Gold Import Duty: केंद्र सरकार ने सोने, चांदी और अन्य कीमती धातुओं पर लगने वाली Gold Import Duty में बड़ा बदलाव करते हुए आयात शुल्क बढ़ा दिया है। वित्त मंत्रालय की ओर से जारी नई अधिसूचना के मुताबिक नई दरें 13 मई से लागू हो गई हैं। इस फैसले के बाद अब विदेशों से सोना, चांदी और प्लेटिनम मंगाना पहले की तुलना में ज्यादा महंगा हो जाएगा। इसका असर केवल ज्वेलरी कारोबार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आम ग्राहकों और इंडस्ट्री दोनों पर देखने को मिलेगा।
सरकार के इस कदम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अपील से भी जोड़कर देखा जा रहा है। पीएम मोदी ने देशवासियों से एक साल तक सोने की खरीदारी टालने और ईंधन की खपत कम करने की अपील की थी। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में संभावित उछाल के बीच सरकार आर्थिक दबाव को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है।
अब कितना बढ़ गया Gold Import Duty?
नई व्यवस्था के तहत सरकार ने गोल्ड पर बेसिक कस्टम ड्यूटी (BCD) को 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत कर दिया है। इसके अलावा एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस (AIDC) में भी बढ़ोतरी की गई है। इससे पहले सोने पर कुल 6 प्रतिशत टैक्स लगता था, जिसमें 5 प्रतिशत BCD और 1 प्रतिशत सेस शामिल था।
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अब बढ़ी हुई Gold Import Duty लागू होने के बाद विदेशों से आयात होने वाला सोना ज्यादा महंगा पड़ेगा। यही कारण है कि आने वाले दिनों में घरेलू बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि नई दरें केवल सोने की ईंटों और बिस्कुटों पर ही लागू नहीं होंगी, बल्कि ज्वेलरी निर्माण में इस्तेमाल होने वाले छोटे पार्ट्स जैसे हुक, पिन और स्क्रू पर भी लागू होंगी। इसके अलावा रिसाइक्लिंग के लिए आने वाले धातु कचरे पर भी 10 प्रतिशत टैक्स लगाया जाएगा।
Budget 2024 में घटाई गई थी ड्यूटी
गौरतलब है कि जुलाई 2024 के केंद्रीय बजट में सरकार ने सोने पर कुल कस्टम ड्यूटी 15 प्रतिशत से घटाकर 6 प्रतिशत कर दी थी। उस समय सरकार ने बेसिक कस्टम ड्यूटी 10 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत और AIDC 5 प्रतिशत से घटाकर 1 प्रतिशत कर दिया था।
उस फैसले के बाद भारत में सोने के आयात में तेजी देखने को मिली। कारोबारियों ने बड़े पैमाने पर सोना आयात किया, जिससे देश का आयात बिल काफी बढ़ गया। अब सरकार ने बढ़ते आयात और विदेशी मुद्रा पर पड़ रहे दबाव को देखते हुए दोबारा Gold Import Duty बढ़ाने का फैसला लिया है।
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UAE से आने वाले सोने पर भी असर
नई अधिसूचना के तहत संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE से कोटा व्यवस्था के तहत आने वाले सोने पर भी रियायती दरों में बदलाव किया गया है। पहले निर्धारित कोटा के तहत आयातित सोने पर कम शुल्क देना पड़ता था, लेकिन अब उस पर भी ज्यादा टैक्स लागू होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे दुबई और अन्य खाड़ी देशों से होने वाले गोल्ड ट्रेड पर असर पड़ सकता है। भारत में बड़ी मात्रा में सोना UAE से आयात किया जाता है, इसलिए इस बदलाव का सीधा प्रभाव घरेलू बाजार पर भी पड़ेगा।
आम आदमी और ज्वेलरी इंडस्ट्री पर क्या होगा असर?
Gold Import Duty बढ़ने के बाद सबसे बड़ा असर सर्राफा बाजार और ज्वेलरी कारोबार पर पड़ने वाला है। आयात महंगा होने से ज्वेलर्स की लागत बढ़ जाएगी, जिसका बोझ आखिरकार ग्राहकों पर डाला जा सकता है।
यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें स्थिर भी रहती हैं, तब भी भारत में सोना और चांदी महंगे हो सकते हैं। शादी-विवाह के सीजन और त्योहारों के दौरान इसका असर ज्यादा महसूस किया जा सकता है।
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इसके अलावा जिन उद्योगों में कीमती धातुओं का इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक्स, मेडिकल उपकरण या रिसाइक्लिंग के लिए होता है, उनकी उत्पादन लागत भी बढ़ सकती है। इससे कई कंपनियों के लिए संचालन खर्च बढ़ने की संभावना है।
भारत दुनिया का बड़ा Gold Consumer
भारत दुनिया में सोने का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता माना जाता है, जबकि चांदी की खपत में भारत शीर्ष देशों में शामिल है। ऐसे में सरकार सोने के आयात पर लगातार नजर रखती है क्योंकि इसका सीधा असर देश के व्यापार घाटे और विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ता है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक FY2025 के दौरान भारत ने लगभग 58 से 60 अरब डॉलर का सोना आयात किया। यह अब तक के सबसे ऊंचे स्तरों में से एक माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार Budget 2024 में ड्यूटी घटने के बाद आयात में तेज उछाल आया था।
PM Modi की अपील के बाद बढ़ी चर्चा
हाल ही में Narendra Modi ने अपने संबोधन में लोगों से पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने, गैरजरूरी विदेश यात्राएं टालने और एक साल तक सोने की खरीदारी सीमित रखने की अपील की थी।
उन्होंने कहा था कि वैश्विक परिस्थितियों और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। खासतौर पर होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बनी चिंताओं के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल की आशंका है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि सरकार का यह नया फैसला उसी आर्थिक रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जिसके जरिए आयात कम करने और विदेशी मुद्रा पर दबाव घटाने की कोशिश की जा रही है।
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