Delhi NCR Air Pollution: दिल्ली-एनसीआर में रहने वालों के लिए AQI का लाल और पीला रंग आम बात बन चुका है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़े बताते हैं कि सर्दियों के मौसम में ग्रीन जोन के दिन उंगलियों पर गिने जा सकते हैं। अब वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने साफ कहा है कि इस स्थिति के पीछे सबसे बड़ा कारण वाहनों (Delhi NCR Air Pollution) से निकलने वाला धुआं है, जिसने राजधानी की हवा को लगातार खतरनाक बनाए रखा है।
सुप्रीम कोर्ट में CAQM का बड़ा खुलासा
बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में पेश होते हुए CAQM की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ को बताया कि 2015 से 2025 तक के अध्ययनों के विश्लेषण से अहम तथ्य सामने आए हैं। इन अध्ययनों के मुताबिक, दिल्ली में PM2.5 प्रदूषण के दो मुख्य स्रोत हैं-
- NCR के भीतर प्राथमिक उत्सर्जन, जिसमें सड़क की धूल और वाहनों से निकलने वाली गैसें शामिल हैं।
- सेकेंड्री पार्टिकल, जो सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसी गैसों की रासायनिक प्रतिक्रिया से बनते हैं।
- इन दोनों का असर सर्दियों में और गंभीर हो जाता है, जब मौसमीय हालात प्रदूषण को फंसा लेते हैं।
गाड़ियों पर सबसे ज्यादा फोकस क्यों?
CAQM के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ी है, लेकिन सार्वजनिक परिवहन उस रफ्तार से नहीं बढ़ पाया। नतीजा यह है कि निजी गाड़ियां प्रदूषण (Delhi NCR Air Pollution) का सबसे बड़ा स्रोत बन गई हैं। आयोग ने अदालत को बताया कि यदि परिवहन में सुधार नहीं हुआ, तो बाकी उपाय भी सीमित असर ही दिखाएंगे।

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15 दीर्घकालिक उपाय – हवा सुधारने की पूरी रणनीति
CAQM ने वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए चरणबद्ध और दीर्घकालिक रणनीति पेश की है। इसके प्रमुख बिंदु हैं-
1. पुराने और ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को हटाना
समय पर एंड-ऑफ-लाइफ वाहनों को सड़क से हटाना सबसे अहम कदम बताया गया है।
2. PUC 2.0 और रिमोट सेंसिंग
PUC 2.0 सिस्टम को मजबूत करने और रिमोट सेंसिंग तकनीक से चलते वाहनों के उत्सर्जन की जांच की सिफारिश की गई है।
3. सार्वजनिक परिवहन का विस्तार
मेट्रो, रीजनल रेल, RRTS नेटवर्क, मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट हब और रियल-टाइम पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम पर जोर दिया गया है, ताकि निजी गाड़ियों पर निर्भरता कम हो।
इलेक्ट्रिक और CNG पर दांव
आयोग ने दिल्ली-एनसीआर में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए ईवी नीति में सुधार, चार्जिंग और बैटरी स्वैपिंग स्टेशन बढ़ाने की सिफारिश की है।
इसके साथ ही-
- पुराने वाहनों को स्क्रैप करने पर ज्यादा प्रोत्साहन
- ई-बस और CNG बसों की संख्या बढ़ाना
- हाईवे और NCR में CNG-LNG नेटवर्क विकसित करना जैसे कदम भी सुझाए गए हैं।
ट्रैफिक और पार्किंग भी बन रहे हैं प्रदूषण की वजह
CAQM ने माना कि ट्रैफिक जाम और अव्यवस्थित पार्किंग भी प्रदूषण बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। इसीलिए इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम, सख्त पार्किंग नीति और पर्यावरण संरक्षण शुल्क बढ़ाने जैसे उपायों की सिफारिश की गई है।
लंबी लड़ाई की तैयारी जरूरी
CAQM का साफ कहना है कि दिल्ली की हवा को साफ करना किसी एक मौसम या तात्कालिक कदम से संभव नहीं है। इसके लिए परिवहन व्यवस्था में संरचनात्मक बदलाव, तकनीक का व्यापक इस्तेमाल और लोगों की आदतों में बदलाव तीनों जरूरी हैं। आयोग की 15-सूत्रीय योजना इसी दीर्घकालिक सोच को दर्शाती है। यदि इसे सख्ती से लागू किया गया, तो दिल्ली-एनसीआर को फिर से सांस लेने (Delhi NCR Air Pollution) लायक बनाना नामुमकिन नहीं होगा।
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