Bihar Rajya Sabha Election: बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए होने वाले आगामी मतदान ने प्रदेश की सियासी तपिश को चरम पर पहुंचा दिया है। सोमवार, 16 मार्च को होने वाली वोटिंग से ठीक पहले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। शनिवार को पटना के सियासी गलियारों में बैठकों का दौर जारी रहा, जहां बीजेपी कोर कमेटी से लेकर लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के दफ्तर तक रणनीतियों को अंतिम रूप दिया गया। एनडीए का मुख्य फोकस उस पांचवीं सीट पर है, जहां जीत के लिए आंकड़ों का सटीक प्रबंधन अनिवार्य है।
सियासी बिसात पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए शनिवार शाम राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के आवास पर एनडीए विधायकों का जमावड़ा लगा। इस रणनीतिक बैठक को ‘भोज’ का नाम दिया गया, लेकिन इसका असली मकसद वोटिंग से पहले गठबंधन की एकजुटता को प्रदर्शित करना और निर्दलीय व अन्य विधायकों को साधने की रणनीति बनाना था। एनडीए के दिग्गज नेताओं का दावा है कि उनके पास पांचों सीटें जीतने के लिए पर्याप्त जादुई आंकड़ा मौजूद है, जबकि विपक्षी खेमा भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए गणित बिठाने में जुटा है। (Bihar Rajya Sabha Election)
लोजपा (रामविलास) कार्यालय में मंथन और केंद्रीय पर्यवेक्षकों की मौजूदगी
लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रदेश कार्यालय में आयोजित विधायक दल की बैठक में चुनावी बारीकियों पर चर्चा हुई। इस बैठक की महत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें एनडीए के केंद्रीय पर्यवेक्षक और केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा के साथ छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा भी मौजूद रहे। बैठक में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी और राष्ट्रीय महामंत्री ऋतुराज सिन्हा ने भी शिरकत की। लोजपा के प्रदेश अध्यक्ष राजू तिवारी और अशरफ अंसारी की मौजूदगी में विधायकों को मतदान की प्रक्रिया और एकजुट रहने के कड़े निर्देश दिए गए। (Bihar Rajya Sabha Election)
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उपेंद्र कुशवाहा के आवास पर ‘चुनावी भोज’ और जीत का दावा
उपेंद्र कुशवाहा के आवास पर आयोजित एनडीए विधानमंडल दल की बैठक में जदयू और बीजेपी के बड़े चेहरे शामिल हुए। जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने आत्मविश्वास के साथ कहा, ‘उपेंद्र कुशवाहा के यहां विधानमंडल की बैठक हुई है। 16 मार्च को चुनाव होने वाला है। पांचों सीट एनडीए जीतेगी, चार तो तय हैं और पांचवीं भी हम बड़े अंतर से जीत रहे हैं।’ वहीं, बीजेपी विधायक सुनील कुमार पिंटू ने इस भोज को ‘जीत की पार्टी’ करार देते हुए स्पष्ट किया कि एनडीए के खेमे में कोई संशय नहीं है। (Bihar Rajya Sabha Election)

आंकड़ों का खेल: क्यों फंसी है पांचवीं सीट?
बिहार विधानसभा की वर्तमान स्थिति के अनुसार, कुल 243 सदस्य हैं। राज्यसभा की एक सीट पर जीत सुनिश्चित करने के लिए 41 विधायकों के प्रथम वरीयता के वोट की आवश्यकता है। NDA की स्थिति: एनडीए के पास वर्तमान में 202 विधायक हैं। इस आंकड़े के हिसाब से चार सीटें (41 x 4 = 164) सुरक्षित हैं। चार सीटें जीतने के बाद एनडीए के पास 38 अतिरिक्त वोट बचते हैं, जो पांचवीं सीट के लिए जरूरी 41 के आंकड़े से महज 3 कम हैं। महाठबंधन की स्थिति: विपक्षी खेमे (राजद व अन्य) के पास कुल 35 विधायक हैं। उन्हें अपनी एकमात्र सीट बचाने या एनडीए को चुनौती देने के लिए अतिरिक्त समर्थन की दरकार है। यही 3 से 6 वोटों का फासला है जिसने इस चुनाव को ‘जोड़-तोड़’ और ‘रणनीतिक घेराबंदी’ के केंद्र में ला खड़ा किया है। (Bihar Rajya Sabha Election)
मतदान की तैयारी और राजनीतिक मायने
16 मार्च को होने वाला यह मतदान बिहार की भविष्य की राजनीति की दिशा भी तय करेगा। एनडीए जहां अपनी पांचों सीटों को जीतकर विपक्षी खेमे में सेंधमारी का संदेश देना चाहता है, वहीं महागठबंधन की कोशिश अपनी साख बचाने की है। शनिवार की बैठकों ने यह साफ कर दिया है कि एनडीए किसी भी तरह के ‘क्रॉस वोटिंग’ के खतरे को टालने के लिए अपने हर एक विधायक की मॉनिटरिंग कर रहा है। (Bihar Rajya Sabha Election)



