Old vs New Tax Regime: बजट 2025 के बाद, भारतीय टैक्सपेयर्स के बीच एक सवाल सबसे ज्यादा चर्चा में रहा है, क्या पुराना टैक्स सिस्टम खत्म हो जाएगा? नए टैक्स सिस्टम से मिली बड़ी राहत और इसके डिफॉल्ट सिस्टम के तौर पर बनने के बाद यह सवाल और भी गंभीर हो गया है। खासकर मिडिल क्लास और सैलरी पाने वाले लोगों के लिए, यह फैसला उनकी पूरी फाइनेंशियल प्लानिंग पर असर डाल सकता है।
इस आर्टिकल में, हम बजट 2026 में पुराने टैक्स सिस्टम के खत्म होने की संभावनाओं, एक्सपर्ट्स क्या कह रहे हैं, और आम टैक्सपेयर्स को अब कौन सी स्ट्रेटेजी अपनानी चाहिए, इस पर डिटेल में बात करेंगे।
Old vs New Tax Regime: बजट 2025 ने न्यू टैक्स रिजीम को क्यों बनाया हीरो?
बजट 2025 में सरकार ने न्यू टैक्स रिजीम के सेक्शन 87A के तहत रिबेट को काफी बढ़ाया है। अब 12 लाख रुपये तक की सालाना इनकम पर जीरो टैक्स लगेगा। सैलरी पाने वालों के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन के साथ यह लिमिट 12.75 लाख रुपये तक पहुंच गई।
इसके साथ ही न्यू टैक्स रिजीम को डिफॉल्ट टैक्स सिस्टम बना दिया गया। मतलब अगर टैक्सपेयर कोई चॉइस नहीं करता, तो अपने आप न्यू टैक्स रिजीम अप्लाई हो जाएगी। यह साफ तौर पर बताता है कि सरकार का फोकस अब सिंपल और डिडक्शन-फ्री टैक्स सिस्टम पर है।
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Old vs New Tax Regime: नया टैक्स सिस्टम, युवा टैक्सपेयर्स की पहली पसंद
टैक्स एक्सपर्ट सुरेश सुराणा के अनुसार, नया टैक्स सिस्टम उन लोगों के लिए एकदम सही है जिनके पास ज्यादा टैक्स-सेविंग डिडक्शन नहीं हैं। इसके खास फायदों में शामिल हैं –
• कम टैक्स स्लैब
• आसान टैक्स कैलकुलेशन
• आसान कम्प्लायंस
• डिडक्शन के लिए कोई पेपरवर्क नहीं
इसी वजह से, युवा प्रोफेशनल, पहली बार नौकरी करने वाले और गिग वर्कर तेजी से नए टैक्स सिस्टम को अपना रहे हैं। सरकार हर बजट में सेक्शन 115BAC के तहत इस सिस्टम को और ज्यादा आकर्षक बना रही है।
Old vs New Tax Regime: पुराना टैक्स सिस्टम अभी भी क्यों है जरूरी?
यहीं पर तस्वीर थोड़ी और बैलेंस्ड हो जाती है। पुराना टैक्स सिस्टम अभी भी कई टैक्सपेयर्स के लिए बहुत फायदेमंद है, खासकर उनके लिए जिनके पास होम लोन है, हेल्थ इंश्योरेंस (80D) है और PF, PPF, NPS, ELSS में इन्वेस्टमेंट किया है। कई लोगों ने अपनी लॉन्ग-टर्म फाइनेंशियल प्लानिंग पुराने टैक्स सिस्टम के डिडक्शन के आधार पर की है। अगर यह सिस्टम अचानक बंद हो जाता है, तो उनकी प्लानिंग में रुकावट आ सकती है।
Old vs New Tax Regime: क्या बजट 2026 में पुरानी टैक्स व्यवस्था बंद हो सकती है?
SVAS बिजनेस एडवाइजर्स के डायरेक्टर शुभम जैन का कहना है कि सरकार के लिए एक तय डेडलाइन के साथ पुरानी टैक्स व्यवस्था को बंद करना आसान नहीं है। उनके अनुसार:
• ऐसा फैसला धीरे-धीरे होना चाहिए।
• टैक्सपेयर्स को बदलाव के लिए सही समय दिया जाना चाहिए।
• मौजूदा लोन और इन्वेस्टमेंट को बचाना जरूरी है।
हां, यह जरूर सच है कि पुरानी टैक्स व्यवस्था अब सिर्फ कुछ ही मामलों में काम की है। जैसे-जैसे होम लोन बंद होंगे और इन्वेस्टमेंट की आदतें बदलेंगी, इस व्यवस्था के यूजर्स की संख्या धीरे-धीरे कम होती जाएगी।
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Old vs New Tax Regime: क्या बिना किसी घोषणा के पुराना टैक्स सिस्टम खत्म हो जाएगा?
टैक्स प्रोफेशनल सचिन गर्ग का नजरिया काफी दिलचस्प है। उनके मुताबिक, सरकार को पुराना टैक्स सिस्टम खत्म करने के लिए कोई ऑफिशियल घोषणा करने की भी जरूरत नहीं होगी। जैसे:
• लोगों के होम लोन खत्म हो जाएंगे
• पारंपरिक टैक्स बचाने वाले इन्वेस्टमेंट कम हो जाएंगे
• नया टैक्स सिस्टम ज्यादा आकर्षक हो जाएगा
इसके हिसाब से, पुराने टैक्स सिस्टम का इस्तेमाल अपने आप कम हो जाएगा। लंबे समय में, नया टैक्स सिस्टम हावी हो सकता है।
Old vs New Tax Regime: आम टैक्सपेयर्स को अब क्या करना चाहिए?
यहां सबसे जरूरी सवाल यह है कि आपको क्या करना चाहिए? सुरेश सुराणा के अनुसार:
• अगर आपके पास ज्यादा डिडक्शन नहीं हैं, तो नया टैक्स सिस्टम सबसे अच्छा ऑप्शन है।
• अगर आपने होम लोन, इंश्योरेंस और रिटायरमेंट प्लानिंग में इन्वेस्ट किया है, तो अभी पुराने टैक्स सिस्टम को न छोड़ें।
हर साल अपना टैक्स रिटर्न फाइल करते समय दोनों सिस्टम के कैलकुलेशन की तुलना करना एक स्मार्ट कदम है। आंख बंद करके किसी एक सिस्टम पर टिके रहने से भविष्य में नुकसान हो सकता है।
Old vs New Tax Regime: आखिरी फैसला – क्या बजट 2026 कोई झटका देगा?
अभी तक के संकेतों से पता चलता है कि बजट 2026 में पुराने टैक्स सिस्टम को अचानक खत्म नहीं किया जाएगा। सरकार का तरीका स्टेप-बाय-स्टेप और धीरे-धीरे है। फोकस साफ है, टैक्स सिस्टम को आसान बनाना और कम्प्लायंस बढ़ाना।
लेकिन लंबे समय की तस्वीर देखें तो नया टैक्स सिस्टम ही भविष्य लगता है। इसलिए, टैक्सपेयर्स को भी अपनी फाइनेंशियल प्लानिंग को फ्लेक्सिबल और भविष्य के लिए तैयार करना होगा। एक स्मार्ट टैक्सपेयर वह होता है जो नियम बदलने से पहले अपनी स्ट्रैटेजी बदल लेता है।
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