Nicolas Maduro Arrest: अमेरिकी सेना ने ‘ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व’ के तहत वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोर्स को महज 30 मिनट में गिरफ्तार कर लिया। यह मिशन 2-3 जनवरी की रात को अंजाम दिया गया और इसमें 150 से अधिक एयरक्राफ्ट का इस्तेमाल किया गया। गिरफ्तारी मादुरो की अमेरिका को चुनौती देने वाली टिप्पणियों के बाद की गई, जिससे अमेरिका-वेनेजुएला के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव में नया मोड़ आया।
‘ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व’ क्या है?
अमेरिकी रक्षा सूत्रों के मुताबिक, यह ऑपरेशन बेहद गोपनीय तरीके से प्लान किया गया था। मादुरो पर लंबे समय से मादक पदार्थों की तस्करी, अवैध हथियार नेटवर्क और अंतरराष्ट्रीय अपराध संगठनों से सांठगांठ के आरोप लगते रहे हैं। ट्रंप प्रशासन का दावा है कि तमाम चेतावनियों के बावजूद मादुरो ने अमेरिका को खुलेआम चुनौती दी, जिसके बाद यह कार्रवाई जरूरी हो गई।
बेडरूम से गिरफ्तारी, 59 मिनट में मिशन पूरा
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, यूएस डेल्टा फोर्स ने वेनेजुएला की राजधानी काराकस में राष्ट्रपति आवास के आसपास घेरा बनाया था। बिना किसी बड़े टकराव के मादुरो और उनकी पत्नी को हिरासत में ले लिया। यह पूरी कार्रवाई सिर्फ 59 मिनट में पूरी हुई। इसके तुरंत बाद दोनों को विशेष विमान से न्यूयॉर्क ले जाया गया, जहां उन पर संघीय अदालत में मुकदमा चलाया जाएगा।

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‘आओ मुझे पकड़ो…’ बयान बना मजाक का कारण
इस पूरे घटनाक्रम के बाद व्हाइट हाउस ने एक 62 सेकेंड का वीडियो जारी किया, जिसने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया। वीडियो की शुरुआत मादुरो के उसी पुराने भाषण से होती है, जिसमें वह कहते हैं, ‘आओ मुझे पकड़ो… मैं मिराफ्लोरेस में इंतजार करूंगा। देर मत करना, कायर।’ इसके बाद वीडियो में उनकी गिरफ्तारी के दृश्य और अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ की प्रेस ब्रीफिंग दिखाई गई है। हेगसेथ कहते नजर आते हैं, ‘मादुरो के पास मौका था, लेकिन उन्होंने उसे गंवा दिया। अब उन्हें इसकी कीमत चुकानी होगी।’
अमेरिका और वेनेजुएला की पुरानी दुश्मनी में नया मोड़
गौरतलब है कि अमेरिका और वेनेजुएला के रिश्ते पिछले एक दशक से तनावपूर्ण रहे हैं। वहीं अब ये पुरानी दुश्मनी नए मोड़ पर पहुंच गई है। ट्रंप प्रशासन ने पहले भी मादुरो सरकार पर आर्थिक दबाव, प्रतिबंध और राजनीतिक अलगाव जैसी नीतियां लागू की थी। लेकिन मादुरो की सीधे गिरफ्तारी ने इस टकराव को इतिहास के सबसे बड़े भू-राजनीतिक संकटों में बदल दिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय राजनीति और क्षेत्रीय स्थिरता पर गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका बढ़ गई है।
वेनेजुएला में आपातकाल से जनता में डर
मादुरो की गिरफ्तारी के बाद वेनेजुएला में आपातकाल घोषित कर दिया गया है। कई शहरों में बिजली गुल रही, इंटरनेट सेवाएं बाधित हुईं और सड़कों पर सेना तैनात कर दी गई। आम नागरिकों में भय और अनिश्चितता का माहौल है। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि इस घटना से लैटिन अमेरिका में अस्थिरता और बढ़ सकती है।
वैश्विक राजनीति पर क्या होगा असर?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मादुरो की गिरफ्तारी केवल वेनेजुएला तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसका असर वैश्विक राजनीति पर भी पड़ेगा। इससे तेल बाजार में उथल-पुथल मच सकती है, क्योंकि वेनेजुएला प्रमुख तेल निर्यातक देश है। अमेरिका-विरोधी देशों की प्रतिक्रिया तेज हो सकती है और यह मुद्दा संयुक्त राष्ट्र में भी तीखी बहस का विषय बन सकता है। इन सभी घटनाओं का असर आने वाले हफ्तों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्पष्ट रूप से दिखाई देगा और वैश्विक राजनीतिक एवं आर्थिक परिदृश्य पर लंबी छाप छोड़ सकता है।
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क्या यह ताकत का प्रदर्शन है या चेतावनी?
आपको बता दें कि ट्रंप समर्थक इसे अमेरिका की ताकत और ‘जीरो टॉलरेंस नीति’ का उदाहरण बता रहे हैं। जबकि आलोचक इसे संप्रभु देश के आंतरिक मामलों में दखल मान रहे हैं। हालांकि, एक बात तय है ‘आओ और मुझे ले जाओ’ कहना मादुरो के लिए इतिहास की सबसे महंगी चुनौती साबित हुआ। क्योंकि इसके 30 मिनट बाद ही अमेरिका के कमांडो उन्हें बेडरूम से अरेस्ट कर लिए।



