Data Center India: देश में इन दिनों डेटा सेंटर को लेकर चर्चा तेज है। 1 फरवरी 2026 को पेश आम बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए अहम घोषणा की। सरकार ने संकेत दिया है कि विदेशी कंपनियों को भारत में डेटा सेंटर स्थापित कर क्लाउड सेवाएं देने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इस कदम को भारत को वैश्विक Data Center India बनाने की दिशा में रणनीतिक पहल माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला आने वाले वर्षों में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, निवेश और रोजगार के नए अवसर खोलेगा।
AI युग में क्यों जरूरी हैं डेटा सेंटर?
आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) हर क्षेत्र में अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुका है। बैंकिंग, हेल्थकेयर, शिक्षा, ई-कॉमर्स और सरकारी सेवाएं- हर जगह AI आधारित सिस्टम काम कर रहे हैं। लेकिन एआई को सुचारू रूप से चलाने के लिए भारी कंप्यूटिंग पावर और विशाल डेटा प्रोसेसिंग क्षमता की जरूरत होती है। यही काम डेटा सेंटर करते हैं।
Data Center India वे अत्याधुनिक सुविधाएं हैं जहां बड़े पैमाने पर डेटा को सुरक्षित तरीके से स्टोर, प्रोसेस और ट्रांसमिट किया जाता है। क्लाउड प्लेटफॉर्म, डिजिटल पेमेंट, सोशल मीडिया, वीडियो स्ट्रीमिंग और सरकारी डिजिटल सेवाएं- सबका आधार यही केंद्र हैं। ऐसे में सरकार का इस क्षेत्र पर फोकस करना डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
‘डेटा किला’ जो 24 घंटे चलता है
अगर डिजिटल दुनिया को कभी न सोने वाली दुनिया कहा जाए तो गलत नहीं होगा। हर व्हाट्सएप संदेश, हर ऑनलाइन ट्रांजैक्शन और हर स्ट्रीमिंग वीडियो के पीछे एक भौतिक ढांचा मौजूद है- डेटा सेंटर। इन विशाल परिसरों के भीतर हजारों सर्वर चौबीसों घंटे सक्रिय रहते हैं।
ये सर्वर सिर्फ कंप्यूटर नहीं, बल्कि देश की डिजिटल रीढ़ हैं। यहां बैंकिंग डेटा, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, सरकारी रिकॉर्ड और कॉर्पोरेट सूचनाएं सुरक्षित रखी जाती हैं। अंदर का वातावरण पूरी तरह नियंत्रित होता है- तापमान, आर्द्रता और धूल का स्तर तक। मशीनों की लगातार आवाज और कूलिंग सिस्टम की गूंज इस बात का संकेत देती है कि यहां हर सेकंड लाखों सूचनाएं प्रोसेस हो रही हैं।
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सुरक्षा और कूलिंग सिस्टम का कड़ा इंतजाम
Data Center India का संचालन बेहद संवेदनशील होता है। उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग से काफी गर्मी पैदा होती है, इसलिए औद्योगिक स्तर के कूलिंग सिस्टम लगाए जाते हैं। प्रिसिजन एयर कंडीशनिंग, विशेष पाइपलाइन और निरंतर जल प्रवाह के जरिए सर्वर को ठंडा रखा जाता है।
बिजली आपूर्ति यहां की सबसे महत्वपूर्ण जरूरत है। बड़े बैकअप जनरेटर, यूपीएस सिस्टम और बैटरी बैंक इस तरह डिजाइन किए जाते हैं कि बिजली आपूर्ति में एक सेकंड का भी व्यवधान न आए। इंजीनियरों की टीम 24 घंटे सर्वर की स्थिति, तापमान और पावर लोड पर नजर रखती है, ताकि किसी भी संभावित समस्या को पहले ही सुलझाया जा सके।
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निवेश की बाढ़ और 200 अरब डॉलर की उम्मीद
भारत का Data Center India बाजार तेजी से विस्तार कर रहा है। माइक्रोसॉफ्ट, गूगल और अमेजन जैसी वैश्विक कंपनियां पहले ही यहां निवेश बढ़ा चुकी हैं। घरेलू कंपनियां भी बड़े स्तर पर विस्तार की योजना बना रही हैं। सरकार ने बजट में कर प्रोत्साहन और नीतिगत समर्थन का संकेत दिया है, जिससे विदेशी निवेश आकर्षित होने की उम्मीद है।
अनुमान है कि आने वाले वर्षों में यह निवेश 200 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच सकता है। 2024 में जहां इस क्षेत्र से लगभग 1.2 अरब डॉलर की आय दर्ज की गई, वहीं 2027 तक डेटा सेंटर क्षमता 1.8 गीगावॉट तक पहुंचने का अनुमान है। वर्तमान में भारतीय डेटा सेंटर बाजार का आकार करीब 10 अरब डॉलर के आसपास माना जा रहा है।
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रोजगार और डिजिटल आत्मनिर्भरता को मिलेगा बल
Data Center India उद्योग के विस्तार से हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे। इंजीनियरिंग, आईटी, सुरक्षा, रखरखाव और निर्माण जैसे क्षेत्रों में नई संभावनाएं खुलेंगी। साथ ही, देश की डिजिटल संप्रभुता भी मजबूत होगी, क्योंकि स्थानीय स्तर पर डेटा स्टोरेज और प्रोसेसिंग से वैश्विक निर्भरता कम होगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि नीतिगत समर्थन और निवेश की रफ्तार बरकरार रही तो भारत आने वाले दशक में दुनिया के प्रमुख डिजिटल इंजनों में शामिल हो सकता है। बजट 2026 की घोषणा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सरकार डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को आर्थिक विकास का प्रमुख आधार मान रही है।
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