Delhi Metro Station Renaming: राजधानी में मेट्रो सिर्फ सफर का जरिया नहीं, बल्कि इलाकों की पहचान भी है। इसी सोच के साथ रेखा गुप्ता की अध्यक्षता वाले राज्य नामकरण प्राधिकरण ने दिल्ली के 9 मेट्रो स्टेशनों के नाम बदलने (Delhi Metro Station Renaming) का फैसला किया है। कुल 21 प्रस्तावों पर विचार के बाद सात स्टेशनों के नाम में संशोधन, दो के नाम पूरी तरह बदलने और 12 नाम यथावत रखने का निर्णय लिया गया। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि नए नाम स्थानीय भावनाओं, ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और सांस्कृतिक पहचान को ध्यान में रखते हुए तय किए गए हैं।
किन स्टेशनों के नाम बदले?
प्राधिकरण के फैसले के अनुसार जिन स्टेशनों के नाम संशोधित (Delhi Metro Station Renaming) किए गए हैं, उनमें शामिल हैं-
- उत्तरी पीतमपुरा–प्रशांत विहार (पहले प्रशांत विहार)
- जगतपुर–वजीराबाद (पहले जगतपुर)
- नानक प्याऊ–डेरावल नगर (पहले डेरावल नगर)
- खानपुर–वायु सेनाबाद (पहले खानपुर)
- नानकसर–सोनिया विहार (पहले सोनिया विहार)
- श्री राम मंदिर मयूर विहार (पहले मयूर विहार पॉकेट-1)
- मंगोलपुर कलां–वेस्ट एंक्लेव (पहले वेस्ट एंक्लेव)
इसके अलावा, नॉर्थ पीतमपुरा का नाम बदलकर ‘हैदरपुर विलेज’ और पीतमपुरा का नाम ‘मधुबन चौक’ कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि ये बदलाव स्थानीय पहचान को और स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।
पढ़े ताजा अपडेट: Hindi News, Today Hindi News, Breaking News
12 स्टेशन पहले जैसे ही
जिन 12 स्टेशनों के नाम पहले की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) के अनुसार थे, उन्हें बरकरार रखा गया है। इनमें मजलिस पार्क, भलस्वा, हैदरपुर बदली मोड़, दीपाली चौक, यमुना विहार, भजनपुरा, खजुरी खास, सूरघाट, झड़ौदा माजरा, बुराड़ी, पुष्पांजलि और मौजपुर–बबरपुर शामिल हैं।
सरकार का तर्क – मेट्रो स्टेशन सिर्फ ठिकाना नहीं, पहचान भी
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि मेट्रो स्टेशन (Delhi Metro Station Renaming) केवल यात्रियों के चढ़ने-उतरने की जगह नहीं हैं, बल्कि वे उस क्षेत्र की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक भी होते हैं। इसलिए नामकरण प्रक्रिया में गहन विचार-विमर्श किया गया। उन्होंने बताया कि नाम तय करते समय स्थानीय इतिहास, सामाजिक महत्व, जनप्रतिनिधियों की राय और नागरिकों के सुझावों को ध्यान में रखा गया। सरकार का मानना है कि स्पष्ट और स्थानीय रूप से पहचाने जाने वाले नाम यात्रियों के लिए भी सुविधाजनक होंगे।
राजनीतिक और सामाजिक संकेत
दिल्ली में सार्वजनिक स्थलों के नामकरण को अक्सर राजनीतिक और सांस्कृतिक नजरिए से भी देखा जाता है। इस फैसले को स्थानीय अस्मिता को मजबूत करने के प्रयास के रूप में पेश किया जा रहा है। हालांकि, विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया अभी सामने आना बाकी है, लेकिन माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस भी हो सकती है। मेट्रो स्टेशनों के नाम बदलने से यात्रियों को शुरुआती असुविधा हो सकती है, लेकिन लंबे समय में यह स्थानीय पहचान को मजबूती देगा।
आगे भी हो सकते हैं बदलाव
मुख्यमंत्री ने संकेत दिया कि यदि भविष्य में नाम परिवर्तन के प्रस्ताव तार्किक और उपयुक्त पाए जाते हैं तो उन पर भी विचार किया जाएगा। यानी नामकरण प्रक्रिया स्थायी नहीं, बल्कि परिस्थितियों और जनभावनाओं के अनुसार लचीली रहेगी।
यात्रियों पर क्या असर?
दिल्ली मेट्रो के लाखों यात्री रोजाना इन स्टेशनों (Delhi Metro Station Renaming) से सफर करते हैं। ऐसे में नाम बदलने के बाद संकेतकों, घोषणाओं और डिजिटल मैप्स में बदलाव किया जाएगा। परिवहन विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते स्पष्ट सूचना और प्रचार से भ्रम की स्थिति को कम किया जा सकता है।
Read Also: 4 घंटे में दिल्ली से बनारस, जल्द शुरू होगा हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन कॉरिडोर, जानें रूट और स्टेशन



