पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट नए जज को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने नौ वकीलों को हाईकोर्ट में जज के रूप में नियुक्त करने की मंजूरी दे दी है। राष्ट्रपति भवन की ओर से इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना भी जारी कर दी गई है। अदालत में जजों की खाली पड़ी कुर्सियों को भरने और लंबित मामलों के निपटारे में तेजी लाने के मकसद से यह कदम उठाया गया है।
कॉलेजियम की सिफारिश पर लगी मुहर
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने पहले कुल दस वकीलों के नामों की सिफारिश की थी, जिन पर शीर्ष स्तर पर गहन विचार-विमर्श किया गया था। इसके बाद केंद्र सरकार ने इनमें से नौ नामों को मंजूरी प्रदान कर दी। पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट नए जज की इस नियुक्ति प्रक्रिया के पूरा होने के साथ ही अब इन सभी योग्य वकीलों के जज बनने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।
नियुक्त होने वाले वकीलों में कई जाने-पहचाने नाम
केंद्र सरकार द्वारा मंजूर की गई सूची में कई प्रतिष्ठित नाम शामिल हैं। इनमें मोनिका छिब्बर शर्मा, हरमीत सिंह देओल और प्रविंदर सिंह चौहान का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। बताया जा रहा है कि प्रविंदर सिंह चौहान वर्तमान में हरियाणा के महाधिवक्ता का पद संभाल रहे हैं। इनके अलावा राजेश गौर, पूजा चोपड़ा, सुनीश बिंदल और मिंदरजीत यादव को भी इस सूची में जगह मिली है। साथ ही दिव्या शर्मा और रविंदर मलिक को भी हाईकोर्ट का नया जज नियुक्त किया गया है।
जजों की संख्या बढ़कर हुई 55, फिर भी 30 पद रिक्त
इन नौ वकीलों की एक साथ नियुक्ति के बाद पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में जजों की कुल संख्या बढ़कर 55 हो गई है। हालांकि इस अदालत में जजों के कुल स्वीकृत पदों की संख्या 85 है, जिसके चलते अभी भी करीब 30 पद खाली हैं। पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट नए जज की इस नियुक्ति के बावजूद रिक्त पदों की बड़ी संख्या यह दर्शाती है कि अदालत में जजों की कमी अभी भी बनी हुई है।
भविष्य में और नियुक्तियों की उम्मीद
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत में खाली पड़े शेष पदों को भरने के लिए आने वाले समय में और नियुक्तियां हो सकती हैं। नए जजों की तैनाती से हाईकोर्ट में लंबित मुकदमों के निपटारे की रफ्तार बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे वादियों को समय पर न्याय मिलने में मदद मिलेगी।
केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से इस नियुक्ति की आधिकारिक जानकारी साझा की है, जिसमें राष्ट्रपति द्वारा भारत के संविधान में प्रदत्त शक्तियों के तहत और भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद इन वकीलों को अपर न्यायाधीश नियुक्त किए जाने का उल्लेख किया गया है।


