Russia WhatsApp Ban: रूस और अमेरिकी टेक कंपनियों के बीच बढ़ती तनातनी अब एक नए मोड़ पर पहुंच गई है। ताजा घटनाक्रम में मैसेजिंग प्लेटफॉर्म WhatsApp ने दावा किया है कि रूस ने उसकी सर्विस को पूरी तरह ब्लॉक (Russia WhatsApp Ban) करने की कोशिश की है। कंपनी के प्रवक्ता ने कहा है कि वे अपने यूजर्स को कनेक्टेड रखने के लिए हर संभव कदम उठा रहे हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूस में WhatsApp की कुछ सेवाएं पहले से ही सीमित थीं, लेकिन अब इसे पूरी तरह ब्लॉक करने की कार्रवाई की गई है। इससे पहले रूसी कम्यूनिकेशन वॉचडॉग Roskomnadzor ने WhatsApp को ऑनलाइन डायरेक्टरी से भी हटा दिया था। बताया जा रहा है कि रूस में करीब 10 लाख यूजर्स WhatsApp का इस्तेमाल (Russia WhatsApp Ban) करते हैं, जिन पर इस फैसले का सीधा असर पड़ेगा।
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युद्ध के बाद टेक कंपनियों पर सख्ती
यूक्रेन के साथ युद्ध शुरू होने के बाद से रूस ने कई अमेरिकी टेक कंपनियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। सरकार का आरोप है कि ये कंपनियां देश के कानूनों का पालन नहीं कर रहीं और सुरक्षा एजेंसियों के साथ जरूरी जानकारी साझा करने में सहयोग नहीं करतीं। रूस पहले ही WhatsApp और Telegram की कॉलिंग सेवाओं पर बैन लगा चुका है। रूसी अधिकारियों का कहना है कि इन प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल फ्रॉड और आतंकी गतिविधियों के लिए किया जा रहा था, जबकि कंपनियां कानूनी एजेंसियों के साथ डेटा साझा करने में पारदर्शिता नहीं दिखा रही थीं। इसी कड़ी में दिसंबर में Apple की FaceTime और Snapchat को भी ब्लॉक कर दिया गया था। सरकार के आदेश में कहा गया था कि इन ऐप्स का दुरुपयोग आपराधिक गतिविधियों के लिए हो रहा है।
‘MAX’ ऐप को बढ़ावा देने की रणनीति?
विश्लेषकों का मानना है कि WhatsApp पर बढ़ती पाबंदियों (Russia WhatsApp Ban) के पीछे एक रणनीतिक कारण भी हो सकता है। रूसी सरकार अपने नागरिकों को सरकारी मैसेजिंग ऐप MAX के इस्तेमाल के लिए प्रोत्साहित कर रही है। आलोचकों का दावा है कि सरकार इस ऐप के जरिए नागरिकों की डिजिटल गतिविधियों पर ज्यादा नियंत्रण चाहती है। हालांकि सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि MAX पूरी तरह सुरक्षित और राष्ट्रीय हित में विकसित प्लेटफॉर्म है। डिजिटल अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि विदेशी ऐप्स पर प्रतिबंध से नागरिकों की अभिव्यक्ति और निजी संचार की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है।
क्या हट सकता है WhatsApp से बैन?
क्रेमलिन के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया है कि बैन (Russia WhatsApp Ban) हटाने का सवाल पूरी तरह कानून के पालन पर निर्भर करता है। उनके अनुसार, अगर Meta (WhatsApp की पैरेंट कंपनी) रूस के स्थानीय कानूनों का पालन करती है और अधिकारियों के साथ बातचीत शुरू करती है, तो किसी समझौते की संभावना बन सकती है। लेकिन यदि Meta रूसी नियमों को मानने के लिए तैयार नहीं होती, तो WhatsApp पर लगा प्रतिबंध जारी रह सकता है। यह बयान साफ संकेत देता है कि मामला तकनीकी कम और राजनीतिक ज्यादा हो चुका है।
डिजिटल आयरन कर्टन की ओर रूस?
टेक विशेषज्ञों का मानना है कि रूस धीरे-धीरे एक ‘डिजिटल आयरन कर्टन’ की ओर बढ़ रहा है, जहां विदेशी डिजिटल सेवाओं की पहुंच सीमित की जा रही है और घरेलू विकल्पों को प्राथमिकता दी जा रही है। इस नीति का असर केवल टेक कंपनियों पर नहीं, बल्कि आम नागरिकों (Russia WhatsApp Ban) पर भी पड़ रहा है, जो अंतरराष्ट्रीय संवाद और कारोबार के लिए इन प्लेटफॉर्म्स पर निर्भर हैं।
यदि WhatsApp पर पूरी तरह बैन (Russia WhatsApp Ban) कायम रहता है, तो यह रूस में डिजिटल इकोसिस्टम को और अधिक बंद व्यवस्था की ओर ले जा सकता है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि Meta और रूसी सरकार के बीच कोई समझौता होता है या यह डिजिटल टकराव और गहराता है।
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