Pappu Yadav Arrest Case: बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव को 31 साल पुराने विवादित संपत्ति मामले में पटना पुलिस ने शुक्रवार (6 फरवरी) की देर रात उनके आवास से गिरफ्तार (Pappu Yadav Arrest Case) कर लिया। गिरफ्तारी के कुछ ही घंटों बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई, जिसके चलते उन्हें पहले IGIMS और फिर PMCH में भर्ती कराया गया। अब सबसे बड़ा सवाल यही है क्या पप्पू यादव जेल जाएंगे या उन्हें कानूनी राहत मिल सकती है?
MP/MLA कोर्ट का बड़ा आदेश, जेल नहीं भेजे गए पप्पू यादव
शनिवार (7 फरवरी) को पप्पू यादव को MP/MLA विशेष अदालत में पेश किया गया। सुनवाई के बाद कोर्ट ने उन्हें जेल भेजने के बजाय न्यायिक हिरासत (Pappu Yadav Arrest Case) में रखते हुए सोमवार (9 फरवरी) तक PMCH में ही रखने का आदेश दिया। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जमानत पर फैसला सोमवार को होगा, जब दोनों पक्षों अभियोजन और बचाव की दलीलें सुनी जाएंगी। फिलहाल उनकी हिरासत को मेडिकल कारणों से अस्पताल तक सीमित रखा गया है।

क्या है 31 साल पुराना विवादित मामला?
यह मामला साल 1995 का है। आरोप है कि पप्पू यादव ने एक मकान को निजी उपयोग के लिए किराए पर लिया था, लेकिन बाद में उसे राजनीतिक कार्यालय के तौर पर इस्तेमाल किया और कथित रूप से उस पर कब्जा कर लिया। मामले में धोखाधड़ी, संपत्ति पर अवैध कब्जा और अनुबंध उल्लंघन जैसे आरोप लगाए गए थे। केस MP/MLA कोर्ट में विचाराधीन था, लेकिन लंबे समय तक पेशी में अनुपस्थिति के कारण अदालत ने गिरफ्तारी वारंट (Pappu Yadav Arrest Case) जारी किया था।
गिरफ्तारी के बाद अचानक बिगड़ी सेहत
गिरफ्तारी के तुरंत बाद पप्पू यादव की तबीयत खराब (Pappu Yadav Arrest Case) होने लगी। उन्हें पहले इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) लाया गया, जहां प्राथमिक जांच हुई। स्थिति स्थिर न होने पर डॉक्टरों की सलाह पर उन्हें पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) रेफर किया गया। डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, उनकी हालत फिलहाल स्थिर है लेकिन निगरानी जरूरी है।
जेल नहीं, अस्पताल में क्यों रखे गए?
पुलिस और प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, पप्पू यादव को जेल भेजने के बजाय अस्पताल में रखने का फैसला मानवीय और चिकित्सीय आधार पर लिया गया है। कोर्ट ने भी माना कि मौजूदा स्थिति में उनकी स्वास्थ्य सुरक्षा प्राथमिक है। इसी वजह से उन्हें न्यायिक हिरासत में रखते हुए भी PMCH में रहने की अनुमति दी गई है।
राजनीति भी गरमाई, समर्थकों में नाराज़गी
गिरफ्तारी के बाद पप्पू यादव के समर्थकों में नाराज़गी देखी गई। उनका आरोप है कि यह कार्रवाई राजनीतिक बदले की भावना से की गई है। वहीं, प्रशासन का कहना है कि यह पूरी तरह कोर्ट के आदेश के तहत की गई कानूनी कार्रवाई है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि मामला पुराना होने के बावजूद मौजूदा समय में इसकी टाइमिंग कई सवाल खड़े कर रही है।
आगे क्या? सोमवार की सुनवाई अहम
- अब सभी की निगाहें सोमवार (9 फरवरी) पर टिकी हैं, जब कोर्ट में जमानत याचिका पर सुनवाई होगी।
- अगर जमानत मिलती है, तो पप्पू यादव को बड़ी राहत मिल सकती है।
- अगर नहीं, तो आगे की कानूनी प्रक्रिया और हिरासत का फैसला होगा।
- फिलहाल वे न जेल में हैं और न ही पूरी तरह स्वतंत्र, बल्कि अस्पताल में न्यायिक निगरानी में हैं।
कानून, राजनीति और स्वास्थ्य तीनों का संगम
पप्पू यादव का मामला सिर्फ एक कानूनी विवाद नहीं, बल्कि इसमें राजनीति, स्वास्थ्य और न्यायिक प्रक्रिया तीनों जुड़े हुए हैं। सोमवार की सुनवाई तय करेगी कि यह मामला किस दिशा में आगे बढ़ता है।
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