Dr. Somendra Tomar Journey: Somendra Tomar आज पश्चिमी यूपी की राजनीति में तेजी से उभरते नेताओं में गिने जा रहे हैं। लेकिन उनकी कहानी सिर्फ चुनाव जीतने तक सीमित नहीं है। गांव से निकलकर छात्र राजनीति में पहचान बनाना, संगठन में सालों तक काम करना और फिर सरकार में अहम जिम्मेदारी तक पहुंचना उनके लंबे राजनीतिक सफर की खास बात मानी जा रही है।
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Dr. Somendra Tomar Journey: छोटे गांव से बड़े सपनों की शुरुआत
डॉ. सोमेंद्र तोमर का परिवार मूल रूप से Khaila Village से जुड़ा है। सामान्य परिवार में पले-बढ़े सोमेंद्र का शुरुआती जीवन साधारण माहौल में बीता। गांव के लोगों के बीच रहना और सामाजिक गतिविधियों में हिस्सा लेना उन्हें बचपन से पसंद था।
बाद में परिवार Meerut आकर बस गया। मेरठ आने के बाद उनकी पढ़ाई के साथ-साथ लोगों के बीच सक्रियता भी बढ़ने लगी।
Dr. Somendra Tomar Journey: कॉलेज के दिनों में राजनीति की तरफ बढ़े कदम
पढ़ाई के दौरान ही उनका झुकाव छात्र राजनीति की तरफ हो गया। फिजिक्स विषय में पढ़ाई करने वाले सोमेंद्र ने एम.फिल और पीएचडी की डिग्री हासिल की, लेकिन साथ ही छात्रों के मुद्दों पर भी लगातार आवाज उठाते रहे।
कॉलेज और विश्वविद्यालय में वे ऐसे छात्र नेता के रूप में पहचाने जाने लगे जो छात्रों की समस्याओं को खुलकर सामने रखते थे। धीरे-धीरे कैंपस में उनकी मजबूत पहचान बनने लगी।
Dr. Somendra Tomar Journey: छात्रसंघ चुनाव से मिली नई पहचान
उन्होंने Akhil Bharatiya Vidyarthi Parishad के जरिए राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद साल 2003 में Chaudhary Charan Singh University छात्रसंघ चुनाव में हिस्सा लिया।
उस समय विश्वविद्यालय चुनाव को पश्चिमी यूपी की राजनीति का बड़ा मंच माना जाता था। चुनाव जीतने के बाद उनकी पहचान तेजी से बढ़ी और वे युवा राजनीति का चर्चित चेहरा बन गए।
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Dr. Somendra Tomar Journey: संगठन में मेहनत से बढ़ता गया कद
छात्र राजनीति के बाद उन्होंने खुद को पूरी तरह Bharatiya Janata Party संगठन में सक्रिय रखा। भाजयुमो के जरिए उन्होंने युवाओं के बीच लगातार काम किया।
पार्टी कार्यक्रमों और संगठनात्मक जिम्मेदारियों में सक्रिय रहने की वजह से नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच उनकी पकड़ मजबूत होती गई। यही वजह रही कि पार्टी में धीरे-धीरे उनका महत्व बढ़ने लगा।
Dr. Somendra Tomar Journey: टिकट नहीं मिला लेकिन नहीं छोड़ा साथ
साल 2012 का विधानसभा चुनाव उनके लिए चुनौती भरा समय माना गया। पार्टी उन्हें मेरठ दक्षिण सीट से चुनाव लड़ाने की तैयारी में थी, लेकिन अंतिम समय में टिकट बदल गया।
हालांकि इस फैसले के बाद भी उन्होंने संगठन से दूरी नहीं बनाई। वे लगातार पार्टी के साथ जुड़े रहे और कार्यकर्ताओं के बीच सक्रिय बने रहे। राजनीतिक जानकार इसे उनके धैर्य और संगठन के प्रति भरोसे के रूप में देखते हैं।
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Dr. Somendra Tomar Journey: 2017 में पहली जीत ने बदली तस्वीर
साल 2017 में भाजपा ने फिर उन पर भरोसा जताया और उन्हें Meerut South से चुनाव मैदान में उतारा। इस बार उन्होंने जीत हासिल की और पहली बार विधायक बने।
विधायक बनने के बाद उन्होंने क्षेत्र में लगातार दौरे किए और जनता के बीच अपनी मौजूदगी मजबूत की। इसके बाद उनकी राजनीतिक पहचान और मजबूत होती चली गई।
Dr. Somendra Tomar Journey: दूसरी जीत के बाद सरकार में बढ़ी जिम्मेदारी
साल 2022 के चुनाव में उन्होंने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की। इसके बाद उन्हें योगी सरकार में ऊर्जा विभाग में राज्यमंत्री बनाया गया। सरकार में जिम्मेदारी मिलने के बाद उनका राजनीतिक कद और बढ़ा। पश्चिमी यूपी में भाजपा के मजबूत नेताओं में उनका नाम तेजी से चर्चा में आने लगा।
Dr. Somendra Tomar Journey: अब यूपी की राजनीति में मजबूत चेहरा
अब 2026 में उन्हें राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसे संगठन में उनकी सक्रिय भूमिका और पश्चिमी यूपी में बढ़ते प्रभाव से जोड़कर देखा जा रहा है।
करीब 20 साल पहले छात्र राजनीति से शुरू हुआ उनका सफर अब यूपी की बड़ी राजनीति तक पहुंच चुका है। संगठन में लगातार मेहनत और जमीन से जुड़े रहने की वजह से आज वे भाजपा के मजबूत नेताओं में गिने जा रहे हैं।
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