Iran US War: मिडिल ईस्ट एक बार फिर बारूद के ढेर पर खड़ा दिख रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव खुले मिलिट्री एक्शन की कगार पर लगता है। जिनेवा में बातचीत बेनतीजा रही, और अब अंदाजा लगाया जा रहा है कि अगर अगले दो हफ़्तों में कोई समझौता नहीं हुआ, तो हालात जंग तक बढ़ सकते हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या रमजान के पवित्र महीने में जंग छिड़ सकती है?
Iran US War: अमेरिका-ईरान जिनेवा बातचीत क्यों फेल हुई?
जिनेवा बातचीत का मकसद न्यूक्लियर प्रोग्राम, बैन और रीजनल सिक्योरिटी पर समझौता करना था। हालांकि, सूत्रों के मुताबिक, दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी सबसे बड़ी रुकावट बनी रही।
- US चाहता है कि ईरान अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम की सख्त मॉनिटरिंग को मान ले।
- ईरान की मांग है कि उस पर लगे इकोनॉमिक बैन तुरंत हटाए जाएं।
इन शर्तों के बीच कोई बीच का रास्ता नहीं निकल पाया। नतीजा – तनाव और बढ़ गया।
Iran US War: क्या US और इजराइल मिलकर हमला करेंगे?
रिपोर्ट्स का दावा है कि अगर डिप्लोमैटिक रास्ते बंद होते हैं, तो इजराइल और US मिलकर मिलिट्री एक्शन लेने पर विचार कर सकते हैं। इजराइल ने पहले भी ईरान की न्यूक्लियर फैसिलिटीज पर कड़ा रुख अपनाया है।
एनालिस्ट्स का मानना है कि इजराइल को डर है कि ईरान की न्यूक्लियर कैपेबिलिटीज उसके वजूद के लिए खतरा बन सकती हैं। इसलिए, अगर US हरी झंडी देता है, तो मिलकर हमला करने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
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Iran US War: रमजान के दौरान जंग – क्या यह मुमकिन है?
रमज़ान इस्लामिक कैलेंडर का सबसे पवित्र महीना है। इस दौरान आम तौर पर शांति और संयम की अपील की जाती है। हालांकि, इतिहास बताता है कि धार्मिक महीनों में भी जंग हुई हैं।
ईरान के अंदर भी इस मुद्दे पर अलग-अलग राय है –
- एक ग्रुप का मानना है कि रमजान के दौरान जंग छेड़ना धार्मिक भावनाओं के खिलाफ होगा।
- दूसरे का मानना है कि अगर देश की सुरक्षा को खतरा होता है तो बदला लेना जरूरी है।
अगर हालात बिगड़ते हैं, तो रमजान के दौरान थोड़ी मिलिट्री कार्रवाई से लेकर पूरी जंग तक कुछ भी मुमकिन है।
Iran US War: क्या जंग 6 हफ्ते तक चल सकती है?
मिलिट्री एक्सपर्ट्स के मुताबिक, संभावित लड़ाई चार से छह हफ़्ते तक चल सकती है। इसके कारण ये हैं कि, मिडिल ईस्ट में पहले से ही भारी मिलिट्री डिप्लॉयमेंट चल रहा है। गल्फ रीजन में US वॉरशिप्स की मौजूदगी। ईरान का मिसाइल और ड्रोन नेटवर्क रीजनल साथियों का शामिल होना मुमकिन है। अगर जंग छिड़ती है, तो यह सिर्फ दो देशों तक ही सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरे रीजन को अपनी चपेट में ले सकती है।
Iran US War: मिडिल ईस्ट में मिलिट्री डिप्लॉयमेंट कितनी बढ़ी है?
हाल के हफ्तों में गल्फ रीजन में US नेवी की एक्टिविटी तेज हो गई है। एयरक्राफ्ट कैरियर, फाइटर जेट और मिसाइल डिफेंस सिस्टम एक्टिव ऑपरेशन में हैं।
दूसरी तरफ, ईरान ने भी अपने रिवोल्यूशनरी गार्ड्स और मिसाइल यूनिट्स को हाई अलर्ट पर रखा है। इससे पता चलता है कि दोनों पक्ष किसी भी हालात के लिए तैयार हैं।
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Iran US War: ऑयल मार्केट और ग्लोबल इकॉनमी पर असर
अगर युद्ध छिड़ता है, तो इसका सीधा असर ऑयल की कीमतों पर पड़ेगा। मिडिल ईस्ट दुनिया का सबसे बड़ा ऑयल प्रोड्यूस करने वाला इलाका है।
- ऑयल की कीमतें अचानक बढ़ सकती हैं।
- ग्लोबल स्टॉक मार्केट में गिरावट आ सकती है।
- इंडिया जैसे इंपोर्ट करने वाले देशों पर इकॉनमिक प्रेशर बढ़ेगा।
इसलिए, यह सिर्फ एक रीजनल मुद्दा नहीं है, बल्कि ग्लोबल चिंता का विषय है।
Iran US War: क्या डिप्लोमेसी अभी भी जिंदा है?
हालांकि हालात अभी भी टेंशन भरे हैं, लेकिन खबर है कि बैक-चैनल डिप्लोमेसी अभी भी चल रही है। कई यूरोपियन देश बीच-बचाव करने की कोशिश कर रहे हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि आखिरी समय में समझौता हो सकता है, क्योंकि खुली जंग किसी के भी फायदे में नहीं होगी।
Iran US War: क्या यह तीसरे वर्ल्ड वॉर की शुरुआत हो सकती है?
सोशल मीडिया पर कई दावे किए जा रहे हैं कि यह लड़ाई एक बड़े ग्लोबल युद्ध में बदल सकती है। हालांकि, एक्सपर्ट्स इस खतरे को बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया मानते हैं। इस समय हालात निश्चित रूप से गंभीर हैं, लेकिन ग्लोबल ताकतें इसे कंट्रोल करने की कोशिश करेंगी।
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