Iran Israel Conflict: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच ईरान ने पड़ोसी देशों से माफी मांगने के बावजूद खाड़ी क्षेत्र की दिशा में हमले जारी रखे हैं। इजराइल के साथ चल रहे टकराव के आठवें दिन भी ईरान की ओर से ड्रोन और मिसाइल दागे जाने की खबरें सामने आई हैं। क्षेत्र के कई देशों ने दावा किया है कि उनकी एयर डिफेंस प्रणाली ने इन हमलों को हवा में ही नष्ट कर दिया।
रिपोर्ट्स के मुताबिक सऊदी अरब, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात की सुरक्षा एजेंसियों ने कई संदिग्ध मिसाइलों और ड्रोन को अपने हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले ही रोक दिया। इन घटनाओं के बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत कर दिया गया है।
माफी के बाद भी नहीं रुके हमले
कुछ दिन पहले ही ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने पड़ोसी देशों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगी थी। उन्होंने कहा था कि ईरान का इरादा खाड़ी देशों को निशाना बनाने का नहीं है, बल्कि उसका मुख्य लक्ष्य वे ठिकाने हैं जहां से अमेरिका या उसके सहयोगी ईरान के खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं।
सरकारी टीवी पर प्रसारित एक बयान में पेजेशकियान ने कहा था कि ईरान अपने पड़ोसी देशों के साथ संबंध खराब नहीं करना चाहता। उन्होंने यह भी कहा कि अंतरिम नेतृत्व परिषद ने इस बात पर सहमति जताई है कि जब तक किसी पड़ोसी देश की जमीन या हवाई क्षेत्र से ईरान पर हमला नहीं होता, तब तक उन देशों पर मिसाइल नहीं दागी जाएगी।
हालांकि इसके बावजूद क्षेत्र में Iran Israel Conflict कम होता नजर नहीं आया। शनिवार रात इजराइल ने ईरान के कई ठिकानों पर नए हमले किए। इनमें तेहरान के पास स्थित एक बड़े तेल डिपो को निशाना बनाया गया, जिसे हाल के दिनों का सबसे बड़ा हमला बताया जा रहा है।
Iran Israel Conflict के बाद बढ़ा तनाव
इजराइल की कार्रवाई के बाद ईरान ने भी जवाबी कदम तेज कर दिए। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड से जुड़े अधिकारियों ने दावा किया कि उन्होंने इजराइल की ऊर्जा सुविधाओं को निशाना बनाया है। विशेष रूप से हाइफा की तेल रिफाइनरी पर हमले का जिक्र किया गया।
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विश्लेषकों का मानना है कि ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाना इस Iran Israel Conflict को और खतरनाक दिशा में ले जा सकता है। मिडिल ईस्ट का तेल बाजार पहले ही अस्थिर स्थिति में है और इस तरह के हमलों से वैश्विक बाजारों पर भी असर पड़ सकता है।
ट्रंप ने लिया कूटनीतिक जीत का श्रेय
इस बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के माफी वाले बयान को अपनी कूटनीति की सफलता बताया है। सोशल मीडिया पर लिखे एक संदेश में उन्होंने कहा कि लगातार दबाव और सैन्य कार्रवाई की वजह से ईरान को झुकना पड़ा है।
ट्रंप ने दावा किया कि ईरान इस समय गंभीर दबाव में है और उसे अपने पड़ोसी देशों से माफी मांगनी पड़ी है। उन्होंने यह भी कहा कि मिडिल ईस्ट के कई देशों ने अमेरिका की भूमिका की सराहना की है।
हालांकि अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ ट्रंप के इन दावों को राजनीतिक बयानबाजी मानते हैं। उनका कहना है कि मौजूदा स्थिति बेहद जटिल है और इसे किसी एक देश की जीत या हार के रूप में देखना जल्दबाजी होगी।
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क्षेत्र में बढ़ती चिंता
Iran Israel Conflict अब पूरे मिडिल ईस्ट के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। खाड़ी देशों को डर है कि अगर यह संघर्ष और बढ़ा तो उनका इलाका भी सीधे तौर पर इसकी चपेट में आ सकता है।
इसी वजह से कई देशों ने अपने एयर डिफेंस सिस्टम को हाई अलर्ट पर रखा है और संवेदनशील इलाकों की निगरानी बढ़ा दी है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील कर रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर जल्द ही कूटनीतिक प्रयासों के जरिए तनाव कम नहीं किया गया, तो यह Iran Israel Conflict पूरे क्षेत्र की स्थिरता को प्रभावित कर सकता है। फिलहाल मिडिल ईस्ट की स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है और आने वाले दिनों में Iran Israel Conflict किस दिशा में जाएगा, इस पर दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।
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