Gold Price Fall: वैश्विक तनाव के बीच आमतौर पर सोना सुरक्षित निवेश के रूप में मजबूत होता है, लेकिन इस बार तस्वीर उलट नजर आ रही है। Gold Price Fall ने निवेशकों को हैरान कर दिया है। ईरान-इजराइल संघर्ष के दौरान सोने की कीमतों में करीब 12,000 रुपये की गिरावट दर्ज की गई है, जो बाजार के सामान्य ट्रेंड के विपरीत है।
भारत में 27 फरवरी 2026 को सोना करीब 1.59 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर था, लेकिन 21 मार्च तक यह घटकर लगभग 1.47 लाख रुपये पर आ गया। यानी करीब 8 प्रतिशत की गिरावट। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी Gold Price Fall देखने को मिला, जहां कीमतें करीब 14 प्रतिशत गिरकर 4,488 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गईं।
युद्ध के समय आमतौर पर बढ़ता है सोना
इतिहास गवाह है कि युद्ध और वैश्विक अनिश्चितता के दौर में सोने की कीमतों में तेजी आती है। 1990 के गल्फ वॉर, 2003 के इराक युद्ध और 2022 के रूस-यूक्रेन संघर्ष के शुरुआती दौर में सोने ने मजबूत प्रदर्शन किया था।
ऐसे समय में निवेशक जोखिम भरे बाजारों से पैसा निकालकर सोने में निवेश करते हैं, जिससे इसकी मांग बढ़ती है। लेकिन इस बार Gold Price Fall ने इस धारणा को चुनौती दी है।
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इस बार क्यों गिरा सोना?
विशेषज्ञों के अनुसार Gold Price Fall के पीछे कई प्रमुख कारण हैं, जो इस असामान्य गिरावट को समझाते हैं।
1. मजबूत डॉलर का असर
जब अमेरिकी डॉलर मजबूत होता है, तो सोना महंगा महसूस होता है, जिससे उसकी मांग घट जाती है। हाल के दिनों में डॉलर इंडेक्स में मजबूती आई है, जिससे निवेशकों ने सोने के बजाय डॉलर में निवेश करना ज्यादा सुरक्षित समझा।
2. ब्याज वाले निवेश बने आकर्षक
बढ़ती महंगाई और तेल की कीमतों के बावजूद सेंट्रल बैंकों की नीतियों ने डॉलर को मजबूती दी। इससे बॉन्ड और अन्य ब्याज वाले निवेश ज्यादा आकर्षक बन गए, जिससे सोने की मांग कम हुई और Gold Price Fall तेज हुआ।
3. मुनाफावसूली का दबाव
2025 में सोने की कीमतों में करीब 74 प्रतिशत की तेजी आई थी। ऐसे में बड़े निवेशकों ने मुनाफा निकालना शुरू किया, जिससे बाजार में बिकवाली बढ़ी और कीमतों पर दबाव बना।
4. भारत में कमजोर मांग
भारत जैसे बड़े बाजार में भी सोने की मांग कमजोर पड़ी है। ऊंची कीमतों के कारण ग्राहकों ने खरीदारी कम कर दी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुंबई जैसे शहरों में ज्वेलरी की बिक्री में 70-75 प्रतिशत तक गिरावट आई है। इससे Gold Price Fall को और बल मिला।
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क्या 1 लाख तक गिर सकते हैं दाम?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या Gold Price Fall जारी रहेगा और क्या कीमतें 1 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक गिर सकती हैं? विशेषज्ञों की राय इस पर बंटी हुई है। कुछ का मानना है कि अगर डॉलर और मजबूत हुआ और मांग कमजोर बनी रही, तो सोने में और गिरावट संभव है। हालांकि 1 लाख तक गिरावट फिलहाल एक आक्रामक अनुमान माना जा रहा है।
दूसरी ओर, कई एक्सपर्ट्स का कहना है कि 2026 के अंत तक सोना अंतरराष्ट्रीय बाजार में 6,000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है। अगर ऐसा हुआ और रुपया कमजोर रहा, तो भारत में सोने की कीमत 2 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक भी जा सकती है। यानी Gold Price Fall का आगे का रुख पूरी तरह वैश्विक हालात, युद्ध की दिशा, तेल की कीमतों और डॉलर की चाल पर निर्भर करेगा।
चांदी में भी दिखा उतार-चढ़ाव
सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। 2025 की शुरुआत में जहां चांदी करीब 86,000 रुपये प्रति किलो थी, वहीं 2026 में यह बढ़कर 3.39 लाख तक पहुंच गई।
हालांकि अब इसमें गिरावट आई है और कीमत करीब 2.32 लाख रुपये प्रति किलो पर आ गई है। इसके बावजूद इंडस्ट्रियल डिमांड मजबूत बनी हुई है और सप्लाई सीमित है, जिससे लंबी अवधि में चांदी के लिए सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं।
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निवेशकों के लिए क्या है सलाह?
बाजार की मौजूदा स्थिति को देखते हुए विशेषज्ञ निवेशकों को घबराने से बचने की सलाह दे रहे हैं। Gold Price Fall के बावजूद लंबी अवधि में सोना और चांदी दोनों को सुरक्षित निवेश माना जाता है।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि एकमुश्त निवेश करने के बजाय धीरे-धीरे निवेश करना बेहतर रणनीति हो सकती है। इससे बाजार के उतार-चढ़ाव का जोखिम कम किया जा सकता है।
आगे क्या देखें निवेशक?
आने वाले समय में निवेशकों की नजरें कुछ अहम फैक्टर्स पर टिकी रहेंगी—ईरान-इजराइल युद्ध की स्थिति, वैश्विक तेल बाजार, अमेरिकी डॉलर की चाल और सेंट्रल बैंकों की नीतियां।
फिलहाल Gold Price Fall ने बाजार को चौंका जरूर दिया है, लेकिन यह भी साफ है कि सोने की कीमतों का भविष्य पूरी तरह वैश्विक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। लंबी अवधि में संभावनाएं अभी भी बरकरार हैं, लेकिन अल्पकाल में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
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