PLFS 2025 Report: भारत के श्रम बाजार को लेकर आई ताजा रिपोर्ट ने उम्मीद की नई किरण दिखाई है। PLFS 2025 Report के अनुसार, देश में बेरोजगारी दर में हल्की लेकिन स्थिर गिरावट दर्ज की गई है, जो आर्थिक गतिविधियों में सुधार और रोजगार के अवसरों में बढ़ोतरी का संकेत देती है। केंद्र सरकार द्वारा जारी इस रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2025 के दौरान 15 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग के लोगों के लिए बेरोजगारी दर घटकर 3.1 प्रतिशत रह गई है, जो 2024 में 3.2 प्रतिशत थी। यह रिपोर्ट Ministry of Statistics and Programme Implementation द्वारा जारी की गई है, जिसमें देशभर के लाखों लोगों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है।
धीरे-धीरे मजबूत होता श्रम बाजार
PLFS 2025 Report के मुताबिक, यह गिरावट भले ही मामूली हो, लेकिन यह एक स्थिर और सकारात्मक ट्रेंड को दर्शाती है। इससे यह साफ होता है कि भारत का श्रम बाजार धीरे-धीरे मजबूत हो रहा है और रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह सुधार विभिन्न क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों के बढ़ने और सरकारी नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन का परिणाम है।
Read More: 20% गिरावट के बाद दबाव में सोना, क्या अभी और गिरेगा?
पुरुषों में सुधार, महिलाओं की स्थिति स्थिर
रिपोर्ट में लैंगिक आधार पर भी महत्वपूर्ण आंकड़े सामने आए हैं। पुरुषों की बेरोजगारी दर 2024 के 3.3 प्रतिशत से घटकर 2025 में 3.1 प्रतिशत हो गई है। वहीं महिलाओं की बेरोजगारी दर 3.1 प्रतिशत पर स्थिर बनी हुई है। हालांकि, PLFS 2025 Report यह भी बताती है कि महिलाओं की श्रम भागीदारी दर में सुधार की अभी भी काफी संभावनाएं हैं, खासकर शहरी क्षेत्रों में।
ग्रामीण बनाम शहरी तस्वीर
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच रोजगार की स्थिति में स्पष्ट अंतर देखने को मिला है। ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी दर घटकर 2.4 प्रतिशत रह गई है, जो पिछले वर्ष 2.5 प्रतिशत थी।
दिलचस्प बात यह है कि ग्रामीण महिलाओं की बेरोजगारी दर 2.1 प्रतिशत रही, जो ग्रामीण पुरुषों (2.6 प्रतिशत) से कम है। वहीं शहरी क्षेत्रों में स्थिति थोड़ी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। शहरी पुरुषों के लिए बेरोजगारी दर 4.2 प्रतिशत और महिलाओं के लिए 6.4 प्रतिशत दर्ज की गई है।
Read More: होटल-रेस्तरां में ‘Gas Surcharge Ban’ लागू, CCPA ने अतिरिक्त शुल्क को बताया अवैध
रोजगार की गुणवत्ता में सुधार
PLFS 2025 Report का सबसे अहम पहलू रोजगार की प्रकृति में बदलाव है। रिपोर्ट के अनुसार, देश में स्वरोजगार की हिस्सेदारी 57.5 प्रतिशत से घटकर 56.2 प्रतिशत रह गई है।
इसके विपरीत, नियमित वेतनभोगी नौकरियों में वृद्धि देखी गई है, जो 22.4 प्रतिशत से बढ़कर 23.6 प्रतिशत हो गई है। यह बदलाव अर्थव्यवस्था के औपचारिक क्षेत्र के विस्तार का संकेत देता है। पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए वेतनभोगी नौकरियों में वृद्धि दर्ज की गई है, जो रोजगार की गुणवत्ता में सुधार को दर्शाती है।
क्षेत्रीय बदलाव और आर्थिक संकेत
रिपोर्ट में विभिन्न क्षेत्रों के रोजगार पैटर्न में भी बदलाव देखा गया है। कृषि क्षेत्र अभी भी सबसे बड़ा रोजगारदाता बना हुआ है, लेकिन इसकी हिस्सेदारी 44.8 प्रतिशत से घटकर 43 प्रतिशत हो गई है।
निर्माण क्षेत्र में भी हल्की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में सुधार देखने को मिला है। विनिर्माण क्षेत्र की हिस्सेदारी 11.6 प्रतिशत से बढ़कर 12.1 प्रतिशत और सेवा क्षेत्र की हिस्सेदारी 12.2 प्रतिशत से बढ़कर 13.1 प्रतिशत हो गई है। यह संकेत देता है कि भारत की अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे विविध और संतुलित दिशा में आगे बढ़ रही है।
Latest News Update Uttar Pradesh News,उत्तराखंड की ताज़ा ख़बर
आय में भी हुआ इजाफा
PLFS 2025 Report में श्रमिकों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। नियमित वेतन पाने वाले पुरुषों की औसत मासिक आय 5.8 प्रतिशत बढ़कर ₹24,217 हो गई है।
वहीं महिलाओं की आय में 7.2 प्रतिशत की वृद्धि के साथ यह ₹18,353 तक पहुंच गई है। स्वरोजगार करने वालों की आय में भी बढ़ोतरी देखी गई है, जिससे कुल मिलाकर आय स्तर में सुधार का संकेत मिलता है।
बड़े पैमाने पर किया गया सर्वेक्षण
यह सर्वेक्षण देशभर के 2.7 लाख से अधिक घरों में किया गया, जिसमें करीब 11.48 लाख लोगों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, श्रम बल भागीदारी दर (LFPR) ग्रामीण क्षेत्रों में काफी मजबूत बनी हुई है। पुरुषों के लिए यह 80.5 प्रतिशत और महिलाओं के लिए 45.9 प्रतिशत दर्ज की गई है।
क्या कहती है रिपोर्ट?
कुल मिलाकर, PLFS 2025 Report यह दर्शाती है कि भारत का श्रम बाजार धीरे-धीरे सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रहा है। बेरोजगारी दर में गिरावट, वेतनभोगी नौकरियों में वृद्धि और आय में सुधार जैसे संकेत अर्थव्यवस्था के लिए उत्साहजनक हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि शहरी बेरोजगारी और महिलाओं की भागीदारी जैसे क्षेत्रों में अभी और काम करने की जरूरत है।
आने वाले समय में नीतिगत सुधार और निवेश के जरिए इस सकारात्मक रुझान को और मजबूत किया जा सकता है, जिससे भारत की आर्थिक विकास यात्रा को नई गति मिलेगी।
पढ़े ताजा अपडेट: Hindi News, Today Hindi News, Breaking News



