Iran Israel War: पश्चिम एशिया में हालात तेजी से बिगड़ते जा रहे हैं। ईरान पर US और इजराइल के संयुक्त सैन्य अभियान के बीच राजधानी तेहरान एक बार फिर हमलों की जद में आ गई है। इजराइल ने दावा किया है कि उसने तेहरान में नए चरण की कार्रवाई शुरू की है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पश्चिमी तेहरान में कई जोरदार धमाके सुने गए, जिसके बाद आसमान में काले धुएं के गुबार उठते दिखाई दिए। बताया जा रहा है कि जिन इलाकों को निशाना बनाया गया, वे घनी आबादी वाले क्षेत्र हैं।
अस्पताल और सरकारी ठिकानों पर हमले का दावा
रिपोर्टों के मुताबिक, रविवार देर रात तेहरान के गांधी हॉस्पिटल, एक पुलिस भवन और राष्ट्रीय रेडियो-टेलीविजन मुख्यालय को निशाना बनाया गया। इन हमलों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है, लेकिन स्थानीय मीडिया में अफरातफरी और बड़े पैमाने पर नुकसान की खबरें सामने आ रही हैं। ईरान की ओर से भी जवाबी कार्रवाई तेज कर दी गई है, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।
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अमेरिकी चेतावनी, लक्ष्य पूरे होने तक कार्रवाई जारी
कुवैत में ईरानी मिसाइल हमले में तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने कहा है कि जब तक वॉशिंगटन के घोषित सैन्य लक्ष्य पूरे नहीं हो जाते, तब तक कार्रवाई जारी रहेगी। ट्रंप ने मारे गए सैनिकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताते हुए कहा कि इस हमले का उचित जवाब दिया जाएगा।
US सेना ने बयान जारी कर बताया कि उसने ईरान के भीतर 1,000 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाया है। यह अभियान 28 फरवरी को इजराइल के साथ संयुक्त हमले के बाद और तेज हुआ। उस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei और कई वरिष्ठ अधिकारियों के मारे जाने का दावा किया गया था। हालांकि ईरान ने इन दावों पर अलग प्रतिक्रिया दी है।
Iran Israel War, इजराइल पर ईरान के जवाबी हमले
Iran ने भी Israel के खिलाफ मिसाइल और ड्रोन हमलों की झड़ी लगा दी है। तेल अवीव और हाइफा जैसे बड़े शहरों के अलावा मध्य इजराइल के बेत शेमेश शहर में भी हमले की खबर है, जहां नौ लोगों के मारे जाने की सूचना है। इजराइली प्रशासन ने कई इलाकों में अलर्ट जारी कर नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है।
इसके साथ ही खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाए जाने की खबरें हैं। रविवार रात कतर, बहरीन, जॉर्डन, ओमान, कुवैत, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात में धमाकों की आवाजें सुनी गईं। इन घटनाओं ने पूरे मिडिल ईस्ट को अस्थिरता के नए दौर में धकेल दिया है।
यूरोपीय देशों का US के समर्थन में बयान
ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने संयुक्त बयान जारी कर ईरान के हमलों पर चिंता जताई है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री Keir Starmer, फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron और जर्मनी के चांसलर Friedrich Merz ने कहा कि वे अपने सैनिकों और नागरिकों की सुरक्षा के लिए अमेरिका और सहयोगी देशों के साथ मिलकर काम करेंगे।
संयुक्त बयान में कहा गया कि ईरान के लापरवाह और आक्रामक हमलों ने क्षेत्रीय स्थिरता को गंभीर खतरे में डाल दिया है। तीनों देशों ने यह भी संकेत दिया कि वे जरूरत पड़ने पर मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं को निष्क्रिय करने के लिए रक्षात्मक कदम उठा सकते हैं।
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सात देशों ने की कड़ी निंदा
अमेरिका, बहरीन, जॉर्डन, कुवैत, कतर, सऊदी अरब और UAE ने भी एक साझा बयान में ईरान के हमलों की निंदा की है। इन देशों ने कहा कि मिसाइल और ड्रोन हमलों से आम नागरिकों और बुनियादी ढांचे को खतरा पैदा हुआ है। बयान में इसे संघर्ष की खतरनाक बढ़ोतरी करार दिया गया।
सभी देशों ने अपने नागरिकों और क्षेत्रीय हितों की रक्षा के अधिकार को दोहराया और कहा कि वे सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करेंगे।
क्षेत्रीय अस्थिरता की आशंका
विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह टकराव जल्द नहीं थमा तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर व्यापक रूप से पड़ेगा। खाड़ी क्षेत्र पहले से ही रणनीतिक रूप से संवेदनशील रहा है, और मौजूदा हालात ने इसे और जटिल बना दिया है।
फिलहाल पश्चिम एशिया में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। दुनिया की नजर अब इस पर टिकी है कि क्या कूटनीतिक प्रयास इस बढ़ते Iran Israel War को रोक पाएंगे या यह टकराव और व्यापक रूप लेगा।
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