Khamenei Wife Death: ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत की खबरों के बीच अब उनकी पत्नी मंसूरेह खोजस्तेह बागेरजादेह के निधन की खबर ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। अमेरिका और इसराइल के हालिया सैन्य ऑपरेशन के दौरान खामेनेई के साथ उनकी पत्नी की मौत की सूचना भी सामने आ रही है। मंसूरेह को ‘इंटरनेशनल मिस्ट्री’ कहा जाता है क्योंकि लगभग चार दशकों तक सत्ता के शीर्ष पर रहने वाले शख्स की पत्नी होने के बावजूद, ईरान में भी उन्हें कोई पहचानता नहीं था। वे हमेशा कैमरों की चकाचौंध से दूर रहीं, लेकिन जानकारों का मानना है कि वे ईरान की असली ‘किंगमेकर’ थी।
मंसूरेह और खामेनेई की शादी 1964 में हुई थी, जिसके बाद से ही उन्होंने खुद को दुनिया की नजरों से पूरी तरह काट लिया था। वे केवल एक पत्नी नहीं, बल्कि खामेनेई की सबसे भरोसेमंद सलाहकार मानी जाती थीं। उनके जीवन का इकलौता इंटरव्यू 1993 में सामने आया था, जिसमें उन्होंने सत्ता के गलियारों के पीछे छिपे संघर्ष, गरीबी और खौफनाक रातों का जिक्र किया था। आज जब उनके जाने की खबर आ रही है, तो ईरान के उस रहस्यमयी परिवार की कहानी फिर से चर्चा में है जिसे खामेनेई ने हमेशा लाइमलाइट से बचाकर रखा।
इकलौता इंटरव्यू और संघर्ष की दास्तां
ईरान जैसी जगह पर जहां सूचनाओं पर कड़ा पहरा है, मंसूरेह का इंटरव्यू किसी तिलिस्म से कम नहीं था। 1993 में एक विदेशी पत्रिका को दिए इंटरव्यू में उन्होंने खुलासा किया था कि उनकी शादी के शुरुआती साल बेहद डरावने थे। उन्होंने कहा था, ‘मेरी शादी के शुरुआती साल डर और आंसुओं में बीते। पुलिस हर वक्त हमारे घर पर दस्तक देती थी। मुझे पता भी नहीं होता था कि मेरे पति जिंदा लौटेंगे या नहीं।’ यह वह दौर था जब खामेनेई शाह के खिलाफ आंदोलन कर रहे थे और बार-बार जेल जा रहे थे। (Khamenei Wife Death)
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जेल की सलाखों और गरीबी के बीच ‘किंगमेकर’
मंसूरेह ने उस दौर में किंगमेकर की भूमिका निभाई जब खामेनेई सलाखों के पीछे थे। वे गुपचुप तरीके से जेल में खबरें पहुंचाती थी और सरकार विरोधी परचे छापने व बांटने में मदद करती थी। उन्होंने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए बताया था, ‘मैंने वो दिन देखे हैं जब घर में खाने के लिए कुछ नहीं था और बाहर सिपाही पहरा दिया करते थे। न कोई बाहर जा सकता था और न ही घर के अंदर किसी को आने दिया जाता था।’ इतनी बड़ी ताकत होने के बावजूद उन्होंने कभी लग्जरी की मांग नहीं की और ताउम्र एक साधारण घर में रहना पसंद किया। (Khamenei Wife Death)

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अस्पताल में भी नहीं खुली पहचान
मंसूरेह की गुमनामी का आलम यह था कि एक बार जब वे गंभीर रूप से बीमार हुई और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, तो वहां के स्टाफ तक को यह अंदाजा नहीं था कि वे देश के सबसे ताकतवर इंसान की पत्नी हैं। खामेनेई ने हमेशा अपने परिवार को राजनीतिक प्रचार से दूर रखा। ईरानी मीडिया के अनुसार, खामेनेई के हर बड़े और कड़े फैसले के पीछे मंसूरेह की मौन सहमति और सलाह शामिल होती थी। (Khamenei Wife Death)
जंग और रहस्यमयी अंत
ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिस भीषण हमले में खामेनेई को निशाना बनाया गया, उसी मलबे में मंसूरेह ने भी अपनी आखिरी सांसें ली। 36 साल तक पर्दे के पीछे रहकर ईरान की तकदीर लिखने वाली यह महिला अपने पीछे कई अनसुलझे सवाल छोड़ गई है। क्या उनके बाद ईरान की नई लीडरशिप में महिलाओं की भूमिका बदलेगी या मंसूरेह की तरह ही उन्हें गुमनाम रखा जाएगा? यह वक्त बताएगा, लेकिन मंसूरेह का जाना ईरान के लिए एक युग का अंत है। (Khamenei Wife Death)



