CBSE 10th Two Exams: नई शिक्षा नीति के तहत स्कूल शिक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में Central Board of Secondary Education (CBSE) ने 10वीं बोर्ड परीक्षा को लेकर अहम निर्णय लिया है। अब 10वीं की बोर्ड परीक्षा साल में दो बार (CBSE 10th Two Exams) आयोजित की जाएगी। यह कदम National Education Policy 2020 (NEP 2020) के तहत उठाया गया है, जिसका उद्देश्य छात्रों को बेहतर अवसर देना और परीक्षा के दबाव को कम करना है। हालांकि, इस नई व्यवस्था को लेकर कई छात्रों और अभिभावकों में भ्रम की स्थिति भी है।
कब होंगी दोनों परीक्षाएं?
CBSE द्वारा जारी डेटशीट के अनुसार-
- पहला सेशन – 17 फरवरी से 09 मार्च 2026
- दूसरा सेशन – 15 मई से 01 जून 2026
दोनों सेशन का सिलेबस एक ही रहेगा। यानी जो पाठ्यक्रम पहले सेशन में लागू होगा, वही दूसरे में भी रहेगा।
सबसे जरूरी बात – पहला सेशन देना अनिवार्य
छात्रों के लिए सबसे अहम जानकारी यह है कि फरवरी-मार्च में होने वाला पहला सेशन अनिवार्य होगा। यदि कोई छात्र यह सोच रहा है कि वह सीधे मई-जून वाले सेशन में शामिल होगा, तो यह बड़ी गलती हो सकती है। बोर्ड ने साफ कर दिया है कि पहले सेशन में शामिल हुए बिना दूसरे सेशन में बैठने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यानी दूसरा सेशन केवल सुधार (Improvement) का अवसर है, न कि पहला विकल्प।
दूसरा सेशन – बैकअप नहीं, सुधार का मौका
दो बार परीक्षा की व्यवस्था को लेकर कई छात्र इसे ‘बैकअप प्लान’ समझ रहे हैं। लेकिन बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि पहली परीक्षा को ही मुख्य प्रयास माना जाएगा। दूसरा सेशन केवल उन छात्रों के लिए है जो अपने अंकों में सुधार करना चाहते हैं। अगर कोई छात्र पहले प्रयास में संतुष्ट है, तो वह दूसरे सेशन में शामिल न होने का विकल्प चुन सकता है। अभिभावकों को भी सलाह दी गई है कि यदि बच्चा पहले प्रयास में अच्छा प्रदर्शन करता है तो उस पर दोबारा परीक्षा (CBSE 10th Two Exams) देने का अनावश्यक दबाव न डालें।
कौन-से अंक होंगे फाइनल?
छात्रों के मन में यह सवाल भी है कि अगर पहले सेशन में ज्यादा और दूसरे में कम अंक आते हैं, तो कौन-से अंक मान्य होंगे? इसका सीधा जवाब है जिस सेशन में बेहतर अंक आएंगे, वही फाइनल माने जाएंगे। चाहे छात्र ने पहले प्रयास में बेहतर स्कोर किया हो या दूसरे में, बोर्ड उच्चतम अंक को अंतिम परिणाम में शामिल करेगा।
कितने विषयों में मिलेगा सुधार का मौका?
यहां एक महत्वपूर्ण शर्त भी है। बोर्ड केवल तीन विषयों में सुधार के लिए दूसरा अवसर देगा। यदि कोई छात्र दो से अधिक विषयों में फेल होता है, तो उसे फेल घोषित कर दिया जाएगा। ऐसे छात्र दूसरे सेशन में शामिल नहीं हो सकेंगे। उन्हें दोबारा पूरे सत्र की पढ़ाई कर 2027 की मुख्य बोर्ड परीक्षा में बैठना होगा। हालांकि, एक या दो विषय में असफल छात्र पहले की तरह कंपार्टमेंट परीक्षा (CBSE 10th Two Exams) देकर पास हो सकते हैं।
क्या बदलेगा छात्रों के लिए?
यह नई व्यवस्था छात्रों को मानसिक रूप से अधिक संतुलन देने की कोशिश है। पहले एक ही परीक्षा में सब कुछ दांव पर होता था। अब छात्रों को स्कोर सुधारने का अवसर मिलेगा। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इसे हल्के में लेना नुकसानदेह हो सकता है। यदि छात्र पहले सेशन को गंभीरता से नहीं लेते, तो साल बर्बाद होने की आशंका भी है। इसलिए रणनीति यही होनी चाहिए कि पहला प्रयास ही अंतिम समझकर पूरी तैयारी की जाए और दूसरे प्रयास को केवल सुधार का अवसर माना जाए।
CBSE का यह कदम शिक्षा प्रणाली में लचीलापन लाने की दिशा में बड़ा बदलाव है। लेकिन छात्रों और अभिभावकों को इसके नियमों को भली-भांति समझना होगा। पहला सेशन अनिवार्य है, दूसरा वैकल्पिक। बेहतर अंक ही अंतिम माने जाएंगे, लेकिन सीमित विषयों में ही सुधार का मौका मिलेगा। समझदारी इसी में है कि छात्र पहले प्रयास में ही बेहतरीन प्रदर्शन करने का लक्ष्य रखें।
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