Budget 2026: Budget 2026 की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है और 1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लोकसभा में आम बजट पेश करेंगी। बजट से पहले देश का रियल एस्टेट सेक्टर सरकार से बड़े फैसलों की उम्मीद लगाए बैठा है। खास तौर पर अफोर्डेबल हाउसिंग को लेकर टैक्स राहत, होम लोन से जुड़े प्रावधानों में बदलाव और नीतिगत समर्थन की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। उद्योग से जुड़े जानकारों का मानना है कि अगर बजट में इस सेक्टर को लेकर सकारात्मक संकेत मिलते हैं, तो इससे न सिर्फ रियल एस्टेट को गति मिलेगी, बल्कि अर्थव्यवस्था पर भी इसका व्यापक असर पड़ेगा।
कंज्यूमर सेंटिमेंट मजबूत करने की जरूरत
रियल एस्टेट एक्सपर्ट्स के अनुसार, मौजूदा समय में सबसे जरूरी है कि उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ाया जाए। बढ़ती महंगाई और रोजमर्रा के खर्चों के बीच लोग बड़े निवेश से पहले सोच-विचार कर रहे हैं। ऐसे में अगर सरकार टैक्स स्लैब में राहत या अन्य वित्तीय उपायों के जरिए लोगों की डिस्पोजेबल इनकम बढ़ाती है, तो इसका सीधा फायदा प्रॉपर्टी सेक्टर को मिल सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब लोगों के पास खर्च करने के लिए अतिरिक्त पैसा होता है, तब घर खरीदने जैसे फैसले लेने में झिझक कम होती है।
होम लोन पर टैक्स छूट बढ़ाने की मांग
रियल एस्टेट इंडस्ट्री की प्रमुख मांगों में होम लोन के ब्याज पर मिलने वाली टैक्स छूट की सीमा बढ़ाना शामिल है। वर्तमान में यह सीमा कई खरीदारों के लिए पर्याप्त नहीं मानी जा रही है, खासकर मेट्रो और बड़े शहरों में, जहां प्रॉपर्टी की कीमतें काफी अधिक हैं। इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का मानना है कि अगर होम लोन ब्याज पर टैक्स छूट बढ़ाई जाती है, तो इससे मिडिल क्लास और पहली बार घर खरीदने वालों को बड़ा सहारा मिलेगा। इससे मांग में बढ़ोतरी होगी और नए प्रोजेक्ट्स को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क पर राहत की उम्मीद
इसके अलावा स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन चार्ज को लेकर भी बजट से उम्मीदें हैं। कई राज्यों में ये शुल्क अभी भी काफी ऊंचे हैं, जिससे घर खरीदने की कुल लागत बढ़ जाती है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि अगर केंद्र सरकार इस दिशा में राज्यों के साथ मिलकर कोई नीति बनाती है, तो इससे रियल एस्टेट ट्रांजैक्शन को बढ़ावा मिल सकता है। कम लागत पर रजिस्ट्रेशन होने से अधिक लोग प्रॉपर्टी खरीदने के लिए आगे आ सकते हैं।
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अफोर्डेबल हाउसिंग पर फिर से फोकस की मांग
अफोर्डेबल हाउसिंग को लेकर डेवलपर्स और इंडस्ट्री लीडर्स खासे उत्साहित हैं। उनका कहना है कि बीते कुछ वर्षों में इस सेगमेंट ने लाखों लोगों के घर का सपना पूरा करने में अहम भूमिका निभाई है। हालांकि टैक्स इंसेंटिव खत्म होने के बाद कई डेवलपर्स का झुकाव इस सेगमेंट से कम हुआ है। ऐसे में Budget 2026 में अगर सरकार अफोर्डेबल हाउसिंग के लिए विशेष प्रोत्साहन की घोषणा करती है, तो इससे नए प्रोजेक्ट्स शुरू हो सकते हैं और शहरी व अर्ध-शहरी इलाकों में किफायती घरों की उपलब्धता बढ़ सकती है।
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सेक्शन 80-IBA की वापसी की सबसे बड़ी मांग
रियल एस्टेट सेक्टर की सबसे अहम मांग इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के सेक्शन 80-IBA को दोबारा लागू करने की है। इस प्रावधान के तहत अफोर्डेबल हाउसिंग प्रोजेक्ट्स पर डेवलपर्स को 100 प्रतिशत टैक्स छूट मिलती थी। यह इंसेंटिव वर्ष 2021 में समाप्त हो गया था, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इसके चलते किफायती आवास परियोजनाओं में तेजी आई थी। इंडस्ट्री का तर्क है कि अगर सरकार सीमित अवधि के लिए ही सही, लेकिन इस प्रावधान को फिर से लागू करती है, तो इससे निवेश का माहौल बेहतर होगा।
बजट से सेक्टर को नई दिशा की उम्मीद
एनारॉक के चेयरमैन अनुज पुरी सहित कई इंडस्ट्री विशेषज्ञों का मानना है कि अफोर्डेबल हाउसिंग को बढ़ावा देने के लिए 80-IBA जैसे प्रावधान बेहद प्रभावी साबित हो सकते हैं। उनका कहना है कि इससे डेवलपर्स का भरोसा बढ़ेगा और आम लोगों के लिए घर खरीदना अपेक्षाकृत आसान होगा। अब सबकी निगाहें 1 फरवरी पर टिकी हैं, जब यह साफ होगा कि Budget 2026 रियल एस्टेट सेक्टर की उम्मीदों पर कितना खरा उतरता है।



