CBSE Board 2026 Changes: साल 2026 से बोर्ड परीक्षाओं को लेकर तस्वीर और साफ हो गई है। Central Board of Secondary Education (CBSE) ने 10वीं और 12वीं कक्षाओं के लिए इंप्रूवमेंट और सप्लीमेंट्री परीक्षा से जुड़े नियम स्पष्ट कर दिए हैं। जहां 10वीं में दो बोर्ड परीक्षा की नीति पहले की तरह लागू रहेगी, वहीं 12वीं के छात्रों को सुधार के मामले में सीमित विकल्प मिलेगा। इस फैसले का सीधा असर लाखों छात्रों पर पड़ेगा, जो बेहतर स्कोर के लिए दूसरा मौका (CBSE Board 2026 Changes) तलाशते हैं।
12वीं में सिर्फ एक विषय में मिलेगा सुधार का मौका
CBSE के परीक्षा नियंत्रक Sanyam Bhardwaj ने जानकारी दी है कि 2026 से 12वीं पास छात्र सप्लीमेंट्री परीक्षा में केवल एक विषय में ही सुधार (Improvement) कर सकेंगे। अगर कोई छात्र एक से अधिक विषयों में अपने अंक सुधारना चाहता है, तो उसे अगले साल फरवरी में होने वाली मुख्य बोर्ड परीक्षा (CBSE Board 2026 Changes) में दोबारा शामिल होना होगा। यानी जुलाई में होने वाली सप्लीमेंट्री परीक्षा मल्टीपल सब्जेक्ट इंप्रूवमेंट के लिए उपलब्ध नहीं होगी। बोर्ड के अनुसार 12वीं की इंप्रूवमेंट परीक्षा 15 जुलाई 2026 को प्रस्तावित है। मुख्य परीक्षा का परिणाम जारी होने के बाद छात्र सप्लीमेंट्री या कंपार्टमेंट परीक्षा के लिए आवेदन कर सकेंगे।
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12वीं के लिए दो परीक्षा नीति लागू नहीं
बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि साल में दो बार परीक्षा की व्यवस्था केवल 10वीं कक्षा के लिए है। 12वीं के छात्रों पर यह नीति लागू नहीं होगी। यानी 12वीं के विद्यार्थियों को पहले की तरह मुख्य परीक्षा और सप्लीमेंट्री परीक्षा के ढांचे में ही रहना होगा।
10वीं में कैसे मिलेगा इंप्रूवमेंट का मौका?
10वीं के छात्रों के लिए दूसरी बोर्ड परीक्षा ही इंप्रूवमेंट परीक्षा (CBSE Board 2026 Changes) मानी जाएगी। मुख्य परीक्षा समाप्त होने के बाद लगभग 10 दिनों के लिए एक आवेदन विंडो खोली जाएगी। इस दौरान छात्र संभावित प्रदर्शन के आधार पर दूसरी परीक्षा के लिए आवेदन कर सकते हैं। पहले परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद एक और अवसर मिलेगा, जहां छात्र अपने वास्तविक अंक देखकर निर्णय ले सकेंगे कि उन्हें दूसरी परीक्षा देनी है या नहीं। ध्यान देने वाली बात यह है कि दूसरी परीक्षा में बैठने के लिए निर्धारित शुल्क जमा करना अनिवार्य होगा। केवल फीस जमा करने वाले छात्रों को ही परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जाएगी।
मार्कशीट और प्रतिशत पर क्या कहा बोर्ड ने?
CBSE ने प्राइवेट कैंडिडेट्स के दो विषयों में परीक्षा देने के मामले में भी स्थिति स्पष्ट की है। बोर्ड ने कहा है कि मार्कशीट में केवल विषयवार अंक दर्ज किए जाते हैं। CBSE स्वयं प्रतिशत की गणना नहीं करता। प्रतिशत निकालने की प्रक्रिया संबंधित विश्वविद्यालय, उच्च शिक्षण संस्थान या नौकरी देने वाले संगठनों के नियमों पर निर्भर करती है। हर संस्थान अपनी पात्रता शर्तों (Eligibility Criteria) के अनुसार प्रतिशत तय करता है।
छात्रों के लिए क्या है रणनीति?
- इन नए नियमों के बाद छात्रों को अपनी तैयारी को लेकर अधिक सजग रहना होगा।
- 12वीं के छात्र एक ही विषय में सुधार का अवसर पाएंगे, इसलिए मुख्य परीक्षा को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है।
- 10वीं के छात्रों को दो परीक्षा का मौका जरूर मिलेगा, लेकिन इसे बैकअप प्लान मानना सही नहीं होगा।
- फीस, आवेदन विंडो और समयसीमा का विशेष ध्यान रखना जरूरी है।
- बोर्ड का यह कदम परीक्षा प्रक्रिया को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने की दिशा में उठाया गया है।
CBSE ने 2026 से लागू होने वाले बोर्ड परीक्षा नियमों को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी है। 12वीं में केवल एक विषय में सुधार की अनुमति और 10वीं में दो परीक्षा की व्यवस्था दोनों के नियम अलग-अलग हैं। छात्रों और अभिभावकों के लिए जरूरी है कि वे इन बदलावों को समझें और उसी के अनुसार तैयारी की रणनीति बनाएं। सही जानकारी ही बेहतर परिणाम की कुंजी है।
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