Netanyahu Brainwash Trump: मिडिल ईस्ट की आग अब एक ऐसे मोड़ पर आ गई है जहां दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका के भीतर ही सवाल उठने लगे हैं। क्या राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमला अपनी मर्जी से किया या वे इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बिछाए गए कूटनीतिक जाल में फंस गए? एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है जिसमें दावा किया जा रहा है कि नेतन्याहू ने ट्रंप का ‘ब्रेनवॉश’ किया और उन्हें इस युद्ध के लिए उकसाया। जहां ट्रंप इसे अमेरिका की सुरक्षा के लिए जरूरी बता रहे हैं, वहीं अमेरिकी खुफिया एजेंसियां और अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएं ट्रंप के दावों को सिरे से खारिज कर रही हैं।
युद्ध के चौथे दिन अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के एक बयान ने इस आग में घी डालने का काम किया है। रुबियो ने स्वीकार किया कि अमेरिका इस जंग में इसलिए कूदा क्योंकि इजरायल पहले ही हमले का मन बना चुका था और अमेरिका को डर था कि इसका बदला लेने के लिए ईरान खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाएगा। यानी, अमेरिका के पास इस युद्ध में कूदने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था। अब अमेरिका में विपक्षी सांसद और एक्सपर्ट्स यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या इजरायल के खतरे को अमेरिका का खतरा मान लेना व्हाइट हाउस की सबसे बड़ी ऐतिहासिक भूल है? (Netanyahu Brainwash Trump)
‘इजरायल की वजह से युद्ध में कूदा अमेरिका’
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने साफ किया कि अमेरिका ने ईरान पर ‘प्री-एम्प्टिव स्ट्राइक’ (पहले हमला) सिर्फ इसलिए की क्योंकि इजरायल की आक्रामकता की वजह से अमेरिकी सैनिकों पर खतरा मंडरा रहा था। उन्होंने कहा, ‘यूएस इस जंग में इसलिए गया क्योंकि इजरायल पहले ही हमला करने का तय कर चुका था। इसका बदला लेने के लिए ईरान उस क्षेत्र में अमेरिका के ठिकानों पर हमला कर सकता था।’ इस खुलासे के बाद अमेरिकी संसद में हंगामा मच गया है। सांसद मार्क वॉर्नर ने कड़े शब्दों में कहा, ‘ईरान की ओर से अमेरिका पर कोई सीधा खतरा नहीं था। खतरा सिर्फ इजरायल को था। हम एक गलत रास्ते पर जा रहे हैं।’ (Netanyahu Brainwash Trump)

रॉकस्टार इज बैक! ‘लव एंड वॉर’ के लिए रणबीर कपूर ने बदला लुक, क्लीन सेव देख फैंस हुए क्रेजी
नेतन्याहू की ‘रिजीम चेंज’ वाली रणनीति और ट्रंप का ब्रेनवॉश
विशेषज्ञों का मानना है कि नेतन्याहू ने सालों से ट्रंप के दिमाग में यह बात भरी कि ईरान का अस्तित्व अमेरिका के लिए सबसे बड़ा खतरा है। नेतन्याहू ने ही परमाणु वार्ता को बार-बार बाधित किया और ट्रंप को यकीन दिलाया कि अगर वे खामेनेई का खात्मा कर देते हैं, तो उनका नाम इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो जाएगा। नेतन्याहू ने ट्रंप को उकसाते हुए कहा, ’47 सालों से ईरान ‘अमेरिका मुर्दाबाद’ के नारे लगा रहा है। उन्होंने अमेरिकी दूतावासों पर बमबारी की और दो बार राष्ट्रपति ट्रंप की हत्या की कोशिश की।’ (Netanyahu Brainwash Trump)
Dhurandhar 2 Runtime: क्या 4 घंटे लंबी होगी रणवीर सिंह की फिल्म? सेंसर बोर्ड से आया बड़ा अपडेट!
कहां है सच्चाई?
डोनाल्ड ट्रंप लगातार दावा कर रहे हैं कि ईरान परमाणु बम बनाने के बेहद करीब था और अमेरिका पर मिसाइल दागने वाला था, लेकिन आंकड़े कुछ और ही कहानी बयां करते हैं-
| मुद्दा | ट्रंप का दावा | इंटेलिजेंस/IAEA रिपोर्ट |
| लॉन्ग-रेंज मिसाइल | ईरान जल्द अमेरिका तक पहुंचने वाली मिसाइल बना लेगा। | DIA 2025 रिपोर्ट: ईरान 2035 से पहले ऐसी मिसाइल नहीं बना सकता। |
| परमाणु कार्यक्रम | ईरान कुछ ही दिनों में बम बना सकता था। | IAEA रिपोर्ट: 2015 की डील के बाद ईरान ने हथियार विकास रोक दिया था। |
| पहला हमला | अगर हम नहीं करते, तो ईरान हमला कर देता। | पेंटागन: तेहरान अमेरिका पर पहले हमला करने की योजना नहीं बना रहा था। |
‘इतिहास रचने’ का प्रलोभन
रिपोर्ट्स के मुताबिक, नेतन्याहू ने ट्रंप के ‘ईगो’ को निशाना बनाया। उन्होंने ट्रंप को विश्वास दिलाया कि वे ईरान पर हमला करने वाले और वहां की सत्ता बदलने वाले अमेरिका के पहले राष्ट्रपति बन सकते हैं। ट्रंप ने भी आत्मविश्वास के साथ कहा कि भले ही 4-5 सप्ताह का अनुमान था, लेकिन अमेरिका के पास युद्ध को लंबी अवधि तक खींचने की पूरी क्षमता है। हालांकि, अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह युद्ध अमेरिकी हितों के लिए है या सिर्फ नेतन्याहू की क्षेत्रीय वर्चस्व की लड़ाई को अमेरिका के कंधों पर लाद दिया गया है। (Netanyahu Brainwash Trump)



