Delhi Admit Card Controversy: दिल्ली की पॉलिटिक्स में एक बार फिर एजुकेशन को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आम आदमी पार्टी (AAP) ने दिल्ली के एजुकेशन मिनिस्टर आशीष सूद पर गंभीर सवाल उठाए हैं। मामला स्कूलों में बच्चों के एडमिट कार्ड रोके जाने से जुड़ा है, जिससे आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।
AAP लीडर सौरभ भारद्वाज ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि अगर मिनिस्टर 1.8 मिलियन बच्चों के गार्जियन होने का दावा करते हैं, तो उन्हें उन प्रिंसिपल्स के खिलाफ सख्त एक्शन लेना चाहिए जिन्होंने उनके एडमिट कार्ड रोके हैं। सवाल यह है कि क्या बच्चों के भविष्य पर पॉलिटिक्स हो रही है?
Delhi Admit Card Controversy: क्या है पूरा एडमिट कार्ड विवाद?
दिल्ली के कुछ प्राइवेट और सरकारी मदद वाले स्कूलों में स्टूडेंट्स के एडमिट कार्ड रोके जाने की शिकायतें सामने आई हैं। आरोप है कि फीस या दूसरे एडमिनिस्ट्रेटिव कारणों से बच्चों को एग्जाम में बैठने से रोका गया।
AAP का दावा है कि कई प्रिंसिपल ने मंत्री के घर पर एडमिट कार्ड रोके रखे थे, लेकिन बच्चों को समय पर राहत नहीं मिली। इस पूरे मामले ने पेरेंट्स की चिंता बढ़ा दी है।
Delhi Admit Card Controversy: सौरभ भारद्वाज का सीधा हमला
सौरभ भारद्वाज ने कहा, ‘आशीष सूद दावा करते हैं कि वे दिल्ली के 1.8 मिलियन बच्चों के गार्जियन हैं। अगर वे सच में गार्जियन होते, तो बच्चों के एडमिट कार्ड रोकने वाले प्रिंसिपल के खिलाफ एक्शन लेते।’ उन्होंने सवाल उठाया –
- स्कूल मैनेजमेंट ने एडमिट कार्ड क्यों रोके?
- क्या एजुकेशन डिपार्टमेंट को इसकी जानकारी नहीं थी?
- मिनिस्टर ने तुरंत दखल क्यों नहीं दिया
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Delhi Admit Card Controversy: एजुकेशन मिनिस्टर पर बढ़ा दबाव
दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद पर विपक्ष का दबाव लगातार बढ़ रहा है। AAP का दावा है कि यह एडमिनिस्ट्रेटिव फेलियर है। मंत्री ने साफ किया कि डिपार्टमेंट मामले की जांच कर रहा है और किसी भी बच्चे के भविष्य के साथ कॉम्प्रोमाइज नहीं होने देगा।
लेकिन सवाल यह है कि अगर जांच चल रही थी, तो प्रिंसिपल मंत्री के घर पर क्यों मौजूद थे? क्या यह प्रॉब्लम का सॉल्यूशन था या कोई पॉलिटिकल मैसेज?
Delhi Admit Card Controversy: पेरेंट्स में गुस्सा और चिंता
पेरेंट्स सबसे ज्यादा उन लोगों को लेकर परेशान हैं जिनके बच्चों को समय पर एडमिट कार्ड नहीं मिले। बोर्ड एग्जाम जैसे अहम मोड़ पर ऐसी स्थिति बच्चों की मेंटल हेल्थ पर भी असर डालती है। पेरेंट्स का कहना है कि, बच्चों ने पूरे साल मेहनत की है। एग्जाम से ठीक पहले एडमिट कार्ड रोकना गलत है। एजुकेशन को पॉलिटिक्स से दूर रखना चाहिए।
Delhi Admit Card Controversy: कानून क्या कहता है?
राइट टू एजुकेशन (RTE) एक्ट के तहत, किसी भी बच्चे को पढ़ाई से दूर नहीं रखा जा सकता। अगर फीस का झगड़ा है, तो उसे अलग से सुलझाया जाना चाहिए, लेकिन उन्हें एग्जाम से रोकना कानूनी तौर पर गलत हो सकता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि, एडमिट कार्ड रोकना एक गलत एडमिनिस्ट्रेटिव एक्शन है। एजुकेशन डिपार्टमेंट को साफ गाइडलाइन जारी करनी चाहिए। स्कूलों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।
Delhi Admit Card Controversy: क्या यह सिर्फ पॉलिटिकल बहस है?
दिल्ली की पॉलिटिक्स में एजुकेशन हमेशा से एक बड़ा मुद्दा रहा है। AAP ने अपने एजुकेशन मॉडल को अपने कार्यकाल की सबसे बड़ी अचीवमेंट बताया है। इसलिए, एजुकेशन से जुड़ा हर विवाद पॉलिटिकल मोड़ ले लेता है। यह मुद्दा अब सिर्फ एडमिट कार्ड तक सीमित नहीं रहा, यह ‘जिम्मेदारी बनाम बयानबाजी’ की लड़ाई बन गया है।
Delhi Admit Card Controversy: सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई
#AdmitCardControversy ट्विटर (X), फेसबुक और इंस्टाग्राम पर ट्रेंड करने लगा। कुछ लोग इसे एडमिनिस्ट्रेटिव चूक कह रहे हैं, तो कुछ इसे ऑपोजिशन पॉलिटिक्स कह रहे हैं। खासकर युवा यह सवाल उठा रहे हैं कि, क्या स्टूडेंट्स को पॉलिटिकल फायदे के लिए टारगेट किया जा रहा है? क्या एजुकेशन मिनिस्टर को तुरंत एक्शन लेना चाहिए था?
Delhi Admit Card Controversy: आगे क्या हो सकता है?
इस मामले में संभावित कदम –
- एजुकेशन डिपार्टमेंट द्वारा एक फॉर्मल जांच।
- दोषी पाए जाने पर प्रिंसिपल के खिलाफ कार्रवाई।
- एडमिट कार्ड जारी करने के लिए साफ निर्देश।
- भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए नई गाइडलाइंस।
अगर जल्द ही कोई समाधान नहीं निकला, तो यह मुद्दा असेंबली तक पहुंच सकता है।



