Melody Gifting Video:भारतीय कूटनीति और सोशल मीडिया के इतिहास में आज एक बेहद दिलचस्प और मजेदार वाकया दर्ज हो गया है। इटली के आधिकारिक दौरे पर गए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने वहां की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी (Giorgia Meloni) को एक ऐसा अनोखा तोहफा दिया, जिसने इंटरनेट पर मीम्स और पुरानी यादों का सैलाब ला दिया है। पीएम मोदी ने इटली पहुंचने पर बुधवार को पीएम जॉर्जिया मेलोनी को भारत की मशहूर ‘मेलोडी’ (Melody) टॉफी का एक पैकेट उपहार में दिया। इस खूबसूरत और मजाकिया पल का एक वीडियो खुद इतालवी प्रधानमंत्री मेलोनी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर शेयर किया है, जिसके बाद से दोनों देशों के फैंस के बीच “मेलोडी” शब्द को लेकर नई दीवानगी देखी जा रही है।
इस हाई-प्रोफाइल मुलाकात के बाद भारत में 90 के दशक की वो सबसे मशहूर विज्ञापन लाइन एक बार फिर रातों-रात ट्रेंड करने लगी है, जिसने कभी हर भारतीय बच्चे के जेहन पर राज किया था। वो कालजयी लाइन है ‘मेलोडी खाओ खुद जान जाओ’। पीएम मोदी के इस अनूठे गिफ्ट डिप्लोमेसी के कारण जहां एक तरफ पारले (Parle) कंपनी के शेयर बाजार में जबरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है, वहीं दूसरी तरफ गूगल पर लोग लगातार यह सर्च कर रहे हैं कि आखिर विज्ञापन जगत के इतिहास को बदलने वाली ये जादुई लाइनें कब और किसने लिखी थीं। आइए आपको फ्लैशबैक में ले चलते हैं और बताते हैं इस चॉकलेटी जिंगल के बनने की पूरी इनसाइड स्टोरी। (Melody Gifting Video)
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पीएम मोदी के ‘मेलोडी डिप्लोमेसी’
सोशल मीडिया पर जैसे ही जॉर्जिया मेलोनी और पीएम मोदी का यह वीडियो वायरल हुआ, भारतीय बाजार में इसके निर्माता पारले प्रोडक्ट्स (Parle Products) के नाम की धूम मच गई। मेलोडी टॉफी का पैकेट मेलोनी के हाथ में दिखने के बाद निवेशकों में ऐसा उत्साह जागा कि पारले नाम वाले लिस्टेड शेयरों में देखते ही देखते 5 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह पहली बार है जब किसी साधारण सी दिखने वाली टॉफी ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर इतनी बड़ी ब्रांडिंग हासिल की है और भारतीय व्यापार जगत को इसका सीधा फायदा मिला है। (Melody Gifting Video)
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90 के दशक का वो दौर
मेलोडी टॉफी की बाजार में एंट्री 90 के दशक में हुई थी। उस दौर में भारतीय कन्फेक्शनरी मार्केट में बच्चों के लिए खासतौर पर मैंगो, ऑरेंज और पाइनएप्पल जैसे फ्रूट फ्लेवर वाली हार्ड कैंडियों का एकछत्र दबदबा था। इस कड़े मुकाबले और ट्रेंड को तोड़ने के लिए पारले (Melody Gifting Video) ने एक मास्टरस्ट्रोक खेला और मेलोडी को एक प्रीमियम चॉकलेट टॉफी के तौर पर देश के सामने पेश किया। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका डबल लेयर डिजाइन था बाहर से चबाने योग्य कैरमल और अंदर पिघली हुई गाढ़ी चॉकलेट। इस अनोखे स्वाद ने बच्चों और बड़ों, दोनों को अपना दीवाना बना लिया। (Melody Gifting Video)
मार्केटिंग एजेंसी ‘एवरेस्ट’ और हरेश मूरजानी का वो क्रांतिकारी आइडिया
स्वाद तो फाइनल हो चुका था, लेकिन चुनौती थी इसकी ब्रांडिंग और विजुअल पहचान की। पारले ने इसकी पूरी जिम्मेदारी उस दौर की दिग्गज मार्केटिंग एजेंसी ‘एवरेस्ट’ (Everest Advertising) को सौंपी। क्रिएटिव टीम के सामने सबसे बड़ा टास्क यह था कि इसे एक सामान्य टॉफी के बजाय एक रिच चॉकलेट प्रोडक्ट के रूप में कैसे स्थापित किया जाए जो बच्चों को सीधे आकर्षित करे। इस कैम्पेन की क्रिएटिव टीम का नेतृत्व हरेश मूरजानी (Haresh Moorjani) कर रहे थे, और मंथन के दौरान उन्हें एक शानदार विचार आया। वो विचार यह था कि विज्ञापन में बच्चों के चहेते या उनके जैसा बनने की इच्छा रखने वाले किरदारों को दिखाया जाए, जो मेलोडी के बारे में एक गहरा प्रश्न पूछें और एक छोटा बच्चा उसका आत्मविश्वास से उत्तर दे। (Melody Gifting Video)
कॉपीराइटर सुलेखा बाजपेयी ने लिखी थी इतिहास रचने वाली पंक्तियां
इस अनूठे आइडिया को शब्दों में पिरोने का काम टीम की टैलेंटेड कॉपीराइटर सुलेखा बाजपेयी (Sulekha Bajpai) को दिया गया। सुलेखा ने मेलोडी के स्वाद की गहराई को समझते हुए बेहद आसान, कैची और सीधे दिल में उतर जाने वाली पंक्तियां लिखीं। उन्होंने जिंगल तैयार किया “मेलोडी खाओ, खुद जान जाओ”। जब यह ड्राफ्ट पारले कंपनी के मैनेजमेंट के सामने रखा गया, तो उन्हें यह पहली बार में ही बेहद पसंद आ गया क्योंकि यह लाइन सीधे उपभोक्ता को खुद स्वाद चखकर फैसला करने की चुनौती देती थी। (Melody Gifting Video)
कैसे शूट हुआ था ‘मेलोडी इतनी चॉकलेटी क्यों है?’
सुलेखा बाजपेयी द्वारा जिंगल की पंक्तियां लिखे जाने के बाद अगली बड़ी चुनौती इसके फिल्मांकन (Direction) की थी। मेलोडी को साधारण श्रेणी से अलग दिखाने के लिए हर विज्ञापन की शुरुआत एक सस्पेंसिव सवाल से की जाती थी (Melody Gifting Video) ‘मेलोडी इतनी चॉकलेटी क्यों है?’ विज्ञापन में स्कूल, खेल के मैदान या घर जैसी अलग-अलग लोकेशनों में जब बड़े लोग या दोस्त यह सवाल पूछते, तो हर बार एक बच्चा मुस्कुराते हुए जवाब देता ‘मेलोडी खाओ खुद जान जाओ’ और बैकग्राउंड में बजने वाली अंतिम सिग्नेचर ट्यून ‘मेलोडी है चॉकलेटी, मेलोडी है चॉकलेटी” ने इसे भारतीय टेलीविजन के इतिहास का सबसे सफल और अमर विज्ञापन बना दिया, जिसकी गूंज आज इटली के पीएम हाउस तक सुनाई दे रही है। (Melody Gifting Video)
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