Ramchandra Chhatrapati Murder Case: बहुचर्चित पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में एक अहम कानूनी मोड़ सामने आया है। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को इस मामले में बरी कर दिया है। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि उनके खिलाफ पेश किए गए सबूत इतने मजबूत नहीं हैं कि उन्हें दोषी साबित किया जा सके। हालांकि अदालत ने इस मामले में सजा पाए तीन अन्य आरोपियों की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। इस फैसले के बाद यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है और देशभर में इसकी चर्चा हो रही है।
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Ramchandra Chhatrapati Murder Case: 2002 में हुई थी पत्रकार की हत्या
यह मामला करीब दो दशक पुराना है। वर्ष 2002 में हरियाणा के सिरसा में पत्रकार रामचंद्र छत्रपति पर गोली चलाकर हमला किया गया था। उस समय वे एक स्थानीय अखबार के संपादक थे और डेरा सच्चा सौदा से जुड़ी कई खबरें प्रकाशित कर रहे थे। बताया जाता है कि उन्होंने डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम से जुड़े कुछ गंभीर आरोपों को लेकर रिपोर्ट प्रकाशित की थी। इन खबरों के सामने आने के बाद ही उन पर हमला हुआ। गोली लगने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन कुछ दिनों बाद उनकी मौत हो गई। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी थी।
Ramchandra Chhatrapati Murder Case: जांच CBI को सौंपी गई
घटना के बाद मामले ने तेजी से तूल पकड़ा और इसे एक हाई प्रोफाइल हत्या के रूप में देखा जाने लगा। शुरुआत में स्थानीय स्तर पर जांच हुई, लेकिन बाद में मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी गई। सीबीआई ने मामले से जुड़े कई लोगों से पूछताछ की, गवाहों के बयान दर्ज किए और घटनाक्रम से जुड़े साक्ष्य जुटाए। लंबे समय तक चली जांच के बाद सीबीआई ने अदालत में चार्जशीट दाखिल की और मामले की सुनवाई शुरू हुई।
Ramchandra Chhatrapati Murder Case: 2019 में CBI कोर्ट ने सुनाई थी सजा
लंबी सुनवाई के बाद वर्ष 2019 में पंचकूला स्थित विशेष सीबीआई अदालत ने इस मामले में अपना फैसला सुनाया था। अदालत ने गुरमीत राम रहीम को पत्रकार की हत्या की साजिश में शामिल मानते हुए उम्रकैद की सजा दी थी। इसके अलावा कुलदीप सिंह, निर्मल सिंह और किशन लाल नाम के तीन अन्य आरोपियों को भी दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। अदालत ने उस समय कहा था कि यह हत्या सोची-समझी साजिश के तहत की गई थी।
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Ramchandra Chhatrapati Murder Case: अपील के बाद हाईकोर्ट का फैसला
सीबीआई अदालत के फैसले के बाद सभी दोषियों ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। गुरमीत राम रहीम की ओर से कहा गया कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं। हाईकोर्ट ने मामले से जुड़े सभी दस्तावेज, गवाहों के बयान और कानूनी दलीलों पर विस्तार से सुनवाई की। इसके बाद अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि राम रहीम के खिलाफ आरोप पूरी तरह साबित नहीं हो पाए हैं, इसलिए उन्हें संदेह का लाभ दिया जाता है। इसी आधार पर अदालत ने उन्हें इस मामले में बरी कर दिया, जबकि बाकी तीन दोषियों की सजा बरकरार रखी गई।
Ramchandra Chhatrapati Murder Case: राहत के बावजूद जेल में ही रहेगा राम रहीम
इस मामले में राहत मिलने के बावजूद गुरमीत राम रहीम फिलहाल जेल से बाहर नहीं आएंगे। दरअसल वे पहले से ही अन्य मामलों में सजा काट रहे हैं। उन्हें दो साध्वियों के साथ दुष्कर्म के मामले में 20 साल की सजा सुनाई गई है और वे हरियाणा के रोहतक स्थित सुनारिया जेल में बंद हैं। इसके अलावा एक अन्य हत्या के मामले में भी उन्हें सजा मिल चुकी है। इसलिए छत्रपति हत्याकांड में बरी होने के बाद भी उनकी जेल से रिहाई फिलहाल संभव नहीं है। हालांकि कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इस फैसले के खिलाफ यदि जांच एजेंसी या पीड़ित पक्ष चाहे तो सुप्रीम कोर्ट में अपील भी कर सकता है।
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