US Iran Conflict: वैश्विक तेल बाजार में मंगलवार को बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिला। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण पिछले कुछ दिनों से कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊपर जा रही थीं, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति के ताजा बयान के बाद बाजार का रुख अचानक बदल गया। संकेत मिले हैं कि दोनों देशों के बीच चल रहा तनाव जल्द कम हो सकता है। इसी उम्मीद ने तेल बाजार को राहत दी और कीमतों में एक दिन के भीतर तेज गिरावट दर्ज की गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति और US Iran Conflict की आशंका का असर सीधे ऊर्जा बाजार पर पड़ता है। जब भी खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ती है तो तेल की सप्लाई को लेकर चिंताएं बढ़ जाती हैं और कीमतें तेजी से ऊपर चली जाती हैं। लेकिन जैसे ही हालात सामान्य होने के संकेत मिलते हैं, बाजार तुरंत प्रतिक्रिया देता है और कीमतें नीचे आने लगती हैं।
बयान के बाद बाजार में आया बड़ा बदलाव
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान संकेत दिया कि अमेरिका और Iran के बीच चल रहा तनाव लंबे समय तक नहीं रहेगा और जल्द ही इसे खत्म करने की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं। हालांकि उन्होंने इसके लिए कोई निश्चित समय सीमा नहीं बताई, लेकिन उनके इस बयान ने वैश्विक बाजार में सकारात्मक संकेत दिए।
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उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका तेल से जुड़े कुछ प्रतिबंधों में ढील देने पर विचार कर सकता है। साथ ही अमेरिकी नौसेना के जरिए तेल टैंकरों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने की योजना पर भी काम किया जा रहा है। यह व्यवस्था खासतौर पर उस समुद्री मार्ग के लिए अहम है, जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल का आयात करता है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की अहमियत
मध्य-पूर्व का रणनीतिक समुद्री मार्ग Strait of Hormuz वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल आपूर्ति इसी रास्ते से होकर गुजरती है।
पिछले कुछ समय से क्षेत्र में तनाव के कारण इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई थी। यदि यहां किसी तरह की रुकावट आती है तो इसका असर पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है। यही वजह है कि बाजार इस क्षेत्र की हर राजनीतिक और सैन्य गतिविधि पर बारीकी से नजर रखता है।
कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट
US Iran Conflict कम होने की उम्मीद के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में Crude Oil Price में बड़ी गिरावट देखने को मिली। वैश्विक बेंचमार्क Brent Crude की कीमत अपने दिन के उच्च स्तर से 20 डॉलर प्रति बैरल से अधिक गिरकर करीब 88.5 डॉलर प्रति बैरल तक आ गई।
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एक दिन पहले यह कीमत लगभग 119.5 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, जो हाल के समय का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा था। इसी तरह अमेरिकी बेंचमार्क West Texas Intermediate यानी डब्ल्यूटीआई क्रूड के फ्यूचर्स भी करीब 10 प्रतिशत गिरकर 85 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गए। सोमवार को यह 115 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चला गया था।
एक दिन में ऐतिहासिक उतार-चढ़ाव
Crude Oil Price में इस तरह की गिरावट को हाल के वर्षों की सबसे बड़ी दैनिक गिरावटों में से एक माना जा रहा है। रिकॉर्ड ऊंचाई से बंद कीमत तक का यह अंतर असाधारण बताया जा रहा है।
विश्लेषकों के अनुसार मंगलवार सुबह तक कीमतों में और गिरावट देखने को मिली और कई समय के लिए यह 90 डॉलर प्रति बैरल के नीचे भी चली गई। कुल मिलाकर एक ही दिन में करीब 38 डॉलर का उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया, जो ऊर्जा बाजार के लिए असामान्य माना जाता है।
इससे पहले इतना बड़ा उतार-चढ़ाव वर्ष 2020 में देखा गया था, जब COVID-19 महामारी के दौरान वैश्विक मांग अचानक गिर गई थी। उस समय कुछ समय के लिए Crude Oil Price नकारात्मक स्तर तक भी पहुंच गई थीं, जो ऊर्जा बाजार के इतिहास की अनोखी घटना थी।
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खाड़ी देशों पर भी पड़ा असर
US Iran Conflict का असर खाड़ी क्षेत्र के प्रमुख तेल उत्पादक देशों पर भी पड़ा है। क्षेत्र में अस्थिरता के कारण तेल के भंडारण और निर्यात से जुड़ी चुनौतियां सामने आई हैं।
विशेष रूप से Saudi Arabia जैसे बड़े उत्पादक देशों को उत्पादन और निर्यात की रणनीति में बदलाव करना पड़ा है। कई रिपोर्टों के अनुसार भंडारण क्षमता और सुरक्षा चिंताओं के कारण उत्पादन में अस्थायी कमी भी देखी गई है।
आगे क्या रहेगा रुख
ऊर्जा बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में Crude Oil Price का रुख पूरी तरह से मध्य-पूर्व की राजनीतिक स्थिति पर निर्भर करेगा। यदि तनाव कम होता है और तेल टैंकरों की आवाजाही सामान्य रहती है तो कीमतों में स्थिरता आ सकती है।
हालांकि अगर स्थिति फिर से बिगड़ती है या आपूर्ति में बाधा आती है तो कीमतों में दोबारा तेज उछाल भी देखा जा सकता है। फिलहाल निवेशक और ऊर्जा कंपनियां क्षेत्र की हर गतिविधि पर नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए तेल की कीमतें अभी भी बेहद महत्वपूर्ण कारक बनी हुई हैं।
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