल मीडिया के माध्यम से उम्मीद जताई है कि प्रधानमंत्री अपने नेसेट संबोधन में गाजा में मारे गए निर्दोष नागरिकों का मुद्दा उठाएंगे।
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उन्होंने लिखा कि भारत का इतिहास न्याय और शांति के पक्ष में खड़े होने का रहा है और ऐसे में प्रधानमंत्री को अपने संबोधन में मानवीय मूल्यों की बात करनी चाहिए। प्रियंका गांधी का यह बयान घरेलू राजनीति के साथ-साथ भारत की विदेश नीति पर भी चर्चा को जन्म दे रहा है।
PM Modi Israel Visit पर टिकी निगाहें
प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री नेतन्याहू के बीच पहले भी मजबूत व्यक्तिगत और राजनीतिक संबंधों की झलक मिलती रही है। ऐसे में यह PM Modi Israel Visit द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है। रक्षा, प्रौद्योगिकी, कृषि और नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावना है।
हालांकि, नेसेट में उत्पन्न यह विवाद इस PM Modi Israel Visit की औपचारिक भव्यता पर असर डाल सकता है। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि क्या नेतन्याहू हस्तक्षेप कर विपक्ष को साथ लाने में सफल होते हैं या फिर पीएम मोदी का संबोधन राजनीतिक बहिष्कार की छाया में होगा।
एक कूटनीतिक कार्यक्रम ने इजराइल की घरेलू राजनीति को गरमा दिया है, जबकि भारत में भी इस PM Modi Israel Visit के संदर्भ में अलग-अलग राजनीतिक संदेश सामने आ रहे हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यह विवाद किस दिशा में जाता है और पीएम मोदी का संबोधन किस माहौल में होता है?
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