Anita Guha Biography: हिंदी सिनेमा में कुछ ऐसे चेहरे होते हैं, जो पर्दे पर देवी का रूप लेकर सीधे लोगों के दिलों में उतर जाते हैं। ऐसी ही एक अदाकारा थीं अनीता गुहा, जिन्होंने अपनी पौराणिक और धार्मिक फिल्मों की भूमिकाओं से 70 के दशक में धमाल मचा दिया। उनकी फिल्म संतोषी मां ने रिलीज़ के समय शोले जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्म को भी कड़ी टक्कर दी।
हालांकि उनकी निजी जिंदगी काफी दर्दनाक रही। पति की मौत और संतान न होने का दुख उन्हें हमेशा तड़पाता रहा। इसके बावजूद, अनीता गुहा ने फिल्मों में देवी की छवि को जीवंत रखा और लोगों के बीच अपनी पहचान बनाई।
Anita Guha Biography- बचपन और करियर की शुरुआत
अनीता गुहा का जन्म 17 जनवरी 1939 को बंगाल में हुआ। उनका बचपन पूर्वोत्तर के राज्यों में बीता। विभाजन के बाद परिवार कोलकाता आ गया। 15 साल की उम्र में अनीता ने मॉडलिंग और कॉम्पटीशन में जीत हासिल की। हिंदी न आने के बावजूद उन्होंने मेहनत करके हिंदी सीख ली और कोलकाता की बांग्ला फिल्म बांशेर केल्ला (1953) से शुरुआत की। 1955 में फिल्म तांगा वाली से उन्होंने हिंदी सिनेमा में डेब्यू किया। शुरुआती दौर में उन्हें बी-ग्रेड फिल्मों में काम करना पड़ा, लेकिन धीरे-धीरे उन्हें पौराणिक और धार्मिक फिल्मों में अवसर मिलने लगे।
पर्दे पर सीता और संतोषी मां का निभाया रोल
1957 में पवनपुत्र हनुमान में सीता का किरदार निभाने के बाद अनीता की लोकप्रियता बढ़ी। उन्होंने संपूर्ण रामायण, श्री राम भरत मिलाप जैसी फिल्मों में भी काम किया। साल 1975 में अनीता गुहा ने संतोषी मां में काम किया। उन्होंने पूरे दिन उपवास रखकर शूटिंग की। फिल्म के रिलीज़ होने पर दर्शक थिएटर में अपनी चप्पल उतारकर अंदर जाते, सिक्कों की बारिश करते और कई जगह अगरबत्तियां भी जलाते। लोग उन्हें सच में देवी मानकर पूजने लगे। फिल्म के गाने “मैं तो आरती उतारूं रे” पर महिलाएं आरती करतीं और लोग माथा टेकते।

Anita Guha Biography-निजी जिंदगी का दर्द
अनीता गुहा की निजी जिंदगी दुखद रही। उन्हें ल्यूकोडर्मा नामक बीमारी थी, जिससे चेहरे पर दाग थे। 1961 में उन्होंने माणिक दत्त से शादी की, लेकिन कुछ साल बाद उनके पति का निधन हो गया। उन्होंने कभी संतान नहीं पाई और ताउम्र अकेली रहीं। अनीता ने अंतिम संस्कार के लिए चाहा कि उनका पूरा मेकअप किया जाए, ताकि उनके चेहरे के दाग-धब्बे नजर न आएं। उनका निधन 2007 में हुआ।
Anita Guha Biography-फिल्मों और यादों में अमर
अनीता गुहा हिंदी सिनेमा की उन अदाकाराओं में से थीं, जिन्होंने पर्दे पर देवी का रूप लेकर लोगों के दिलों में अपनी अमिट छाप छोड़ी। संतोषी मां जैसी फिल्मों ने उन्हें सच्ची श्रद्धा और पहचान दिलाई।



