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अंतर्राष्ट्रीय

Mojtaba Khamenei: ईरान को मिला नया सुप्रीम लीडर, मुजतबा खामेनेई की नियुक्ति से वैश्विक राजनीति में हलचल

Manisha
Last updated: 2026-03-09 4:44 अपराह्न
Manisha Published 2026-03-09
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Mojtaba Khamenei
Mojtaba Khamenei: ईरान को मिला नया सुप्रीम लीडर, मुजतबा खामेनेई की नियुक्ति से वैश्विक राजनीति में हलचल
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Mojtaba Khamenei: ईरान की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है. देश की प्रमुख धार्मिक संस्था Assembly of Experts ने आयतुल्लाह Mojtaba Khamenei को ईरान का नया सुप्रीम लीडर घोषित कर दिया है. लंबे समय से चल रही अटकलों के बाद रविवार को इस फैसले की आधिकारिक घोषणा की गई.

Contents
अमेरिका और इजराइल की चेतावनियों के बावजूद लिया गया फैसलायुद्ध जैसे माहौल के बीच चुना गया नया नेताईरान ने बाहरी हस्तक्षेप को किया खारिजमुजतबा खामेनेई की छवि और राजनीतिक प्रभावपहले भी अंतरराष्ट्रीय विवादों में रहा नाममध्य पूर्व की राजनीति पर पड़ सकता है असर

मुजतबा खामेनेई, पूर्व सुप्रीम लीडर Ali Khamenei के बेटे हैं. उनके पिता की हाल ही में हमलों के दौरान मौत हो गई थी, जिसके बाद ईरान के सर्वोच्च पद पर नए नेता को लेकर चर्चाएं तेज हो गई थीं. अंततः असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने बैठक कर बहुमत के आधार पर मुजतबा खामेनेई को देश का तीसरा सुप्रीम लीडर नियुक्त किया.

अमेरिका और इजराइल की चेतावनियों के बावजूद लिया गया फैसला

नए सुप्रीम लीडर Mojtaba Khamenei  के चयन से पहले अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी काफी बयानबाजी देखने को मिली. अमेरिका और इजराइल दोनों ने ईरान की नेतृत्व प्रक्रिया को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी थी.

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने मीडिया से बातचीत में कहा था कि उन्हें Mojtaba Khamenei का नेतृत्व स्वीकार्य नहीं है. उन्होंने यह भी संकेत दिया था कि नए नेता के चयन में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की राय को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए.

READ MORE: सऊदी अरब में रिहायशी इलाके पर मिसाइल हमला, भारतीय समेत 2 की मौत, दूतावास ने जारी की एडवाइजरी

इसी तरह इजराइल की ओर से भी कड़े बयान सामने आए थे. इजराइल ने चेतावनी दी थी कि जो भी व्यक्ति अली खामेनेई का उत्तराधिकारी बनेगा, वह उनके निशाने पर होगा. इन चेतावनियों के बावजूद ईरान की धार्मिक संस्था ने बिना देरी किए नया नेता चुन लिया.

युद्ध जैसे माहौल के बीच चुना गया नया नेता

रिपोर्टों के मुताबिक, क्षेत्र में बढ़ते तनाव और हमलों के बीच असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स की बैठक बुलाई गई थी. इस बैठक में देश के शीर्ष धार्मिक नेताओं और प्रतिनिधियों ने भाग लिया.

बैठक के बाद जारी बयान में कहा गया कि कठिन परिस्थितियों और बाहरी दबावों के बावजूद नेतृत्व के सवाल पर कोई देरी नहीं की गई. संस्था ने कहा कि ईरान की राजनीतिक और धार्मिक व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए नया सुप्रीम लीडर चुनना जरूरी था.

बयान में यह भी कहा गया कि 56 वर्षीय मुजतबा खामेनेई को असेंबली के प्रतिनिधियों के महत्वपूर्ण वोट के आधार पर यह जिम्मेदारी सौंपी गई है.

Read : ईरान पर ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ का कहर, मिसाइलों की बारिश के बीच भी अपनी मिट्टी छोड़ने को तैयार नहीं ईरानी

ईरान ने बाहरी हस्तक्षेप को किया खारिज

नए सुप्रीम लीडर Mojtaba Khamenei की नियुक्ति के बाद ईरान की सरकार ने स्पष्ट रूप से कहा कि यह फैसला पूरी तरह देश का आंतरिक मामला है.

ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने एक इंटरव्यू में कहा कि किसी भी विदेशी शक्ति को ईरान के घरेलू मामलों में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है. उन्होंने कहा कि देश की नेतृत्व व्यवस्था संविधान और धार्मिक संस्थाओं के अनुसार तय की जाती है.

उन्होंने अमेरिका की आलोचना करते हुए यह भी कहा कि क्षेत्र में तनाव बढ़ाने के लिए जिम्मेदार देशों को अपने कदमों पर विचार करना चाहिए. उनके मुताबिक, अगर हालात सामान्य बनाने हैं तो पहले युद्ध और टकराव की राजनीति को खत्म करना होगा.

मुजतबा खामेनेई की छवि और राजनीतिक प्रभाव

विश्लेषकों के अनुसार मुजतबा खामेनेई को ईरान की राजनीतिक व्यवस्था में प्रभावशाली और रूढ़िवादी नेता माना जाता है. Mojtaba Khamenei का संबंध देश की शक्तिशाली सैन्य संस्था Islamic Revolutionary Guard Corps से काफी करीबी माना जाता है.

इस संस्था की भूमिका ईरान की सुरक्षा नीति और विदेश नीति में बेहद अहम है. इसलिए कई विशेषज्ञों का मानना है कि Mojtaba Khamenei के नेतृत्व में देश की मौजूदा रणनीतियों को और मजबूती मिल सकती है.

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पहले भी अंतरराष्ट्रीय विवादों में रहा नाम

Mojtaba Khamenei का नाम पहले भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहा है. वर्ष 2019 में अमेरिका के वित्त विभाग ने उन पर प्रतिबंध लगाए थे. उस समय आरोप लगाया गया था कि वह अपने पिता के प्रतिनिधि के रूप में कई अहम राजनीतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभाल रहे थे.

अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी दावा किया था कि उनके पास विदेशों में संपत्तियां और बैंक खाते हैं. हालांकि ईरान ने इन आरोपों को राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश बताया था और उन्हें सिरे से खारिज कर दिया था.

मध्य पूर्व की राजनीति पर पड़ सकता है असर

Mojtaba Khamenei के सुप्रीम लीडर बनने के बाद मध्य पूर्व की राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं. ईरान पहले से ही क्षेत्रीय राजनीति में एक प्रभावशाली देश माना जाता है और उसके फैसलों का असर कई देशों पर पड़ता है.

विशेषज्ञों का मानना है कि नए नेतृत्व के साथ ईरान की विदेश नीति, सुरक्षा रणनीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में कुछ बदलाव देखने को मिल सकते हैं. हालांकि यह भी संभव है कि देश अपनी मौजूदा नीतियों को ही आगे बढ़ाए.

फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि मुजतबा खामेनेई के नेतृत्व में ईरान आने वाले समय में किस दिशा में आगे बढ़ता है और वैश्विक राजनीति पर इसका क्या असर पड़ता है.

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