India UK Free Trade Agreement: भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच लंबे समय से प्रतीक्षित India UK Free Trade Agreement अब लागू होने के करीब है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, यह ऐतिहासिक समझौता मई 2026 के दूसरे सप्ताह में प्रभावी हो सकता है। इस India UK Free Trade Agreement के लागू होने से दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्तों में नई ऊर्जा आएगी और द्विपक्षीय व्यापार को बड़ा प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
India UK Free Trade Agreement से खुलेगा व्यापार का नया रास्ता
India UK Free Trade Agreement को दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग के एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है। यह समझौता 24 जुलाई 2025 को हस्ताक्षरित किया गया था, जिसके तहत भारत के लगभग 99 प्रतिशत निर्यात उत्पादों को ब्रिटेन के बाजार में बिना किसी शुल्क के प्रवेश मिलेगा।
इसका सबसे ज्यादा फायदा भारतीय टेक्सटाइल, जेम्स एंड ज्वेलरी, फुटवियर और कृषि उत्पादों को होगा। ब्रिटेन का बाजार भारतीय उत्पादों के लिए पहले की तुलना में कहीं ज्यादा सुलभ हो जाएगा, जिससे निर्यात में तेजी आने की संभावना है।
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CETA के तहत व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य
इस India UK Free Trade Agreement का हिस्सा व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता (CETA) है, जिसका उद्देश्य वर्ष 2030 तक दोनों देशों के बीच व्यापार को दोगुना करना है। वर्तमान में यह व्यापार करीब 56 अरब डॉलर के आसपास है।
CETA के तहत भारत ने चॉकलेट, बिस्किट और कॉस्मेटिक्स जैसे कुछ उपभोक्ता उत्पादों के लिए अपने बाजार को आंशिक रूप से खोलने पर सहमति जताई है। इसके बदले में भारतीय उद्योगों को ब्रिटेन के बड़े बाजार में प्रतिस्पर्धा करने का अवसर मिलेगा।
ब्रिटिश व्हिस्की और कारें होंगी सस्ती
India UK Free Trade Agreement के तहत ब्रिटेन के उत्पादों पर लगने वाले आयात शुल्क में भी बड़ी कटौती की जाएगी। खासतौर पर स्कॉच व्हिस्की पर लगने वाला टैरिफ, जो अभी 150 प्रतिशत है, उसे तुरंत घटाकर 75 प्रतिशत किया जाएगा। इसके अलावा, 2035 तक इसे और कम करके 40 प्रतिशत तक लाया जाएगा। इससे भारत में ब्रिटिश व्हिस्की की कीमतों में गिरावट देखने को मिल सकती है।
ऑटोमोबाइल सेक्टर में भी बड़ा बदलाव होगा। वर्तमान में आयातित कारों पर 100 प्रतिशत से ज्यादा शुल्क लगता है, जिसे धीरे-धीरे पांच साल में घटाकर 10 प्रतिशत तक लाने की योजना है। इससे भारत में लग्जरी कारों की कीमतें भी कम हो सकती हैं।
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भारतीय ऑटो सेक्टर को भी मिलेगा फायदा
जहां एक ओर ब्रिटिश कारों को भारतीय बाजार में प्रवेश मिलेगा, वहीं दूसरी ओर भारतीय ऑटो कंपनियों को भी ब्रिटेन के बाजार में इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों के लिए अवसर मिलेगा।
India UK Free Trade Agreement के तहत एक कोटा प्रणाली बनाई जाएगी, जिससे भारतीय कंपनियां अपने आधुनिक वाहनों को UK में निर्यात कर सकेंगी। यह भारतीय ऑटो इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा अवसर साबित हो सकता है।
डबल टैक्स से राहत देने का समझौता
इस समझौते के साथ-साथ दोनों देशों ने डबल कंट्रीब्यूशन्स कन्वेंशन (DCC) पर भी सहमति जताई है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी देश में काम करने वाले अस्थायी कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा शुल्क दो बार न देना पड़े।
यह प्रावधान खासतौर पर उन पेशेवरों और कंपनियों के लिए फायदेमंद होगा जो दोनों देशों में काम करते हैं।
India UK Free Trade Agreement से रोजगार के अवसर
विशेषज्ञों का मानना है कि India UK Free Trade Agreement के लागू होने से भारत में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। खासतौर पर मैन्युफैक्चरिंग, टेक्सटाइल और एक्सपोर्ट सेक्टर में तेजी आने की संभावना है।
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छोटे और मध्यम उद्योगों (MSMEs) को भी इस समझौते से बड़ा फायदा मिलेगा, क्योंकि उन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पहुंच बढ़ाने का मौका मिलेगा।
रणनीतिक साझेदारी को मिलेगा नया आयाम
यह India UK Free Trade Agreement केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत और ब्रिटेन के बीच रणनीतिक साझेदारी को भी मजबूत करेगा। दोनों देश वैश्विक स्तर पर आर्थिक और राजनीतिक सहयोग को और गहरा करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
आर्थिक रिश्तों में ऐतिहासिक बदलाव
कुल मिलाकर, India UK Free Trade Agreement भारत और ब्रिटेन के बीच आर्थिक संबंधों में एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हो सकता है। यह समझौता न केवल व्यापार को बढ़ाएगा, बल्कि दोनों देशों के उद्योग, निवेश और रोजगार के क्षेत्र में भी नई संभावनाएं खोलेगा। मई 2026 में इसके लागू होने के साथ ही यह देखना दिलचस्प होगा कि यह समझौता दोनों अर्थव्यवस्थाओं को किस तरह नई ऊंचाइयों तक पहुंचाता है।
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