AI Summit Protest: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के प्रतिष्ठित सम्मेलन केंद्र भारत मंडपम में आयोजित एआई समिट 2026 उस समय राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गया, जब कार्यक्रम स्थल पर यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने टीशर्ट उतारकर विरोध प्रदर्शन (AI Summit Protest) किया। यह समिट तकनीक, नवाचार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका को प्रदर्शित करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था। लेकिन मंच पर तकनीकी विमर्श के बीच सियासी तापमान अचानक बढ़ गया।
एआई इम्पैक्ट समिट में क्या हुआ?
समिट के दौरान कुछ यूथ कांग्रेस कार्यकर्ता अचानक कार्यक्रम स्थल के भीतर पहुंचे और टीशर्ट उतारकर विरोध जताया। इस प्रदर्शन ने सुरक्षा व्यवस्था और आयोजन की शुचिता को लेकर सवाल भी खड़े कर दिए। हालांकि आयोजन बाधित नहीं हुआ, लेकिन घटना ने राजनीतिक हलकों में बहस छेड़ दी है कि क्या अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस तरह का विरोध उचित है?
राजनाथ सिंह का कड़ा रुख
घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए Rajnath Singh ने इसे ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ और ‘भारत की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को धूमिल करने का प्रयास ‘बताया। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि जब पूरा विश्व नई दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट (AI Summit Protest) के जरिए भारत की तकनीकी क्षमता और वैश्विक नेतृत्व को देख रहा था, तब इस तरह का व्यवहार देश के सम्मान के विपरीत है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी पोस्ट में उन्होंने लिखा कि देशहित से ऊपर दलगत राजनीति को रखना बेहद दुखद है। उनके अनुसार, जब भी भारत वैश्विक मंच पर आगे बढ़ता है, विपक्ष को राष्ट्रहित के साथ खड़ा होना चाहिए, न कि व्यवधान उत्पन्न करना चाहिए।
कांग्रेस का पक्ष – ‘विरोध हमारा अधिकार’
वहीं दूसरी ओर Indian Youth Congress ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर प्रदर्शन का वीडियो साझा करते हुए इसे ‘लोकतांत्रिक विरोध’ बताया। यूथ कांग्रेस का कहना है कि एआई समिट जैसे चमकदार मंच के पीछे कुछ अहम मुद्दों को दबाया जा रहा है। उनके अनुसार, जब कॉरपोरेट हित देशहित से ऊपर दिखाई दें और विदेश नीति में नरमी नजर आए, तो विरोध करना कर्तव्य बन जाता है। पोस्ट में प्रधानमंत्री पर भी निशाना साधते (AI Summit Protest) हुए सरकार से जवाबदेही की मांग की गई।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर राजनीति- सवाल और संकेत
एआई समिट 2026 को भारत की तकनीकी कूटनीति का बड़ा अवसर माना जा रहा था। दुनिया भर से तकनीक विशेषज्ञ, नीति निर्माता और उद्योग जगत के प्रतिनिधि इस कार्यक्रम में शामिल हुए। ऐसे में कार्यक्रम स्थल पर हुए विरोध प्रदर्शन ने यह बहस छेड़ दी है कि क्या अंतरराष्ट्रीय आयोजनों को घरेलू राजनीतिक विरोध से अलग रखा जाना चाहिए? राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लोकतंत्र में विरोध स्वाभाविक है, लेकिन उसका स्वरूप और समय भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है। खासकर तब, जब देश किसी वैश्विक मंच की मेजबानी (AI Summit Protest) कर रहा हो।
सुरक्षा और प्रोटोकॉल पर भी चर्चा
इस घटना के बाद आयोजन स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में प्रदर्शनकारियों का अंदर पहुंचना सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि प्रशासन की ओर से कहा गया है कि स्थिति को तुरंत नियंत्रित कर लिया गया और कार्यक्रम बिना किसी बड़े व्यवधान के जारी रहा।
सियासत बनाम राष्ट्रहित – जनता किसके साथ?
घटना के बाद सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। जहां सरकार इसे देश की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग करार दे रहा है। अब देखना यह होगा कि जनता इस पूरे घटनाक्रम (AI Summit Protest) को किस नजर से देखती है क्या यह लोकतंत्र की जीवंतता का उदाहरण है या फिर वैश्विक मंच पर सियासी टकराव की अनावश्यक तस्वीर?
एआई समिट 2026 का उद्देश्य जहां भारत को तकनीकी महाशक्ति के रूप में स्थापित करना था, वहीं इस घटना ने यह भी दिखा दिया कि देश की राजनीति हर मंच पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराने में पीछे नहीं रहती।
Also read: असम की राजनीति में बड़ा ‘टर्निंग पॉइंट,’ भूपेन बोरा की बीजेपी में एंट्री तय, हिमंता बोले-‘यह घर वापसी’



