WPI Inflation India: देश में महंगाई को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ने लगी है। रिटेल महंगाई के बाद अब थोक महंगाई ने भी तेजी का संकेत दिया है। सरकार द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार फरवरी महीने में WPI Inflation India 11 महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई है।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक होलसेल प्राइस इंडेक्स यानी WPI Inflation India फरवरी में बढ़कर 2.13 प्रतिशत हो गई, जबकि जनवरी में यह 1.81 प्रतिशत और दिसंबर में 0.96 प्रतिशत थी। लगातार बढ़ती यह दर संकेत दे रही है कि अर्थव्यवस्था में कीमतों का दबाव धीरे-धीरे फिर से बढ़ रहा है।
मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स ने बढ़ाया महंगाई का दबाव
ताजा WPI Inflation India के आंकड़ों के अनुसार मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स इस बढ़ोतरी के सबसे बड़े कारण बने हैं। थोक महंगाई सूचकांक में मैन्युफैक्चर्ड वस्तुओं का वेटेज सबसे ज्यादा होता है। फरवरी में इस श्रेणी में महंगाई बढ़कर 2.92 प्रतिशत हो गई, जबकि जनवरी में यह 2.86 प्रतिशत और दिसंबर में 2.03 प्रतिशत थी।
विशेषज्ञों के अनुसार धातु उत्पाद, कपड़े, खाद्य प्रसंस्कृत वस्तुएं और अन्य औद्योगिक उत्पादों की कीमतों में वृद्धि के कारण WPI Inflation India में यह उछाल देखने को मिला है।
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खाद्य वस्तुओं में भी बढ़ी महंगाई
खाद्य वस्तुओं की कीमतों ने भी थोक महंगाई को ऊपर धकेलने में भूमिका निभाई है। फरवरी में खाद्य महंगाई बढ़कर 1.85 प्रतिशत हो गई, जबकि जनवरी में यह 1.41 प्रतिशत थी। विश्लेषकों का कहना है कि कुछ कृषि उत्पादों और खाद्य प्रसंस्करण से जुड़ी वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी ने WPI Inflation India को प्रभावित किया है।
हालांकि कई खाद्य वस्तुओं की कीमतों में महीने-दर-महीने गिरावट भी दर्ज की गई है, लेकिन सालाना आधार पर उनका प्रभाव अभी भी महंगाई को ऊपर बनाए हुए है।
प्राइमरी प्रोडक्ट्स में तेज उछाल
ताजा आंकड़ों में प्राइमरी प्रोडक्ट्स यानी कृषि उत्पाद और खनिजों की श्रेणी में भी तेज बढ़ोतरी देखी गई है। फरवरी में इस श्रेणी की महंगाई बढ़कर 3.27 प्रतिशत हो गई, जबकि जनवरी में यह 2.21 प्रतिशत और दिसंबर में केवल 0.21 प्रतिशत थी।
इस श्रेणी में सालाना आधार पर बढ़ोतरी ने भी WPI Inflation India को ऊंचा बनाए रखने में भूमिका निभाई है। हालांकि महीने-दर-महीने आधार पर इसमें 0.52 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
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खाद्य और खनिज कीमतों में गिरावट
मासिक आधार पर प्राइमरी प्रोडक्ट्स में आई गिरावट का मुख्य कारण खाद्य वस्तुओं और खनिजों की कीमतों में कमी रहा। आंकड़ों के अनुसार खाद्य वस्तुओं की कीमतों में 1.33 प्रतिशत और खनिजों की कीमतों में 1.21 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
हालांकि कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस की कीमतों में 4.17 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि नॉन-फूड प्रोडक्ट्स की कीमतों में 0.83 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई। इन बदलावों ने मिलकर WPI Inflation India की दिशा को प्रभावित किया है।
फ्यूल और बिजली अभी भी नकारात्मक दायरे में
फ्यूल और बिजली से जुड़ी कीमतें अभी भी थोक महंगाई पर दबाव बनाए हुए हैं। फरवरी में इस श्रेणी की महंगाई माइनस 3.78 प्रतिशत पर बनी रही, हालांकि यह जनवरी के माइनस 4.01 प्रतिशत से थोड़ा बेहतर है।
दिसंबर में फ्यूल महंगाई 2.31 प्रतिशत थी। इसके बावजूद महीने-दर-महीने आधार पर फ्यूल और पावर इंडेक्स में 1.17 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ऊर्जा कीमतों में तेजी जारी रहती है, तो आने वाले महीनों में WPI Inflation India पर इसका असर और स्पष्ट दिखाई दे सकता है।
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अर्थव्यवस्था के लिए क्या संकेत?
आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार WPI Inflation India का 11 महीने के उच्च स्तर पर पहुंचना इस बात का संकेत है कि उत्पादन लागत और सप्लाई चेन में दबाव धीरे-धीरे बढ़ रहा है। अगर यह रुझान लंबे समय तक जारी रहता है, तो इसका असर खुदरा महंगाई और उपभोक्ता कीमतों पर भी पड़ सकता है।
आगे क्या रह सकती है स्थिति?
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि आने वाले महीनों में WPI Inflation India कई कारकों पर निर्भर करेगी। इनमें वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें, कृषि उत्पादन, सप्लाई चेन और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां प्रमुख हैं।
अगर कच्चे तेल और औद्योगिक धातुओं की कीमतों में तेजी बनी रहती है, तो थोक महंगाई पर दबाव बना रह सकता है। हालांकि सरकार और नीति निर्माताओं की नजर इन आंकड़ों पर बनी हुई है और आने वाले समय में मौद्रिक नीति के फैसलों पर भी इसका असर पड़ सकता है।
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