Indian Stock Market Crash: आज भारतीय शेयर बाजार में बहुत बड़ी गिरावट आई, जिससे निवेशकों की नींद उड़ गई। सिर्फ छह घंटे की ट्रेडिंग में निवेशकों की लगभग ₹6 लाख करोड़ की दौलत डूब गई। सुबह बाजार थोड़ी गिरावट के साथ खुला, लेकिन दोपहर तक इसने रफ्तार पकड़ ली और तेजी से लाल निशान में चला गया।
बाजार में घबराहट का माहौल साफ दिख रहा था। छोटे निवेशकों से लेकर बड़े इंस्टीट्यूशनल निवेशकों तक, हर कोई बेचैन दिखा। ट्रेडिंग फ्लोर पर भारी बिकवाली से कई बड़ी कंपनियों के शेयरों में 3% से 7% तक की गिरावट आई।
Indian Stock Market Crash: सेंसेक्स और निफ्टी में ऐतिहासिक गिरावट
आज की ट्रेडिंग में BSE सेंसेक्स लगभग 1,100 पॉइंट्स गिर गया, जबकि निफ्टी 50 50 दिन के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। बाजार के बड़े इंडेक्स में इस तेज गिरावट ने निवेशकों को चौंका दिया।
मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी 2% से 4% की गिरावट देखी गई, जिससे पता चलता है कि दबाव सिर्फ बड़े स्टॉक्स तक ही सीमित नहीं था। बड़े पैमाने पर बिकवाली के कारण मार्केट का दायरा बहुत कमजोर रहा।
Indian Stock Market Crash: ₹6 लाख करोड़ का नुकसान कैसे हुआ?
स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड कंपनियों का टोटल मार्केट कैप इन्वेस्टर्स की टोटल वेल्थ को दिखाता है। जब कोई इंडेक्स तेज़ी से गिरता है, तो कंपनियों का मार्केट कैपिटलाइजेशन तेजी से घटता है।
आज के ट्रेडिंग सेशन में मार्केट खुलने से लेकर बंद होने तक कंपनियों के टोटल मार्केट कैप में लगभग ₹6 लाख करोड़ की गिरावट आई। इसका मतलब है कि इन्वेस्टर्स की पेपर वेल्थ में इतनी बड़ी गिरावट आई।
हालांकि, यह ‘असली नुकसान’ तब होता है जब निवेशक गिरावट के दौरान अपने शेयर बेचते हैं। अगर वे होल्ड करते हैं और मार्केट ठीक हो जाता है, तो यह नुकसान कुछ समय के लिए हो सकता है।
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Indian Stock Market Crash: किन सेक्टर्स पर सबसे ज्यादा असर पड़ा?
1. बैंकिंग सेक्टर
प्राइवेट और पब्लिक सेक्टर के बैंक शेयरों में तेज गिरावट देखी गई। बैंकिंग इंडेक्स में भारी बिकवाली ने मार्केट को और नीचे खींच लिया। इंटरेस्ट रेट्स को लेकर अनिश्चितता और विदेशी फंड के बाहर जाने से बैंकिंग स्टॉक्स पर दबाव बढ़ गया।
2. IT सेक्टर
IT कंपनी के शेयर लाल निशान पर बंद हुए। डॉलर के मजबूत होने और US में मंदी के डर से IT कंपनियों की कमाई पर असर पड़ने की चिंता बढ़ गई है।
3. मेटल सेक्टर
ग्लोबल डिमांड में कमी और कमोडिटी की कीमतों में गिरावट की खबरों के कारण मेटल कंपनी के शेयर गिरे।
4. ऑटो सेक्टर
ऑटो कंपनियों में प्रॉफिट बुकिंग देखी गई। रॉ मटेरियल की लागत और डिमांड को लेकर चिंताओं ने इन्वेस्टर्स को सावधान कर दिया।
Indian Stock Market Crash: ग्लोबल मार्केट पर असर
एशियाई मार्केट में कमजोरी और US मार्केट में उतार-चढ़ाव का असर भारतीय मार्केट पर भी पड़ा। खास तौर पर, डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज और नैस्डैक कंपोजिट में हालिया गिरावट ने इन्वेस्टर्स की भावना को कमजोर किया।
US में इंटरेस्ट रेट्स को लेकर अनिश्चितता और ग्लोबल इकोनॉमिक स्लोडाउन के डर ने रिस्क लेने की क्षमता को कम कर दिया है।
Indian Stock Market Crash: विदेशी इन्वेस्टर्स की भूमिका
विदेशी इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) लगातार इंडियन मार्केट से फंड निकाल रहे हैं। डॉलर के मजबूत होने और US बॉन्ड यील्ड बढ़ने से विदेशी इन्वेस्टर्स उभरते मार्केट से फंड निकालकर सुरक्षित ऑप्शन की ओर जा रहे हैं। इसका असर रुपये पर भी पड़ रहा है, जिससे इंपोर्ट कॉस्ट और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है।
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Indian Stock Market Crash: क्या यह मार्केट क्रैश है?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसे पूरी तरह से क्रैश कहना अभी जल्दबाजी होगी। अभी के लिए, इसे एक बड़ा करेक्शन माना जा सकता है। हालांकि, अगर आने वाले दिनों में गिरावट जारी रही, तो स्थिति गंभीर हो सकती है।
हिस्ट्री बताती है कि मार्केट में समय-समय पर ऐसे करेक्शन होते रहते हैं। 5% से 10% की गिरावट को नॉर्मल करेक्शन माना जाता है, जबकि 20% से ज्यादा की गिरावट को आमतौर पर क्रैश माना जाता है।
Indian Stock Market Crash: इन्वेस्टर्स को क्या करना चाहिए?
- पैनिक में फैसले लेने से बचें: इमोशनल फैसले अक्सर नुकसान बढ़ाते हैं।
- लॉन्ग-टर्म नजरिया रखें: मजबूत फंडामेंटल्स वाली कंपनियां समय के साथ रिकवर कर सकती हैं।
- अपने पोर्टफोलियो का रिव्यू करें: कमजोर और बहुत ज्यादा कर्ज वाली कंपनियों से बचें।
- SIP जारी रखें: गिरावट म्यूचुअल फंड इन्वेस्टर्स के लिए एक मौका भी हो सकती है।
- कैश की पोजीशन बनाए रखें: अगर मार्केट और गिरता है, तो अच्छे स्टॉक कम कीमतों पर खरीदे जा सकते हैं।
Indian Stock Market Crash: आगे क्या?
अगर विदेशी बिकवाली जारी रहती है और ग्लोबल संकेत कमजोर रहते हैं, तो मार्केट में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। हालांकि, कई एनालिस्ट का मानना है कि मौजूदा लेवल पर वैल्यूएशन आकर्षक हो रहे हैं।
हालांकि मार्केट में गिरावट से डर लग सकता है, लेकिन समझदारी, धैर्य और सही स्ट्रेटेजी से इन्वेस्टर इस समय को एक मौके में बदल सकते हैं। आने वाले ट्रेडिंग सेशन यह तय करेंगे कि यह सिर्फ एक टेम्पररी झटका है या एक बड़ी गिरावट की शुरुआत है।
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