Sonam Wangchuk Released: लद्दाख के विख्यात पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक के लिए शनिवार का दिन बड़ी राहत लेकर आया। केंद्र सरकार ने वांगचुक पर लगाए गए कड़े राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) को तत्काल प्रभाव से हटाने का निर्णय लिया, जिसके बाद उन्हें जोधपुर सेंट्रल जेल से रिहा कर दिया गया। वांगचुक पिछले 170 दिनों से सलाखों के पीछे थे। उनकी रिहाई के वक्त उनकी पत्नी गीतांजलि आंग्मो भी जेल परिसर पहुंची थीं, जहां से कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद दोनों एक निजी वाहन से रवाना हुए।
वांगचुक की यह रिहाई राजनीतिक और कानूनी गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट में उनकी हिरासत के खिलाफ दायर याचिका पर 17 मार्च को सुनवाई होनी थी। जानकारों का मानना है कि अदालत की संभावित सख्ती और लद्दाख में बढ़ते जन-दबाव को देखते हुए गृह मंत्रालय ने यह कदम उठाया है। मंत्रालय के अनुसार, लद्दाख में शांति, स्थिरता और आपसी विश्वास को मजबूत करने के लिए वांगचुक पर लगा NSA हटाने का फैसला लिया गया है।
क्यों जेल गए थे सोनम वांगचुक?
सोनम वांगचुक के संघर्ष की कहानी लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची (6th Schedule) में शामिल कराने की मांग से जुड़ी है। 24 सितंबर 2025 को लेह में हुए अनशन और उसके बाद भड़की हिंसा के बाद प्रशासन ने उन्हें हिरासत में लिया था। 26 सितंबर को उन पर NSA लगाकर जोधपुर जेल भेज दिया गया। उन पर आरोप था कि उनके आंदोलन की वजह से क्षेत्र की सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा को खतरा पैदा हुआ था। (Sonam Wangchuk Released)
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सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से पहले केंद्र का बड़ा फैसला
वांगचुक की पत्नी गीतांजलि ने अपने पति की गिरफ्तारी को ‘गैरकानूनी और असंवैधानिक’ बताते हुए सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। याचिका में दलील दी गई थी कि वांगचुक केवल लद्दाख के पर्यावरण और अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण आवाज उठा रहे थे। 17 मार्च की प्रस्तावित सुनवाई से ठीक पहले सरकार द्वारा NSA हटाना एक महत्वपूर्ण रणनीतिक बदलाव माना जा रहा है। गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि वांगचुक ने हिरासत की आधी अवधि पूरी कर ली है और वर्तमान परिस्थितियों में उनकी रिहाई उचित है। (Sonam Wangchuk Released)

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रिहाई पर वांगचुक का संदेश
जेल से बाहर आने से पहले और अपनी रिहाई के तुरंत बाद सोनम वांगचुक ने स्पष्ट कर दिया कि जेल की दीवारें उनके इरादों को कमजोर नहीं कर पाई हैं। सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक संदेश में उन्होंने कहा, “मैं अपने आंदोलन और सक्रियता से पीछे नहीं हटा हूं। मेरा संघर्ष लद्दाख की सुरक्षा, गरिमा और भविष्य के लिए था और आगे भी जारी रहेगा।” उनके इस बयान ने संकेत दे दिया है कि लद्दाख के अधिकारों की लड़ाई आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है। (Sonam Wangchuk Released)
लद्दाख में खुशी की लहर
सोनम वांगचुक की रिहाई की खबर मिलते ही लेह और कारगिल में जश्न का माहौल है। लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA), जो महीनों से उनकी रिहाई की मांग कर रहे थे, ने इसे लोकतंत्र की जीत बताया है। स्थानीय नेताओं का कहना है कि वांगचुक की रिहाई से सरकार और लद्दाख की जनता के बीच संवाद का रास्ता एक बार फिर खुल सकता है। (Sonam Wangchuk Released)



