Uttarakhand Elections 2027: उत्तराखंड में 2027 की शुरुआत में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। सत्ता में वापसी की रणनीति के साथ कांग्रेस ने साफ संकेत दिए हैं कि इस बार टिकट वितरण में मेहनती और जिताऊ उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाएगी। पार्टी नेतृत्व का कहना है कि केवल वरिष्ठता या दबाव की राजनीति नहीं, बल्कि जमीन पर काम और जीत की संभावना ही टिकट का आधार बनेगी।
प्रदेश की राजनीति में चुनावी सरगर्मियां अभी से दिखने लगी हैं। एक ओर सत्तारूढ़ BJP 2027 में लगातार तीसरी बार सरकार बनाने की तैयारी में जुटी है, तो दूसरी ओर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस सत्ता में वापसी के लिए संगठन को नए सिरे से सक्रिय कर रही है। दोनों दलों के बीच सीधी टक्कर की संभावना को देखते हुए कार्यकर्ता स्तर पर भी गतिविधियां बढ़ गई हैं।
टिकट से पहले होगा आकलन, सर्वे की तैयारी
प्रदेश कांग्रेस चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हरक सिंह रावत ने स्पष्ट किया है कि पार्टी इस बार उम्मीदवार चयन में विशेष सावधानी बरतेगी। उनके मुताबिक, आगामी चुनाव को ध्यान में रखते हुए बूथ से लेकर प्रदेश स्तर तक तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। हाल ही में आयोजित रैलियों और बैठकों के जरिए कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया गया है।
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उन्होंने कहा कि हर विधानसभा क्षेत्र की राजनीतिक स्थिति का पार्टी नेतृत्व को पूरा आकलन है। किन सीटों पर संगठन मजबूत है, कहां अतिरिक्त मेहनत की जरूरत है और किस क्षेत्र में स्थानीय समीकरण निर्णायक होंगे—इन सभी पहलुओं पर नजर रखी जा रही है। प्रत्याशियों के चयन से पहले पार्टी स्तर पर सर्वे कराने की भी योजना है, ताकि स्थानीय लोकप्रियता और जीत की संभावना का वास्तविक आंकलन हो सके।
भीड़ नहीं, जीत की क्षमता होगी प्राथमिकता
हर चुनाव में टिकट के दावेदारों की लंबी सूची सामने आती है। कई बार असंतोष के चलते बागी उम्मीदवार निर्दलीय मैदान में उतर जाते हैं, जिससे पार्टी को नुकसान उठाना पड़ता है। इस बार कांग्रेस ऐसे हालात से बचना चाहती है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, संगठन ऐसे कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता देगा जो लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहे हों, जनता के बीच उनकी स्वीकार्यता हो और वे चुनाव जीतने की स्थिति में हों। केवल दावे या गुटबाजी के आधार पर टिकट देने से बचने की रणनीति तैयार की जा रही है।
हरक सिंह रावत का कहना है कि मेहनत और जीत की क्षमता ही चयन का मुख्य मानदंड होगा। उनका यह भी दावा है कि पार्टी नेतृत्व को प्रदेश की प्रत्येक विधानसभा सीट की जमीनी स्थिति की जानकारी है, इसलिए अंतिम निर्णय तथ्यों और सर्वे के आधार पर लिया जाएगा।
Uttarakhand Elections 2027 क्यों है अहम?
Uttarakhand Elections 2027 की राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। BJP जहां लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी का लक्ष्य लेकर चल रही है, वहीं कांग्रेस पिछले चुनावों की हार के बाद संगठन को पुनर्जीवित करने की कोशिश में है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया ही चुनाव परिणाम पर बड़ा असर डाल सकती है। स्थानीय मुद्दे, नेतृत्व की विश्वसनीयता और संगठन की एकजुटता निर्णायक भूमिका निभाएंगे। ऐसे में कांग्रेस की सर्वे आधारित रणनीति पार्टी के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है, बशर्ते टिकट वितरण के बाद असंतोष को नियंत्रित रखा जाए।
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‘मुंबई डांस पार्टी’ बयान पर प्रतिक्रिया
इधर प्रदेश की राजनीति में हाल में एक और मुद्दे ने हलचल मचाई है। पूर्व विधायक प्रणव सिंह चैंपियन के ‘मुंबई डांस पार्टी’ संबंधी बयान के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए हरक सिंह रावत ने कहा कि ऐसे बयानों को अधिक गंभीरता से लेने की आवश्यकता नहीं है। उनके अनुसार, राजनीति में कई बार सनसनीखेज बयान सुर्खियां बटोरने के लिए दिए जाते हैं, लेकिन जनता का ध्यान असली मुद्दों पर होना चाहिए।
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हालांकि, इस बयान ने दोनों प्रमुख दलों के नेताओं के लिए असहज स्थिति पैदा कर दी है। चुनावी माहौल में ऐसे आरोप-प्रत्यारोप का असर कार्यकर्ताओं के मनोबल और जनचर्चा पर पड़ सकता है।
संगठन को एकजुट रखने की चुनौती
कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल मजबूत उम्मीदवार चुनना ही नहीं, बल्कि टिकट वितरण के बाद संगठन को एकजुट रखना भी है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि यदि जमीनी स्तर पर मेहनत और सही चेहरे को आगे बढ़ाया जाए तो Uttarakhand Elections 2027 परिणाम बदला जा सकता है।
आने वाले महीनों में सर्वे, बैठकों और रणनीतिक कार्यक्रमों के जरिए कांग्रेस अपनी चुनावी तैयारी को और धार देगी। अब देखना होगा कि मेहनती और जिताऊ फार्मूला Uttarakhand Elections 2027 में पार्टी के लिए कितनी कारगर साबित होता है।
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