Iran Queen Soray: दुनिया के शाही इतिहास में कुछ प्रेम कहानियां ऐसी होती हैं जो महलों की चकाचौंध से शुरू तो होती हैं, लेकिन उनका अंत किसी गहरी त्रासदी में जाकर होता है। ईरान की पूर्व महारानी सुरैया एस्फंदियारी बख्तियारी (Soraya Esfandiary-Bakhtiary) की दास्तां भी कुछ ऐसी ही है। अपनी अद्भुत खूबसूरती और नीली-हरी गहरी आंखों की वजह से उन्हें दुनिया ‘सैड-आइड प्रिंसेस’ यानी ‘उदास आंखों वाली राजकुमारी’ के नाम से जानती है। एक ऐसी रानी, जिसने ईरान के शाह मोहम्मद रज़ा पहलवी के दिल पर राज किया, लेकिन किस्मत की लकीरों ने उनसे न सिर्फ उनका ताज छीन लिया, बल्कि उन्हें ताउम्र अकेलेपन की आग में जलने के लिए छोड़ दिया।
सुरैया की कहानी किसी परीकथा जैसी लगती है, जिसमें एक प्रभावशाली कुलीन परिवार की लड़की रातों-रात साम्राज्य की मलिका बन जाती है। लेकिन इस परीकथा का अंत बेहद दर्दनाक रहा। सत्ता की मजबूरियों और वारिस न दे पाने के ‘कलंक’ ने उस मोहब्बत का गला घोंट दिया, जिसे कभी मिसाल माना जाता था। शाही वैभव की ऊंचाइयों को छूने वाली सुरैया की मौत पेरिस के एक गुमनाम अपार्टमेंट में बेहद खामोशी और अकेलेपन के बीच हुई, जिसने दुनिया को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या वाकई ताज और तख्त ही सब कुछ होते हैं? (Iran Queen Soray)
तस्वीर देख दिल हार बैठे थे शाह
सुरैया का जन्म एक प्रतिष्ठित ईरानी राजनयिक खलील एस्फंदियारी और एक जर्मन मां के घर हुआ था। उनकी शिक्षा यूरोप के बेहतरीन स्कूलों में हुई, जिससे उनके व्यक्तित्व में आधुनिकता और कुलीनता का अनूठा संगम था। साल 1948 में, जब शाह मोहम्मद रज़ा पहलवी अपनी पहली पत्नी से अलग हो चुके थे, तब उनकी मां की नजर सुरैया की एक तस्वीर पर पड़ी। शाह को पहली नजर में ही सुरैया से मोहब्बत हो गई। महज एक मुलाकात के बाद ही शाह ने शादी का प्रस्ताव रख दिया और साल 1951 में एक बेहद भव्य समारोह में दोनों निकाह के बंधन में बंध गए। (Iran Queen Soray)
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बांझपन का दंश: जब प्यार पर भारी पड़ी सत्ता की मजबूरी
शादी के बाद कुछ सालों तक सब कुछ किसी सपने जैसा रहा, लेकिन जल्द ही शाही गलियारों में वारिस को लेकर कानाफूसी शुरू हो गई। रानी सुरैया चाहकर भी शाह को उत्तराधिकारी नहीं दे पा रही थीं। चिकित्सा विशेषज्ञों से सलाह और लंबी कोशिशों के बाद भी जब संतान का सुख नहीं मिला, तो ईरान की राजनीति में हलचल मच गई। शाह को सलाह दी गई कि वे उत्तराधिकारी के लिए दूसरी शादी कर लें या सुरैया को छोड़ दें। शाह सुरैया से बेपनाह प्यार करते थे, लेकिन शाही परंपरा और सत्ता के दबाव के आगे उन्हें घुटने टेकने पड़े। (Iran Queen Soray)

एक तलाक जिसने बदल दी जिंदगी
1958 में शाह ने भारी मन से सुरैया से अलग होने का फैसला किया। यह सिर्फ एक तलाक नहीं था, बल्कि एक औरत के अस्तित्व और उसकी मोहब्बत की हार थी। सुरैया को ईरान छोड़ना पड़ा और उन्हें ‘प्रिंसेस’ का खिताब देकर यूरोप भेज दिया गया। शाह से अलग होने के बाद सुरैया ने खुद को व्यस्त रखने के लिए फिल्मों में भी हाथ आजमाया, लेकिन वहां उन्हें वो सुकून और सफलता नहीं मिली जिसकी वे तलाश कर रही थीं। उनकी आंखों की उदासी समय के साथ और गहरी होती चली गई। (Iran Queen Soray)
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अकेलेपन में चुपके से आई मौत
सुरैया का आखिरी समय पेरिस के एक आलीशान लेकिन शांत अपार्टमेंट में बीता। एक समय जिस रानी के इशारों पर हजारों नौकर हाजिर रहते थे, वह अपने आखिरी दिनों में पूरी तरह तन्हा थीं। अक्टूबर 2001 में, 69 वर्ष की आयु में उनकी मृत्यु हो गई। उनकी मौत के कई दिनों बाद दुनिया को पता चला कि ‘उदास आंखों वाली राजकुमारी’ अब इस दुनिया में नहीं रही। विशेषज्ञों का कहना है, ‘उनका जीवन विलासिता से भरा था, लेकिन अंत में अकेलेपन ने उन्हें घेर लिया। एक ऐसी महिला जिसने शाही वैभव देखा, लेकिन अंत में तन्हाई का सामना किया।’ (Iran Queen Soray)



