Gurugram Metro Project: हरियाणा के तेजी से विकसित होते शहर Gurugram में प्रस्तावित Gurugram Metro Project एक बार फिर चर्चा में है। सेक्टर-56 से पचगांव तक बनने वाली इस महत्वाकांक्षी मेट्रो लाइन को शहर की ट्रैफिक समस्या का बड़ा समाधान माना जा रहा था, लेकिन अब जमीन के मुआवजे को लेकर विवाद ने इस परियोजना की रफ्तार पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
करीब 10,428 करोड़ रुपये की लागत वाले इस Gurugram Metro Project में हरियाणा सरकार 90% खर्च उठाएगी, जबकि केंद्र सरकार केवल 10% का योगदान देगी। ऐसे में यदि जमीन अधिग्रहण की लागत बढ़ती है, तो इसका सीधा असर राज्य के बजट पर पड़ेगा।
जमीन मुआवजे पर टकराए दो बड़े विभाग
इस पूरे विवाद की जड़ जमीन के मुआवजे को लेकर है। Haryana State Industrial and Infrastructure Development Corporation (HSIIDC) ने मेट्रो स्टेशनों और संबंधित ढांचे के लिए अधिग्रहित की जाने वाली जमीन के बदले भारी मुआवजे की मांग की है।
वहीं, Department of Town and Country Planning Haryana (DTCP) ने इसका विरोध करते हुए कहा है कि इस तरह की जनहित परियोजनाओं के लिए सरकारी जमीन निशुल्क उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
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DTCP ने अपने तर्क में Delhi Metro Rail Corporation का उदाहरण देते हुए कहा कि दिल्ली में मेट्रो प्रोजेक्ट्स के लिए जमीन मुफ्त दी गई थी, जिससे परियोजना की लागत नियंत्रित रही।
क्या है Gurugram Metro Project का पूरा प्लान?
प्रस्तावित Gurugram Metro Project लगभग 36 किलोमीटर लंबा होगा और इसमें कुल 28 मेट्रो स्टेशन बनाए जाने की योजना है। यह रूट Sector 56 Metro Station Gurugram से शुरू होकर गोल्फ कोर्स एक्सटेंशन रोड और SPR (Southern Peripheral Road) के जरिए पचगांव तक जाएगा।
इस मार्ग में सेक्टर-61, 62, 66, वाटिका चौक, सेक्टर-70, खेड़की दौला, सेक्टर-88, 90, 91 और कई अन्य प्रमुख इलाकों को जोड़ा जाएगा। इस Gurugram Metro Project को शहर के उभरते रियल एस्टेट हब और कॉर्पोरेट ज़ोन को जोड़ने वाला एक अहम इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट माना जा रहा है।
2024 में हो चुका है सर्वे, फिर क्यों अटका प्रोजेक्ट?
इस प्रोजेक्ट के लिए साल 2024 में सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभाव का अध्ययन पूरा किया जा चुका है। इसके बावजूद, जमीन के मुआवजे को लेकर पैदा हुआ गतिरोध अब बड़ी बाधा बन गया है।
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विशेषज्ञों का मानना है that अगर इस स्तर पर विवाद लंबा खिंचता है, तो Gurugram Metro Project की शुरुआत में काफी देरी हो सकती है।
इससे न सिर्फ लागत बढ़ेगी, बल्कि शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास पर भी असर पड़ेगा।
मुख्य सचिव के पास पहुंचा मामला
दोनों विभागों के बीच बढ़ते मतभेद को देखते हुए अब यह मामला हरियाणा के मुख्य सचिव के पास पहुंचा है। उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही इस पर कोई अंतिम फैसला लिया जाएगा।
अगर HSIIDC की मुआवजे की मांग मान ली जाती है, तो Gurugram Metro Project की लागत में भारी इजाफा हो सकता है। वहीं, अगर जमीन मुफ्त देने का फैसला होता है, तो यह परियोजना तेजी से आगे बढ़ सकती है।
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शहर के विकास के लिए क्यों अहम है यह प्रोजेक्ट?
Gurugram देश के सबसे तेजी से विकसित हो रहे शहरी केंद्रों में से एक है। यहां बढ़ती आबादी और ट्रैफिक दबाव को देखते हुए मजबूत पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही है। Gurugram Metro Project के पूरा होने से हजारों लोगों को रोजाना आवागमन में सुविधा मिलेगी और सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा।
इसके अलावा, यह प्रोजेक्ट रियल एस्टेट और बिजनेस गतिविधियों को भी बढ़ावा देगा, जिससे शहर की आर्थिक स्थिति और मजबूत होगी।
समाधान के इंतजार में बड़ा प्रोजेक्ट
फिलहाल, Gurugram Metro Project जमीन मुआवजे के विवाद में फंसा हुआ है और सभी की निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।
अगर समय रहते इस विवाद का समाधान नहीं हुआ, तो यह महत्वाकांक्षी परियोजना देरी का शिकार हो सकती है। वहीं, यदि सहमति बन जाती है, तो यह प्रोजेक्ट गुरुग्राम के शहरी विकास की दिशा बदल सकता है। अब देखना होगा कि सरकार इस पेंच को कितनी जल्दी सुलझाती है और क्या यह प्रोजेक्ट तय समय पर जमीन पर उतर पाता है या नहीं।
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