Delhi Police Remand: राजधानी दिल्ली में AI समिट के दौरान यूथ कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन का मामला अब कानूनी मोड़ ले चुका है। सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने पांचों आरोपियों के लिए पांच दिन की रिमांड मांगी। सुनवाई पटियाला हाउस कोर्ट में हुई, जहां दोनों पक्षों ने मजबूत दलीलें पेश कीं। सभी पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।
यह मामला अब सिर्फ एक विरोध प्रदर्शन नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक बहस और कानूनी रणनीति का केंद्र बन गया है।
Delhi Police Remand: कौन हैं आरोपी और क्या है आरोप?
दिल्ली पुलिस ने जिन पांच लोगों की रिमांड मांगी है, उनमें सिद्धार्थ, सौरव और अरबाज शामिल हैं, जिन्हें हिमाचल प्रदेश से गिरफ्तार किया गया था। पुलिस का दावा है कि ये सभी AI समिट के दौरान आयोजित विरोध प्रदर्शन की प्लानिंग में शामिल थे।
पुलिस के मुताबिक, प्रोटेस्ट के दौरान पहनी गई टी-शर्ट और दूसरे सामान की सोर्सिंग, फंडिंग और नेटवर्क की जांच करना बहुत ज़रूरी है। जांच एजेंसी का कहना है कि यह अचानक हुआ प्रोटेस्ट नहीं था, बल्कि पहले से प्लान किया गया था।
Delhi Police Remand: दिल्ली पुलिस की दलील – ‘जांच के लिए रिमांड जरूरी है’
कोर्ट में पेश दलीलों के दौरान, दिल्ली पुलिस ने कहा कि आरोपी से पूरी पूछताछ जरूरी है। पुलिस की दलील है कि, प्रोटेस्ट की प्लानिंग कहां हुई थी? टी-शर्ट और दूसरा प्रमोशनल सामान कहां से आया? क्या इसके पीछे कोई बड़ा ऑर्गनाइजेशनल नेटवर्क है? क्या फंडिंग बाहरी सोर्स से हुई थी?
पुलिस का कहना है कि इन सभी सवालों के जवाब बिना कस्टडी रिमांड के मिलना नामुमकिन है। इसलिए, पांच दिन की रिमांड जरूरी है।
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Delhi Police Remand: बचाव पक्ष ने जवाब दिया – यह एक डेमोक्रेटिक प्रोटेस्ट था
आरोपी के वकील ने कोर्ट में पुलिस की मांग का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि यह एक शांतिपूर्ण और डेमोक्रेटिक प्रोटेस्ट था। इसे पॉलिटिकल ट्विस्ट देकर युवाओं को टारगेट किया जा रहा है। बचाव पक्ष ने कहा कि, प्रोटेस्ट संविधान के तहत मिली बोलने की आजादी का हिस्सा हैं। आरोपी का कोई क्रिमिनल रिकॉर्ड नहीं है। रिमांड रिक्वेस्ट सिर्फ दबाव डालने के लिए की जा रही है। पुलिस के पास अभी तक कोई पक्का सबूत नहीं है।
वकील ने यह भी आरोप लगाया कि यह कार्रवाई पॉलिटिकल रूप से मोटिवेटेड है और युवाओं की आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है।
Delhi Police Remand: AI समिट और पॉलिटिक्स
AI समिट जैसे बड़े इंटरनेशनल इवेंट के दौरान हुआ यह प्रदर्शन अब पॉलिटिकल बहस का मुद्दा बन गया है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार आलोचना बर्दाश्त नहीं कर पा रही है, जबकि सत्ताधारी पार्टी का दावा है कि इंटरनेशनल स्टेज पर भारत की इमेज खराब करने की कोशिश की गई।
पॉलिटिकल एनालिस्ट का मानना है कि यह मामला भविष्य में और बढ़ सकता है, क्योंकि इसमें नेशनल पॉलिटिक्स और यूथ ऑर्गनाइजेशनल की एक्टिविज्म दोनों शामिल हैं।
Delhi Police Remand: कोर्ट ने अपना फैसला क्यों रखा रिजर्व?
सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने डिटेल में अपनी दलीलें रखीं। कोर्ट ने पाया कि मामला सेंसिटिव है और इसके कानूनी पहलुओं की पूरी जांच की जरूरत है। इसलिए, पटियाला हाउस कोर्ट ने अपना ऑर्डर रिजर्व रखा।
अब सबकी नजरें कोर्ट के फ़ैसले पर हैं। अगर रिमांड मिल जाती है, तो पुलिस को आरोपी से डिटेल में पूछताछ करने का मौका मिलेगा। लेकिन, अगर रिमांड रिजेक्ट हो जाती है, तो यह बचाव पक्ष के लिए बड़ी राहत होगी।
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Delhi Police Remand: क्या कहता है कानून?
इंडियन कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसीजर (CrPC) के तहत, पुलिस को आरोपी से पूछताछ करने के लिए कुछ समय के लिए कस्टडी रिमांड दी जा सकती है। लेकिन, इसके लिए यह साबित करना होगा कि, जांच अधूरी है, सबूत इकट्ठा करना बाकी है और आरोपी से पूछताछ जरूरी है। कोर्ट हर केस की जांच करता है ताकि यह पक्का हो सके कि रिमांड का गलत इस्तेमाल नहीं हो रहा है।
Delhi Police Remand: आगे क्या?
इस केस में अगला बड़ा मोड़ कोर्ट के फैसले के बाद आएगा। अगर रिमांड मिल जाता है, तो जांच में तेजी आएगी। अगर नहीं, तो यह पॉलिटिकल और लीगल बहस को नया मोड़ दे सकता है।
AI समिट से शुरू हुआ यह विवाद अब कोर्ट में है। यह केस सिर्फ पांच आरोपियों तक सीमित नहीं है, यह डेमोक्रेटिक अधिकारों, पॉलिटिकल विरोध और कानून-व्यवस्था के बीच बैलेंस को लेकर एक बड़ी बहस बन गया है।
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