JD Vance in Islamabad: भारतीय संगीत जगत की अनमोल रत्न आशा भोसले अब हमारे बीच नहीं रहीं, लेकिन उनकी जादुई आवाज सदियों तक गूंजती रहेगी। 92 वर्ष की आयु में उनका निधन संगीत के एक विशाल अध्याय का अंत है। आशा ताई ने अपने 8 दशकों से भी लंबे करियर में 12 हजार से ज्यादा गानों को अपनी आवाज दी, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस ऐतिहासिक सफर की शुरुआत कैसे हुई थी? आशा भोसले के पहले गाने की रिकॉर्डिंग का किस्सा किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है, जिसमें संघर्ष, सादगी और संगीत के प्रति अटूट समर्पण झलकता है।
आज से करीब 83 साल पहले, जब संगीत की दुनिया में तकनीक इतनी उन्नत नहीं थी, तब 10 साल की एक छोटी सी बच्ची ने अपना पहला कदम रिकॉर्डिंग स्टूडियो में रखा था। अपनी बड़ी बहन लता मंगेशकर की छत्रछाया और पिता पंडित दीनानाथ मंगेशकर के संस्कारों के बीच पली-बढ़ी आशा ने अपना पहला गाना किसी हिंदी फिल्म के लिए नहीं, बल्कि एक मराठी फिल्म के लिए गाया था। आइए जानते हैं उस सुबह की कहानी जब भारतीय सिनेमा को उसकी ‘क्वीन ऑफ वर्साटैलिटी’ मिली थी। (JD Vance in Islamabad)
महज 10 साल की उम्र में शुरू हुआ सफर
आशा भोसले के करियर की शुरुआत बेहद कम उम्र में हो गई थी। साल 1943 में उन्होंने अपना पहला गाना रिकॉर्ड किया था। उस समय उनकी उम्र महज 10 साल थी। यह गाना मराठी फिल्म ‘माझा बाळ’ (Mazha Bal) के लिए था। गाने के बोल थे ‘चला चला नव बाला’। हालांकि उस दौर में एक छोटी बच्ची के लिए रिकॉर्डिंग स्टूडियो का अनुभव आज के समय जैसा आसान नहीं था। (JD Vance in Islamabad)
सुबह 4 बजे की रिकॉर्डिंग और पेड़ के नीचे रियाज
आशा भोसले ने कई साक्षात्कारों में अपनी पहली रिकॉर्डिंग की यादें साझा की हैं। उन्होंने बताया था कि उस समय रिकॉर्डिंग के लिए सुबह-सुबह का समय तय किया गया था। कड़ाके की ठंड और सुबह के 4 बजे आशा भोसले को रिकॉर्डिंग के लिए तैयार होना पड़ता था। स्टूडियो जाने से पहले वह पेड़ के नीचे खड़ी होकर अपने सुरों का अभ्यास करती थीं। उस नन्हीं सी उम्र में भी संगीत के प्रति उनकी गंभीरता ऐसी थी कि उन्होंने बिना थके और बिना डरे अपनी पहली रिकॉर्डिंग पूरी की।(JD Vance in Islamabad)
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लता मंगेशकर की कामयाबी के बीच अपना रास्ता
जब आशा भोसले ने इंडस्ट्री में कदम रखा, तब उनकी बड़ी बहन लता मंगेशकर पहले से ही एक स्थापित नाम बन चुकी थीं। लता जी की सफलता के विशाल वटवृक्ष के नीचे अपनी अलग पहचान बनाना आशा के लिए बड़ी चुनौती थी। उन्हें अपनी बहन से कहीं ज्यादा संघर्ष करना पड़ा। शुरुआती दिनों में उन्हें ऐसे गाने दिए जाते थे जिन्हें मुख्य गायक छोड़ देते थे या जो चुनौतीपूर्ण होते थे, लेकिन आशा ने हर अवसर को अपनी ताकत बनाया। (JD Vance in Islamabad)
हिंदी सिनेमा में ‘सावन आया’ से शुरुआत
मराठी फिल्म से शुरुआत करने के बाद, आशा भोसले ने साल 1948 में फिल्म ‘चुनरिया’ के गाने ‘सावन आया’ के जरिए हिंदी सिनेमा में अपना पहला कदम रखा। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने शास्त्रीय संगीत से लेकर जैज, रॉक और पॉप तक हर विधा में अपनी आवाज का लोहा मनवाया। (JD Vance in Islamabad)
12 हजार गानों की विरासत
83 साल पहले शुरू हुआ वह छोटा सा सफर 12 हजार से ज्यादा गानों और अनगिनत पुरस्कारों तक पहुंचा। आशा भोसले के पहले गाने की वह मासूमियत और सुबह 4 बजे की वो मेहनत ही थी, जिसने उन्हें ‘गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड’ होल्डर और ‘पद्म विभूषण’ से सम्मानित महान कलाकार बनाया। आज भले ही उनकी आवाज हमेशा के लिए खामोश हो गई है, लेकिन उनका पहला गाना और उनका संघर्ष हर उभरते कलाकार के लिए प्रेरणा बना रहेगा। (JD Vance in Islamabad)
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